Tuesday, December 6, 2022
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MP breaking: विदेशी एनजीओ को गोशालाओं का संचालन, पंचायत अनजान // एफपीओ मनगवां और गंगेव को दे दिया गया दर्जनों गोशालाओं का काम

एनजीओ को पता नही कहां है उनकी गोशालाएं // एफपीओ के अध्यक्ष हैं कलेक्टर और सचिव हैं सीईओ जिला पंचायत // जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर लगा प्रश्न चिन्ह//

27 सितंबर 2022 रीवा मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में सरकारी गौशालाओं के संचालन का कार्य पूर्ण प्रोड्यूजिंग ऑर्गनाइजेशन अर्थात एफपीओ को थोक में दे दिया गया है। गंगेव की फूड प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन के संचालक शिवचरण तिवारी के द्वारा बताया गया कि उन्हें लगभग 2 दर्जन से अधिक गौशालाओं का संचालन का कार्य इन एफपीओ के अध्यक्ष जिला कलेक्टर और इनके सचिव सीईओ जिला पंचायत रीवा द्वारा आवंटित किया गया है और उनके लिए संबंधित ग्राम पंचायतों में राशि भी भेजी जा चुकी है।

ग्राम पंचायतों के सरपंच सचिव को पता नहीं कौन है संचालक

दिनांक 27 सितंबर 2022 को मुख्यमंत्री के गोपूजन अभियान के तहत गंगेव जनपद की हिनौती गौशाला में पहुंचे ग्राम पंचायत के सरपंच भारत साकेत और अन्य नागरिक रामायण प्रसाद चतुर्वेदी, हीरामणि शुक्ला, चिंतामणि चतुर्वेदी, कामता प्रसाद चतुर्वेदी और राम शिरोमणि साकेत आदि के द्वारा बताया गया की पिछले सरपंच शिववती सिंह और सचिव हीरालाल साकेत ने अप्रैल के आसपास बिना ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित किए हुए गौशाला संचालन का कार्य किसी एफपीओ के अधीन कर दिया जिसके संचालन का जिम्मा किसी शिवचरण तिवारी को दिया गया है। चुनाव उपरांत जब बेसहारा पशुओं की समस्या उत्पन्न हुई और किसानों ने दबाव बनाया तो ग्राम पंचायत के नवनिर्वाचित सरपंच भारत साकेत और प्रभारी सचिव प्रकाश उपाध्याय सहित अन्य ग्रामीणों के द्वारा जुलाई से गौशाला संचालन का कार्य प्रारंभ करवा दिया गया।

गौशाला संचालन और प्रबंधन किया पंचायत ने और पैसे की मांग कर रहे एफपीओ

ग्राम पंचायत हिनौती के सरपंच भारत साकेत और प्रभारी सचिव प्रकाश उपाध्याय ने आरोप लगाया है की गौशाला संचालन का कार्य उनके द्वारा निर्धारित किए गए कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है जिसमें उनकी पूरी भूमिका है लेकिन जब पैसे की बात आई तो पता चला कि जिला कलेक्टर और जिला सीईओ के माध्यम से पशु चिकित्सा सेवाएं के डिप्टी डायरेक्टर की अनुशंसा पर गौशाला संचालन का कार्य एफपीओ एनजीओ को दे दिया गया और अब इन एफपीओ द्वारा लगभग पौने 2 लाख रुपये राशि की माग की जा रही है जो पंचायत के खाते में आया हुआ है।

गौशालाओं में काम कर रहे लेबर ने कहा हमें पता नहीं कौन है एफपीओ और कौन है एनजीओ

मामले का खुलासा तब हुआ जब 27 सितंबर को गौपूजन के लिए आए एफपीओ गंगेव के संचालक शिवचरण तिवारी के द्वारा कहा गया कि मेरे द्वारा लेबर लगाए गए हैं और गौशाला का संचालन मेरे द्वारा किया जा रहा है जिस पर उपस्थित गोशाला कर्मचारियों राम शिरोमण साकेत एवं अन्य के द्वारा बताया गया कि हम आपको नहीं जानते कि आप कौन हैं क्योंकि इसके पहले तो आप कभी आए नहीं और हम गौशाला में काम सिर्फ ग्राम पंचायत के सरपंच भारत साकेत और सचिव प्रकाश उपाध्याय एवं ग्रामीणजनों के कहने पर कर रहे हैं और हमारा पैसा भी अभी बाकी है जिसका पिछले 6 माह से कोई पेमेंट नहीं हुआ है।

बड़ा सवाल क्या ग्राम सभा और ग्राम पंचायत को अंधेरे में रखकर संचालित हो रही है गौशालाऐं

गौरतलब है कि एफपीओ की इंट्री से जहां कई दर्जन गौशालाओं को थोक में जिला कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ की अनुशंसा और पत्रों के द्वारा इन फूड प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन के जिम्मे कर दिया गया है उसे स्थानीय ग्राम पंचायतों में कार्य कर रहे महिला स्व सहायता समूह और ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव में आक्रोश है और उनका यह कहना है कि जब सरकार ने हर ग्राम पंचायत में महिला स्व सहायता समूह का निर्माण कराया है तो फिर यह किस लिए हैं? यही कार्य तो गांव के महिला स्व सहायता समूह कर सकते थे और दो पैसे की आमदनी भी पा सकते थे लेकिन किसी विदेशी फूड प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन नामक एनजीओ को इस प्रकार थोक में बिना ग्राम पंचायत की जानकारी और ग्राम सभा के विधिवत प्रस्ताव के बिना यदि संचालन का कार्य दे दिया गया है तो इससे लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है और जो रोजगार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध करवाया जा सकता था उसके लिए इस प्रकार दूरदराज बैठे हुए एनजीओ के संचालक हजम कर रहे हैं और मौके पर गौशालाओं का कोई कार्य भी नहीं कर रहे हैं।

इस मामले से एक नया प्रश्न खड़ा हो गया है कि आखिर सरकार और प्रशासन में बैठे हुए अधिकारियों की मंशा क्या है? क्या सिर्फ गौशालाऐं इसी प्रकार कागजों में संचालित होती रहेंगी? क्या गौशालाओं और गोवंशों की सुरक्षा संरक्षण के लिए आने वाली राशि इसी प्रकार एनजीओ और उनके संचालक हजम करते जाएंगे? सवाल यह भी है कि जब इन संचालकों को यह नहीं पता कि उनकी गौशालायें कहां है और उनमें कितने मवेशी हैं कौन उनकी व्यवस्था और देखरेख कर रहा है तो आखिर इनको किस आधार पर पैसे दिया जाए?

एफपीओ संचालक शिवचरण तिवारी ने सरपंच सचिव पर बनाया अनैतिक दबाव

गंगेव जनपद में एफपीओ के संचालक शिवचरण तिवारी के द्वारा जिस प्रकार से मात्र अपने पैसे प्राप्त करने के लिए विवाद करने का प्रयास किया गया और हर स्तर पर ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव के ऊपर प्रभाव डालने का प्रयास किया जा रहा था जो की वीडियो में भी रिकॉर्डिंग की गई है उससे साफ जाहिर है कि इन एनजीओ के संचालकों को सिर्फ पैसे की भूख है और इनको इस बात की फिक्र नहीं है कि गौशालाओं में गोवंशों की क्या दुर्दशा है? यदि देखा जाए तो हिनौती ग्राम पंचायत की गौशाला में ही 100 के स्थान पर 500 के आसपास गोवंश रखे गए हैं जिनकी कोई समुचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है और चार से पांच फीट गोबर भरा पड़ा हुआ है जिसमें मरने वाले गोवंश भी वही नजदीकी तालाब में फेंक दिए जा रहे हैं जिसकी वजह से महामारी भी फैलने का खतरा है। ऐसे में एफपीओ एनजीओ के द्वारा मात्र पैसे का क्लेम किया जाना जिला कलेक्टर रीवा और जिला पंचायत सीईओ जो कि क्रमशः इस एफपीओ के अध्यक्ष और सचिव हैं उनकी कार्यप्रणाली और मंशा पर भी प्रश्न खड़ा करता है।

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