*कृष्णा विकास ग्लोबल यूनिवर्सिटी, रायपुर में सॉफ्ट स्किल्स और करियर के अवसरों पर एक दिवसीय सेमिनार का सफल आयोजन*

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
रायपुर कृष्णा विकास ग्लोबल यूनिवर्सिटी (KVGU), रायपुर के स्कूल ऑफ़ साइंस एंड कंप्यूटिंग द्वारा विश्वविद्यालय के सभी संकायों के विद्यार्थियों के लिए “एक सफल करियर के लिए सॉफ्ट स्किल्स का महत्व” और “नौकरी बनाम उद्यमिता (जॉब वर्सेज़ एंटरप्रेन्योरशिप)” विषयों पर एक दिवसीय विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की व्यावसायिक क्षमताओं को बढ़ाना, आवश्यक जीवन कौशल (लाइफ स्किल्स) विकसित करना और उन्हें आधुनिक पेशेवर जगत के विभिन्न करियर विकल्पों से परिचित कराना था।

इस सेमिनार में पुणे इंस्टीट्यूट ऑफ़ बिज़नेस मैनेजमेंट के हेड ऑफ़ ट्रेनिंग, प्रो. भानुप्रताप सिंह मुख्य वक्ता (रिसोर्स पर्सन) के रूप में उपस्थित रहे। अपने ज्ञानवर्धक और आकर्षक सत्र के माध्यम से उन्होंने पेशेवर सफलता प्राप्त करने में सॉफ्ट स्किल्स की बढ़ती अनिवार्यता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि प्रभावी संचार (कम्युनिकेशन), टीम वर्क, नेतृत्व क्षमता (लीडरशिप), आलोचनात्मक चिंतन (क्रिटिकल थिंकिंग), समस्या समाधान (प्रॉब्लम-सॉल्विंग), अनुकूलनशीलता (एडैप्टेबिलिटी), समय प्रबंधन और सकारात्मक दृष्टिकोण ऐसे मौलिक गुण हैं जो विद्यार्थियों को उनके करियर में ऊंचाइयों तक पहुँचाते हैं।
प्रो. सिंह ने रेखांकित किया
कि केवल शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी ज्ञान (टेक्निकल नॉलेज) ही दीर्घकालिक व्यावसायिक सफलता के लिए पर्याप्त नहीं हैं। आज के नियोक्ता (एम्पलॉयर) ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देते हैं जिनमें मजबूत पारस्परिक कौशल (इंटरपर्सनल स्किल्स), भावनात्मक बुद्धिमत्ता (इमोशनल इंटेलिजेंस), पेशेवर नैतिकता और टीम के साथ मिलकर काम करने की उत्कृष्ट क्षमता हो। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास, शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी, प्रस्तुतिकरण (प्रेजेंटेशन), समूह चर्चा और अनुभवात्मक शिक्षण (एक्सपीरिएंशियल लर्निंग) के माध्यम से इन कौशलों को विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र का विषय “नौकरी बनाम उद्यमिता” रहा, जिसने विद्यार्थियों को रोजगार और उद्यमिता दोनों से जुड़े लाभों, चुनौतियों और उत्तरदायित्वों पर बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की। वक्ता ने पारंपरिक नौकरियों से मिलने वाली स्थिरता, संरचित विकास और व्यावसायिक सीखने के अवसरों पर प्रकाश डालने के साथ-साथ, अपना व्यवसाय शुरू करने में निहित स्वतंत्रता, नवाचार (इनोवेशन), जोखिम लेने की क्षमता और नेतृत्व के महत्व को भी समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी प्राथमिकताओं को समझने, अपनी शक्तियों को पहचानने, एक उद्यमी सोच (एंटरप्रेन्योरियल माइंडसेट) विकसित करने और अपनी क्षमताओं के आधार पर सूझबूझ से करियर के निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम की गरिमामयी उपस्थिति में कृष्णा विकास ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलपति (वाइस-चांसलर) प्रो. वाई. नरसिम्हुल्लू और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) की निदेशक डॉ. सीमा अग्रवाल विशेष रूप से मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और करियर-उन्मुख शिक्षा के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया।
इस सेमिनार ने सभी संकायों के विद्यार्थियों को व्यावसायिक आचरण, पारस्परिक प्रभाव और करियर योजना के महत्व को गहराई से समझने के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान किया। इसने उन्हें व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास के लिए नौकरी और उद्यमिता दोनों को एक प्रभावी मार्ग के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया।
सेमिनार का समापन शैक्षणिक उत्कृष्टता को सॉफ्ट स्किल्स, व्यावहारिक ज्ञान, नवाचार और उद्यमिता क्षमताओं के साथ एकीकृत करने के महत्व पर नए सिरे से बल देने के साथ हुआ। ऐसे निरंतर प्रयासों के माध्यम से, कृष्णा विकास ग्लोबल यूनिवर्सिटी विद्यार्थियों को पेशेवर दुनिया की बदलती माँगों के अनुरूप तैयार करने और उन्हें आत्मविश्वासी, सक्षम एवं जिम्मेदार पेशेवर बनाने के अपने संकल्प को लगातार मजबूत कर रही है।
कार्यक्रम का सफल संचालन और समन्वय श्री प्रदीप कुमार चापके द्वारा किया गया।


