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अबूझमाड़ में बचे खुचे माओवादी प्रभाव को कुचल देंगे 5,000 बस्तर फाइटर्स

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रायपुर। बस्तर में माओवादी हिंसा समाप्ति के बाद यहां तैनात केंद्रीय सुरक्षा बल के 40 हजार जवानों की चरणबद्ध वापसी होगी। इसी के मद्देनजर बस्तर के ग्रामीण अंचलों में सुरक्षा व कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 5,000 बस्तर फाइटर (स्थानीय युवाओं) की भर्ती करने का निर्णय लिया गया है। पहले चरण के तहत 1,500 फाइटरों की नियुक्ति को राज्य शासन से प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है। गृह विभाग भर्ती प्रक्रिया को राज्य स्तर पर आयोजित करने के बजाय संभाग और जिला स्तर पर करने की तैयारी कर रहा है। दिसंबर तक भर्ती करने का प्रस्ताव है। इसके बाद दूसरे और तीसरे चरण की भर्ती प्रक्रिया होगी।
केंद्रीय बल की चरणबद्ध वापसी
केंद्रीय सुरक्षा बल की धीरे-धीरे वापसी को लेकर गृहमंत्री विजय शर्मा पहले ही संकेत दे चुके हैं। वर्तमान में बस्तर में तैनात सीआरपीएफ और अन्य केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की चरणबद्ध वापसी के बाद ही यह विशेष बल मोर्चा संभालेगा।
स्थानीय युवाओं पर इसलिए भरोसा
यह पहली बार नहीं है जब बस्तर के स्थानीय युवाओं को सीधे मोर्चे पर उतारने के लिए भर्ती नियमों में बदलाव किया गया है। इससे पहले भी माओवादियों से लोहा लेने के लिए स्थानीय स्तर पर सलवा जुडूम जन-आंदोलन खड़ा किया गया था। बस्तर फाइटर में स्थानीय युवाओं के होने से क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, बोली-बानी और सामाजिक संरचना की उनकी समझ का लाभ सुरक्षा अभियानों में मिलेगा।
प्रभावी होगी सुरक्षा व्यवस्था
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय भागीदारी से सुरक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी और स्थायी बनेगी। माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास को स्थायी रूप देने के लिए यह बल अहम भूमिका निभाएगा। बस्तर फाइटों को आधुनिक प्रशिक्षण और संसाधनों से भी लैस किया जाएगा।



