धान का सही बीज चुनेंगे तो 30 प्रतिशत पैदावार बढ़ेगी:विशेषज्ञों की सलाह- मिट्टी, पानी के मुताबिक बीज का चयन बहुत जरूरी

किसान धान बीज की तैयारी में जुट गए हैं। लेकिन अब भी बड़ी संख्या में किसान परंपरागत या लोकल बीज पर निर्भर हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में ही धान की 23 हजार से अधिक उन्नत किस्में उपलब्ध हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और उससे जुड़े रिसर्च सेंटरों द्वारा विकसित इन किस्मों को अपनाकर किसान उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर सकते हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!प्रदेश में स्वर्णा, महामाया और एमटीयू-1010 जैसी किस्मों का उपयोग सबसे ज्यादा हो रहा है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में राजेश्वरी और हाइब्रिड धान 6444 बेहतर उत्पादन दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची, मध्यम और निचली भूमि के लिए अलग-अलग अवधि और क्षमता वाली किस्में विकसित की गई हैं।
कई किस्में रोगरोधी हैं, कुछ कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं, जबकि सुगंधित धान की किस्मों की बाजार में ज्यादा कीमत मिलती है। यदि किसान अपनी भूमि और जलवायु के अनुसार सही किस्म का चयन करें तो उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी संभव है।
छत्तीसगढ़ को तीन कृषि जलवायु क्षेत्र के बतौर बांटा गया 1. छत्तीसगढ़ मैदानी क्षेत्र प्रदेश का लगभग 51 प्रतिशत हिस्सा वार्षिक वर्षा : 950 से 1200 मिमी मिट्टी : भाठा, मटासी, डोसा, कन्हार 2. उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र लगभग 28 प्रतिशत क्षेत्र वार्षिक वर्षा : 1160 से 1380 मिमी हल्की व मध्यम मिट्टी अधिक 3. बस्तर पठार क्षेत्र लगभग 21 प्रतिशत क्षेत्र वार्षिक वर्षा : 1250 से 1410 मिमी भारी और गहरी मिट्टी
भूमि के अनुसार धान की उपयुक्त किस्में
-ऊंची भूमि के लिए (100-110 दिन वाले धान) कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त धान की किस्म – छत्तीसगढ़ जिंक राइस-1, बस्तर धान-1, इंदिरा बारानी, दंतेश्वरी, पूर्णिमा प्रमुख फसलें है। फायदा: कम अवधि, कम पानी में बेहतर उत्पादन।
– मध्यम भूमि के लिए (110-130 दिन वाले धान) ज्यादा क्षेत्र में बोई जाने वाली किस्में किस्म : डीआरआर धान, इंदिरा एरोबिक-1, विक्रम टीसीआर, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान, राजेश्वरी, कर्मा, मौसेरी किस्म। फायदा: सामान्य बारिश में अच्छा उत्पादन, कई किस्में रोगरोधी।
-निचली भूमि के लिए (130-145 दिन) ज्यादा पानी वाले खेतों के लिए किस्म : स्वर्णा, स्वर्णा सब-1, महेश्वरी, छत्तीसगढ़ सुगंधित भोग, बादशाह भोग सिलेक्शन-1, दुबराज सिलेक्शन-1। फायदा: ज्यादा उत्पादन और सुगंधित धान की बाजार में बेहतर कीमत।
यहां से ली जा सकती है प्रमाणित बीज – सभी प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति – बस्तर क्षेत्र में लैम्प्स – सभी बीज निगम – कृषि विभाग – कृषि विज्ञान केंद्र – कृषि महाविद्यालय – कृषि विश्वविद्यालय – कृषि रिसर्च सेंटर
प्रदेश में सबसे ज्यादा बोई जाने वाली किस्में स्वर्णा – ज्यादा उत्पादन, निचली भूमि में उपयुक्त महामाया – स्थिर उत्पादन राजेश्वरी – मैदानी क्षेत्र में ज्यादा पैदावार एमटइयू-1010 – किसानों की पसंदीदा पारंपरिक उन्नत किस्म हाइब्रिड 6444 – हाई प्रोडक्शन हाइब्रिड
गैर प्रमाणित बीजों के चयन से नुकसान हुआ
कबीरधाम जिले के ग्राम जाेराताल के किसान नरेश कश्यप बताते हैं कि वे शुरुआत में पारंपरिक बीज का उपयोग करते थे। साथ ही बिना उपचारित बीज का प्रयोग करते थे। ऐसे में उत्पादन कम हो रहा था। तब केविके से जानकारी ली, जिसके बाद अब मिट्टी, पानी की स्थिति को देखते हुए उन्नत किस्म के बीच का चयन किया। इसके बाद उत्पादन में काफी अंतर आया।



