रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर:भारतमाला सड़क ने खींच दी 10 फीट तक ऊंची दीवार; घर इस पार, स्कूल और खेत उस पार

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छत्तीसगढ़। में बन रहे रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला इकोनॉमिक और ग्रीन कॉरिडोर ने कई गांवों को दो हिस्सों में बांट दिया है। अभनपुर के झांकी से राज्य के अंतिम गांव मरंगपुरी तक करीब 125 किमी लंबे मार्ग में रायपुर, धमतरी, कांकेर और कोंडागांव जिले के 80 से ज्यादा गांव आ रहे हैं। कहीं किसानों के खेत तो कहीं स्कूल सड़क के दूसरी ओर पहुंच गए हैं। सिर्री, करगा, पुसेरा, सकरी, सिवनीकला, गोबरा, भोथली, मेरक्का, भरदा, कुरूद, कमरौद, परसवानी, सिंघौरी, बांगर, जोरातराई, बारना, बासनवाही, मावलीपारा और मरंगपुरी तक पड़ताल की। सामने आया कि गांवों के परंपरागत रास्ते में कॉरिडोर की 10 से 15 फीट ऊंची सड़क दीवार बन गई है। कुछ जगह इसकी ऊंचाई 20 फीट तक है। बारिश में अंडरपास में पानी भर रहा है। ऐसे में किसानों को खाद-बीज और कृषि उपकरण लेकर सड़क पर चढ़ना और दूसरी ओर उतरना पड़ रहा है।

नहर वाले रास्तों पर भी कीचड़ बना परेशानी जिन गांवों में नहर सड़क के नीचे से गुजर रही है, वहां ग्रामीण उसी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन बारिश में कीचड़ होने से पैदल या साइकिल से निकलना मुश्किल है। ट्रैक्टर और बड़े वाहन ही यहां से निकल पा रहे हैं। सड़क की अधिक ऊंचाई के कारण किनारों पर भी पानी जमा हो रहा है।
49 बच्चों के सामने स्कूल पहुंचने का संकट
कांकेर जिले के मावलीपारा में गांव और स्कूल के बीच से एक्सप्रेस-वे गुजर रहा है। स्कूल में 49 बच्चे पढ़ते हैं। अभी निर्माणाधीन सड़क के बीच से उनका आना-जाना हो रहा है, लेकिन सड़क शुरू होने के बाद यह रास्ता बंद हो जाएगा। सरपंच सियाराम कोसमा वैकल्पिक रास्ते की मांग को लेकर पत्र भेज चुके हैं, पर अब तक सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
खाद-बीज लेकर सड़क से उतरना जोखिम भरा
कांकेर जिले के मावलीपारा में गांव और स्कूल के बीच से एक्सप्रेस-वे गुजर रहा है। स्कूल में 49 बच्चे पढ़ते हैं। अभी निर्माणाधीन सड़क के बीच से उनका आना-जाना हो रहा है, लेकिन सड़क शुरू होने के बाद यह रास्ता बंद हो जाएगा। सरपंच सियाराम कोसमा वैकल्पिक रास्ते की मांग को लेकर पत्र भेज चुके हैं, पर अब तक सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
अंडरपास में पानी, मवेशियों के रास्ते से आ-जा रहे ग्रामीण करैहा के सरपंच राधेश्याम नेताम ने बताया कि सड़क ने गांव को दो हिस्सों में बांट दिया है। अधिकांश किसानों के खेत दूसरी ओर हैं। आवाजाही के लिए बनाया गया अंडरपास बारिश में पानी से भर गया, इसलिए किसान मवेशियों के लिए बने रास्ते का उपयोग कर रहे हैं।
जहां स्कूल हैं, वहां फुट ओवरब्रिज की योजना जिन स्थानों पर स्कूल हैं, वहां फुट ओवरब्रिज या दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था की योजना बनाई जा रही है। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी नहीं होने दी जाएगी। जिन गांवों के अंडरपास में पानी भरने से किसानों को दिक्कत हो रही थी, वहां से पानी निकलवा दिया गया है। सड़क पूरी होने के बाद किसानों और बच्चों की आवाजाही में कोई परेशानी नहीं होगी।



