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भोपाल में कांग्रेस की ‘किसान महाचौपाल’, राहुल बोले विपक्ष के नेता को लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया

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भोपाल। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में कांग्रेस ने आज राजधानी के जवाहर चौक पर विशाल ‘किसान महाचौपाल’ का आयोजन किया है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों और कार्यकर्ताओं के जुटने का दावा किया गया। सागर से आई एक महिला कार्यकर्ता ‘इंडिया नॉट फॉर सेल’ लिखी टी-शर्ट पहनकर विरोध दर्ज कराती नजर आई। आयोजन के लिए करीब 50 हजार लोगों की क्षमता वाला डोम तैयार किया गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ट्रेड डील को ‘ट्रंप की तलवार’ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि इस समझौते से कपास, सोयाबीन और सरसों के दाम गिर रहे हैं, जिससे किसान संकट में हैं।
इधर भाजपा ने आरोपों को निराधार बताया है। कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने राहुल गांधी के कृषि ज्ञान पर सवाल उठाए। विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने कहा कि कांग्रेस अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रही है।
राहुल गांधी के भाषण की खास बातें
- राष्ट्रपति के अभिभाषण बाद पहले वाला प्रतिपक्ष का नेता होता है यह हर साल हुआ देश के इतिहास में पहली बार लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलते नहीं दिया गया।
- मैंने अपने भाषण शुरू किया मुझे रोका गया फिर शुरू की रोका गया मैंने नरवाडे जी की बात उठाई उन्होंने किताब लिखी है।
- उसमें साफ लिखा जब चीन के टैंक हिंदुस्तान की बाउंड्री के अंदर आ रहे थे तो उन्होंने राजनाथ सिंह जी को फोन किया और पूछ मेरे लिए आर्डर क्या है।
- राजनाथ सिंह जी ने जवाब नहीं दिया उसके बाद अजीत डोभाल को फोन किया कि चीन के हिंदुस्तान के अंदर आ रहे हैं मुझे क्या करना चाहिए आर्डर बताइए कोई जवाब नहीं दिया।
- उसके बाद विदेश मंत्री जयशंकर को फोन किया आर्मी के में उनसे कहा कि देखिए चीन की आर्मी टैंक हमारे सीमा में आ रहे हैं।
- मुझे क्या करना है कोई जवाब नहीं दो घंटे बाद फिर से नरवाडे जी ने रक्षा मंत्री को फोन किया कहते हैं प्रधानमंत्री से पूछिए मेरे लिए आर्डर क्या है।
- यह सवाल इसलिए पूछ रहे थे चीनी सी पर फायर करने का निर्णय प्रधानमंत्री को लेना पड़ता है।
- युद्ध का निर्णय आर्मी की नहीं ले सकता है वह मिलिट्री डिसीजन नहीं होता है वह राजनीतिक निर्णय होता है और वह प्रधानमंत्री लेता है चीन की आर्मी अंदर आ रही है कोई जवाब नहीं।
- उसके बाद राजनाथ सिंह जी प्रधानमंत्री को कॉल करते हैं प्रधानमंत्री में आरुषि और रक्षा मंत्री से कहते हैं कि आर्मी के को बताओ जो वह उचित समझे वह करें उसे दिन हिंदुस्तान की सरकार प्रधानमंत्री ने अकेला छोड़ दिया



