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अमेरिका के 10 सैन्य विमान इजराइल में उतरे:ट्रम्प की पश्चिम एशिया के टॉप कमांडर से मुलाकात, ईरान पर फिर हमले की तैयारी

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अमेरिका।   अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। पिछले एक हफ्ते में उसके 10 से ज्यादा सैन्य मालवाहक विमान दक्षिणी इजराइल के एयरबेस पर उतरे हैं। इसी बीच राष्ट्रपति ट्रम्प ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी सेना के पश्चिम एशिया कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर से मुलाकात की। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, कूपर ने ईरान पर संभावित सैन्य हमले के विकल्पों की जानकारी दी। बैठक में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन भी मौजूद थे।

अमेरिकी चुनाव के बाद ईरान पर हमले की तैयारी

अमेरिका और इजराइल 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमले करने की योजना बना रहे हैं।वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, दोनों देश छोटी लेकिन तेज सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। इसमें ईरान के ऊर्जा ठिकानों, परमाणु केंद्रों और मिसाइलों व ड्रोन के भंडार को निशाना बनाया जा सकता है।हालांकि, ट्रम्प अभी सैन्य कार्रवाई नहीं करने का फैसला भी ले सकते हैं।

सऊदी, कतर, कुवैत में भी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा अमेरिका

विमान ट्रैकिंग डेटा पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका के ज्यादातर सैन्य मालवाहक विमान टेक्सास के बिग्स आर्मी एयरफील्ड से रवाना हुए थे। ये इजराइल के नेवातिम और ओवदा एयरबेस पहुंचे।इसके अलावा अमेरिका के कई सैन्य विमान सऊदी अरब, कतर, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी पहुंचे हैं।इन विमानों में क्या सामान लाया गया, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका संभावित युद्ध से पहले पश्चिम एशिया में अपनी हवाई सुरक्षा मजबूत कर रहा है। अमेरिका टेक्सास से पैट्रियट मिसाइल सिस्टम की एक बैटरी भी पश्चिम एशिया भेज रहा है। इसका इस्तेमाल दुश्मन के मिसाइल हमलों को रोकने के लिए किया जाता है।

ईरान पर चुनावों में दखल देने के आरोप लगे

ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ के मुताबिक, ईरान ने इजराइल के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की थी। साथ ही वह अगले हफ्ते होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में भी दखल देने की तैयारी कर रहा था।अखबार ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया कि इसके लिए एजेंटों की भर्ती और अमेरिकी चुनाव सिस्टम को हैक करने वाले साइबर समूह बनाने की कोशिश की गई।एक अधिकारी ने कहा कि ईरान इसे अमेरिका और इजराइल के खिलाफ युद्ध का हिस्सा मानता है। उसका मकसद दोनों देशों के लोगों के बीच मतभेद बढ़ाना है। हालांकि, ईरान किसी खास उम्मीदवार का समर्थन नहीं करता।यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब इजराइल में चुनाव में विदेशी दखल के आरोपों की जांच चल रही है। चुनाव आयोग ने गुरुवार को सुरक्षा एजेंसी शिन बेट को इसकी जांच के आदेश दिए।

अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी

ईरान ने गुरुवार को बताया कि उसे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का पत्र मिला है, लेकिन उसने अभी जवाब नहीं दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, इस पत्र का मकसद दोनों देशों के बीच शांति वार्ता फिर शुरू करना था। ईरान ने अमेरिका के सामने रखी अपनी 7 शर्तें पूरी करने की मांग दोहराई है। दूसरी ओर, ट्रम्प ने कहा कि वेंस ने ईरान से शांति वार्ता के लिए नहीं, बल्कि मेडिकल सामान पहुंचाने के मामले में संपर्क किया था। ट्रम्प के मुताबिक, ईरान ने बीमार लोगों के लिए मेडिकल सामान और दूसरी जरूरी चीजों की मदद मांगी थी। वेंस ने इस बारे में उनसे राय ली थी और उन्होंने मदद की इजाजत दे दी।

होर्मुज के पास समुद्री बारूदी सुरंगों से 3 टैंकर टकराए

इसी बीच होर्मुज स्ट्रेच के पास तीन टैंकरों में धमाके हुए और उनमें आग लग गई। ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, पिछले 24 घंटे के दौरान ये टैंकर समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों से टकरा गए थे। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बताया कि तीनों टैंकर होर्मुज के दक्षिण में एक ऐसे रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहे थे, जिसे इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं थी। ईरानी गार्ड के मुताबिक, टैंकरों ने अपने रडार और रास्ता बताने वाले सिस्टम बंद कर दिए थे। इसके अलावा उन्होंने नौसेना की चेतावनियों को भी नजरअंदाज किया।

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