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बिलासपुर में बिना किताबों के पढ़ाई:स्कूल-खुलने के बाद भी नहीं पहुंची, 70-80 GSM विवाद में फंसा पेच; DEO बोले- जल्द होगा डिस्ट्रीब्यूशन

 

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 बिलासपुर छत्तीसगढ़ में नया शिक्षा सत्र शुरू हुए 15 दिन से ज्यादा बीत चुके हैं। स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो गई है, कक्षाएं भी चल रही हैं और शिक्षक भी पढ़ाने का दावा कर रहे हैं। लेकिन बिलासपुर के स्कूलों में अब तक पाठ्य पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। इस वजह से हजारों छात्र बिना किताबों के ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

पाठ्य पुस्तक निगम से जुड़े लोगों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में 70 और 80 जीएसएम कागज को लेकर सरकारी स्तर पर विवाद चल रहा है। इसी कारण किताबों की छपाई और स्कूलों तक पहुंचने में देरी हुई है।

कागज की गुणवत्ता को लेकर चल रही तकनीकी दिक्कतों, टेंडर प्रक्रिया में बदलाव और प्रशासनिक देरी के कारण जुलाई के शुरुआती दिनों तक कई जिलों के स्कूलों में किताबें नहीं पहुंच पाई है।

कुछ समय पहले बिलासपुर दौरे पर आए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने अधिकारियों को नए शिक्षा सत्र की सभी तैयारियां समय पर पूरी करने और किताबें स्कूलों तक पहुंचाने के निर्देश दिए थे।

उन्होंने दावा किया था कि सत्र शुरू होने से पहले ही सभी बच्चों को किताबें मिल जाएंगी, लेकिन हकीकत यह है कि कई स्कूलों में अब तक पूरी किताबें नहीं पहुंची हैं।

वहीं, इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल का कहना है कि पाठ्य पुस्तक निगम से नई किताबें आ गई हैं, जिसका जल्द डिस्ट्रीब्यूशन होगा।

जिले के 3 लाख छात्रों को चाहिए 15 लाख किताबें

बिलासपुर जिले में करीब 3 लाख छात्रों के लिए नए शिक्षा सत्र में लगभग 15 लाख किताबों की जरूरत है। हर छात्र को उसकी कक्षा के हिसाब से 3 से 6 किताबें दी जाती हैं। प्राथमिक कक्षा के बच्चों को 3 से 4 किताबें, मिडिल स्कूल के छात्रों को 5 किताबें और हाईस्कूल के छात्रों को 6 किताबें मिलनी हैं।

लेकिन पिछले 3 महीने से टेंडर में देरी और कागज से जुड़ी समस्या के कारण किताबों की छपाई और डिस्ट्रीब्यूशन समय पर नहीं हो पाया। इसकी वजह से कई स्कूलों में बच्चे अब भी बिना पूरी किताबों के पढ़ाई कर रहे हैं।

बता दें कि राज्य सरकार की योजना के तहत कक्षा 1 से 10वीं तक के सभी छात्रों को मुफ्त किताबें दी जाती हैं। इन किताबों को छापने और स्कूलों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी पाठ्य पुस्तक निगम की होती है। इस बार देरी होने से नए सत्र की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।

स्कूल खुल गए, लेकिन किताबें अब भी नहीं पहुंचीं

नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन कई स्कूलों में छात्रों को अब तक पूरी किताबें नहीं मिली हैं। बच्चों और पेरेंट्स को उम्मीद थी कि इस बार किताबें समय पर मिल जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

कई छात्र अभी भी पुरानी कॉपी, नोट्स या शिक्षकों के बताए पाठ के सहारे पढ़ाई कर रहे हैं। इससे पढ़ाई की रफ्तार धीमी हो गई है। सत्र की शुरुआत का अहम समय भी बिना किताबों के गुजर रहा है, जिससे छात्रों को परेशानी हो रही है।

NCERT के नए नियमों से किताबों की छपाई में हुई देरी

किताबों के डिस्ट्रीब्यूशन में हुई देरी के पीछे पाठ्य पुस्तक निगम की तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रमुख वजह माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार NCERT के नए दिशानिर्देशों के बाद पुस्तकों के प्रकाशन से जुड़ी प्रक्रिया में बदलाव करना पड़ा। इन्हीं बदलावों के कारण टेंडर और छपाई का काम तय समय पर पूरा नहीं हो सका।

बताया जा रहा है कि पहले विभाग 70 जीएसएम कागज पर किताबें छपवाता था। इस बार NCERT के निर्देशों के अनुरूप इसे बढ़ाकर 80 जीएसएम करने का प्रस्ताव रखा गया।

हालांकि, इस पर यह तर्क देते हुए आपत्ति जताई गई कि मोटे कागज से किताबों का वजन बढ़ेगा और छात्रों के स्कूल बैग का बोझ भी ज्यादा हो जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव में संशोधन करना पड़ा, जिससे टेंडर और छपाई की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई और किताबों के वितरण में देरी हो गई।

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