Saturday, November 26, 2022
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MP Breaking: गंगेव की बांस पंचायत के सरपंच सचिव से होगी 70 लाख की वसूली, दर्ज होगी एफआईआर

जाँच अधिकारियों को अभिलेख उपलब्ध न कराये जाने पर जारी हुई नोटिस।
सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी की शिकायत पर जाँच के बाद कार्यवाही पर सीईओ जिला पंचायत स्वप्निल वानखेड़े द्वारा जारी किया गया कारण बताओ सूचना पत्र।
07 दिवस के भीतर जबाब नहीं दिया तो होगी बड़ी कार्यवाही।

दिनांक 24 सितम्बर 2022 रीवा मप्र.

मप्र में रीवा संभाग पंचायती भ्रष्टाचार का केन्द्र्बिदु बनता जा रहा है. रीवा जिले का बहुचर्चित गंगेव ब्लाक आये दिन किसी न किसी भ्रष्टाचार की जांच को लेकर सुर्ख़ियों में बना रहता है. अभी पिछले दिनों चौरी पंचायत का मामला शांत नहीं हुआ और बांस में भी एक बार फिर व्यापक भ्रष्टाचार सामने आ चुका है.

बांस सरपंच सचिव से होगी 70 लाख से अधिक की वसूली, दर्ज होगी एफआईआर

गंगेव की बांस पंचायत कराधान घोटाले में भी अग्रणी रही है. अभी कराधान का जिन्न बोतल में पहुचा नहीं की भ्रष्टाचार का उससे भी भयानक प्रेत बाहर आ चुका है. इस बार मामला कुल 09 बिन्दुओं की शिकायत की जाँच के बाद दिए गए प्रतिवेदन में सामने आया है. बताया गया है की सामाजिक कार्यकर्त्ता शिवानंद द्विवेदी की शिकायत पर 09 बिन्दुओं की जाँच सीईओ जिला पंचायत स्वप्निल वानखेड़े के द्वारा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अधिकारियों द्वारा करवाई गयी थी. आरईएस के तीन अधिकारियों की टीम ने जांच तो किया लेकिन भ्रष्टाचार को दबाने के लिए तत्कालीन सरपंच सचिव के द्वारा जाँच टीम को अभिलेख उपलब्ध नहीं करवाए गए जिससे भ्रष्टाचार का आकलन नहीं किया जा सका. इस बाबत जानकारी सीईओ जिला पंचायत को प्रेषित कर जाँच टीम ने धारा 40 और 92 के लिए अनुशंसा की है. इसके बाद सीईओ जिला पंचायत द्वारा पत्र क्रमांक 4915/धारा 40-92/जि0पं0/2022 रीवा दिनांक 20/09/2022 के माध्यम से जारी करते हुए 07 दिवस के भीतर अभिलेख जांच अधिकारियों को उपलब्ध कराये जाने के सख्त निर्देश दिए हैं. कारण बताओ सूचना पत्र यह भी उल्लेख किया गया है की यदि 07 दिवस के भीतर सरपंच सचिव द्वारा अभिलेख प्रस्तुत नहीं किये जाते तो यह माना जाएगा की कोई भी कार्य धरातल पर हुए ही नहीं और अभिलेख नष्ट कर दिए गए हैं. जिसके लिए पूरे 09 कार्यों के लिए कुल 70 लाख 37 हज़ार रूपये की वसूली बनायी जाएगी और गबन के लिए एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी.

सरपंच सचिव ने इन इन कार्यों का नहीं सौंपा अभिलेख

ग्राम पंचायत बांस के सरपंच सचिव द्वारा जिन जिन कार्यों का अभिलेख नहीं दिया गया है उनमे से कलवर्ट रपटा निर्माण पुसई वाले नाले के पास ग्राम भदौहा कुल लागत 06 लाख रूपये, ह्युम पाइप पुलिया निर्माण खुटहा से अमवा रोड 5 लाख 11 हजार रुपया, रपटा निर्माण हनुमान स्वामी मंदिर के पास 14 लाख 49 हज़ार रूपये, कलवर्ट रपटा निर्माण पुसई वाले बांध के नीचे भदौहा टोला लागत राशि 06 लाख रूपये, ह्यूम पाइप कलवर्ट निर्माण मर्गुना नाला के पास लागत राशि 14 लाख 49 हज़ार रूपये, बाउंड्री वाल निर्माण आमला बगीचे के लिए लागत राशि 10 लाख 65 हजार रूपये, बाउंड्री वाल निर्माण प्राथमिक शाला भदौहा ग्राम बांस कुल लागत राशि 04 लाख 97 हज़ार रूपये, बाउंड्री निर्माण शांतिधाम के चारों तरफ बांस कुल लागत राशि 5 लाख 85 हज़ार रूपये, नाली निर्माण कार्य हरिजन बस्ती बांस में कुल लागत राशि 2 लाख 81 हजार रूपये. इस प्रकार कुल 09 कार्यों में कुल लागत राशि 70 लाख 37 हज़ार रूपये खर्च होना बताई गयी है. लेकिन सरपंच सचिव द्वारा कार्य की जाँच के लिए प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, मापपुस्तिका और पूर्णता प्रमाण नहीं प्रस्तुत किये जाने से भ्रष्टाचार का आकलन नहीं किया जा सका है. इसलिए जांच रिपोर्ट में जाँच अधिकारियों ने सभी कार्यों में अनियमिता और भ्रष्टाचार के लिए पूर्णतया सरपंच सचिव को दोषी ठहराया है और कहा है की जाँच के साक्ष्य छुपाने के लिए ही जाँच दल को इन सभी 09 कार्यों के अभिलेख नहीं दिए गए हैं जिसके लिए सीईओ जिला पंचायत रीवा स्वप्निल वानखेड़े द्वारा दोषी पाए जाने पर समस्त 70 लाख 37 हज़ार रूपये की वसूली के लिए कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है.

कराधान योजना के रपटा निर्माण में भ्रष्टाचार, 14 लाख 49 हज़ार का कार्य चढा भ्रष्टाचार की भेंट

बांस ग्राम पंचायत में 14 वें वित्त आयोग का कराधान योजना का कार्य रपटा निर्माण हनुमान स्वामी मंदिर के पास पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है. गौरतलब है की पूर्व में गठित जांच दल जिसने कराधान योजना के तहत कराये गए कार्यों का फर्जी तरीके से मूल्यांकन कर पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करते हुए क्लीन चिट दिया है उसे ही कार्यपालन यंत्री आर एस धुर्वे के जांच दल ने दोषी पाया है. बताया गया की इसके पहले इसी की जांच तत्कालीन कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा दिनेश आर्मो द्वरा भी की गयी थी जिसमे मूल्यांकनकर्ता टीम को दोषी पाया गया था. रपटा मौके पर 21 मीटर ही पाया गया था जबकि मूल्यांकन पूरे 30 मीटर का किया गया था. इसी प्रकार रपटा मापदंड के अनुसार न बनाया जाकर ह्युम पाइप के नीचे मात्र एक फीट का बेस कंक्रीट दिया गया था जबकि तकनीकी स्वीकृति में बेस 1 मीटर और 70 सेंटीमीटर का रखा गया था. इसी प्रकार ऊपर की सरफेस में 30 सेंटीमीटर के टॉप को 1 अनुपात 2 अनुपात 4 में मसाला के स्थान पर घटिया मिटटी डस्ट से बनाए जाने के कारण टॉप सरफेस पूरी तरह से टूट कर धंस गयी है. इस प्रकार यह 14 लाख 49 हज़ार रूपये का पूरा कार्य ही अमान्य करार करते हुए वसूली के लिए प्रस्तावित हुआ है. गौरतलब है की सीईओ जिला पंचायत स्वप्निल वानखेड़े द्वारा इन्ही सब कार्यों का सहायक यंत्री और उपयंत्री द्वारा कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी होना बताकर हाई कोर्ट और लोकायुक्त को जबाब भी भेजा जा चुका है. अब सवाल यह है यह तो वे कार्य हैं जिनकी जाँच हुई हैं और अभी पता नहीं ऐसे कितने कार्य होंगे जिनकी जांच पेंडिंग पड़ी है और यदि पूरी हुई तो कराधान योजना में हुए भ्रष्टाचार पर क्लीन चिट देने के प्रयास पर वरिष्ठ अधिकारी भी जाँच के घेरे में आ जायेंगे.

आमले के बगीचे के लिए 11 लाख रूपये की बाउंड्रीवाल, जाँच अधिकारी भी रह गए सन्न

बाउंड्री वाल का निर्माण अमूमन भवनों के लिए होता है. जैसे की यदि स्कूल, सामुदायिक भवन अथवा पंचायत भवन है तो उसके लिए बाउंड्री वाल का निर्माण किया जाता है लेकिन क्या आपने सुना है की कभी बगीचे और खेतों के लिए बाउंड्री वाल का निर्माण हुआ है? बांस पंचायत में भ्रष्टाचार की हद तो तब हो गयी जब 14 वें वित्त आयोग की परफॉरमेंस ग्रांट की राशि का दुरूपयोग करते हुए आमले के बगीचे के लिए बाउंड्री वाल बनवा दी गयी. 14 वें वित्त आयोग के दिशानिर्देश भी देखे गए तो कहीं भी ग्रांट के उपयोग के लिए बगीचे अथवा खेत के लिए बाउंड्री वाल निर्माण का जिक्र नहीं है. जांच अधिकारी भी यह देख कर सन्न रह गए की आखिर पंचायत में बहुत से ऐसे कार्य होते हैं जहाँ इस प्रकार की ग्रांट का उपयोग किया जा सकता है. और बांस हाई स्कूल ही है जहाँ पर अब तक बाउंड्री वाल नहीं बनाई गयी है जहाँ इस राशि का प्रयोग किया जा सकता था. बांस में प्राथमिक और माध्यमिक शाला भी है जहाँ बाउंड्री वाल बनाया जा सकता था लेकिन बांस से हटकर भदौहा टोला में तत्कालीन सरपंच गीता पटेल द्वारा अपने ठीक घर के सामने स्थित आमले के बगीचे में अपने निजी उपयोग के उद्देश्य से बाउंड्री वाल बनवाकर राशि का पूरी तरह से दुरूपयोग किया गया है. इस बात का जिक्र हालाँकि जांच अधिकारियों धुर्वे और प्रजापति की टीम ने भी किया और वहीँ पूर्व के आर्मो और आर डी पाण्डेय की टीम ने भी किया.

अब बड़ा सवाल यह है क्या पंचायत के विकास के लिए आने वाले फण्ड का ऐसा दुरूपयोग करने वाले पंचायत सरपंच सचिव को कब जेल की सलाखों के पीछे पहुचाया जाएगा.

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