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जिस सरकार को अपने सुशासन पर इतना दम है, उसके राज में 56 सरपंचों को सामूहिक इस्तीफा देने की नौबत क्यों आई?-अभिषेक मिश्रा, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, आम आदमी पार्टी

 

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रायपुर,24 मई 2026। आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने अंतागढ़ विकासखंड की 56 ग्राम पंचायतों के सरपंचों द्वारा सामूहिक इस्तीफा दिए जाने की घटना को राज्य सरकार की प्रशासनिक असफलता, ग्रामीण उपेक्षा और खोखले सुशासन का जीवंत प्रमाण बताया है।

उन्होंने कहा कि जब ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए आवश्यक राशि ही उपलब्ध नहीं कराई जाएगी, तब गांवों का विकास केवल सरकारी भाषणों और विज्ञापनों तक सीमित रह जाएगा। पंचायत प्रतिनिधि महीनों से शासन से गुहार लगा रहे हैं, धरना दे रहे हैं, ज्ञापन सौंप रहे हैं, किंतु सरकार सत्ता के अहंकार में इतनी डूबी हुई है कि उसे गांवों की पीड़ा सुनाई ही नहीं दे रही।

आज स्थिति यह है कि पंचायतों में सड़क निर्माण, नाली निर्माण, पेयजल व्यवस्था, आंगनबाड़ी मरम्मत, सामुदायिक भवन, स्वच्छता और अन्य आवश्यक कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति थम चुकी है और जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर है।

56 सरपंचों का सामूहिक इस्तीफा कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि भाजपा सरकार के खिलाफ गांव-गांव में पनप रहे जनाक्रोश का स्पष्ट संकेत है। यह इस्तीफा सरकार के उस तथाकथित “सुशासन मॉडल” पर करारा तमाचा है, जिसका ढिंढोरा प्रतिदिन पीटा जाता है।

आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।
प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था अव्यवस्था का शिकार है, अस्पतालों में संसाधनों का अभाव है, अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, किसान खाद-बीज और उर्वरकों के लिए दर-दर भटक रहे हैं, जबकि शिक्षित युवा बेरोजगारी की मार झेल रहा है।

सरकार “सुशासन तिहार” जैसे आयोजनों के माध्यम से केवल प्रचार-प्रसार में व्यस्त है, जबकि जमीनी स्तर पर जनता की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। लाखों शिकायतें और आवेदन लंबित पड़े हैं, लेकिन सरकार कुछ चुनिंदा मामलों का दिखावटी निराकरण कर स्वयं की पीठ थपथपाने में लगी हुई है।

आम आदमी पार्टी मांग करती है कि पंचायतों के लंबित विकास कार्यों के लिए तत्काल विशेष बजट जारी किया जाए, ग्राम पंचायतों को वित्तीय अधिकारों के साथ पर्याप्त निधि उपलब्ध कराई जाए तथा ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा बंद कर जवाबदेही तय की जाए।

यदि सरकार ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में प्रदेशभर में पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।

 

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