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इंदौर अग्निकांड : रोते हुए बोली कार्तिक की मां, बोला था- मैं बड़े पापा को देखकर आऊंगा, वो हमेशा के लिए चला गया

 

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 इंदौर। मेरे कार्तिक (छोटू) ने दसवीं की परीक्षा दी थी। उसका बड़े पापा (विजय) से लगाव था। उनका कुछ दिनों पूर्व ही कैंसर का ऑपरेशन हुआ था। कार्तिक ने कहा- बड़े पापा को देखकर आऊंगा। वह बहन (टीनू) के साथ एक दिन पूर्व ही इंदौर आया था। घर में आग लग गई और कार्तिक हमेशा के लिए चला गया। दो बहनों में इकलौता था कार्तिक। यह कहना है ब्रजेश्वरी (एनएक्स) अग्निकांड में मृत कार्तिक सेठिया की मां महक सेठिया का।

किशनगंज (बिहार) निवासी महक अपने बेटे के अंतिम संस्कार में भी नहीं पहुंच पाई। गुरुवार को पति राजेश अस्थियां लेकर जाने लगे तो बेहोश हो गई। महक की दो बेटियां (रिद्धि-सिद्धि) हैं। उसने नईदुनिया से चर्चा में बताया 15 मार्च को रचना (टीनू) के साथ इंदौर रवाना हुआ था। टीनू जेठ विजय की बेटी है। विजय कैंसर की बीमारी से ग्रसित थे। पत्नी सुमन के साथ उपचार करवाने इंदौर आ गए थे। कार्तिक ने मिलने की इच्छा जताई और टीनू के साथ आ गया।

पिता की सेवा के लिए इंदौर आई थी टीनू

महक के अनुसार पति सुबह दुकान पर थे। अचानक कॉल आया तो लगा कुछ काम होगा। उन्होंने सिर्फ इतना कहा- मनोज जी के घर में आग लग गई है। दोपहर को मौत की खबर मिली तो कोलकाता होकर इंदौर पहुंचे। टीनू की सास और पति राजेश इंदौर आ चुके हैं। दोपहर को सीएम से मिले और घटना की चर्चा की।

उन्होंने कहा कि टीनू पापा (विजय) की सेवा करने के लिए इंदौर आई थी। दोनों बच्चे राशि और तनय भी साथ में थे। सुबह रिश्तेदारों से हादसे की जानकारी मिली और फ्लाइट से इंदौर रवाना हो गए। बागान क्षेत्र (सिलिगुड़ी) में रहने वाले राजेश से टीनू की 2013 में शादी हुई थी। उनका किशनगंज (बिहार) में व्यापार है।

परिवार से मिलने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि दुखद घटना घटी है। पुलिस के अधिकारी और एसीएस को जांच के लिए इंदौर भेजा था। घर के बाहर लगी आग अंदर तक पहुंच जाना और घर के दरवाजे लाक हो जाएं। एक्सपर्ट से जांच करवाएंगे। इसकी जांच रिपोर्ट आने का इंतजार करेंगे। उम्मीद करेंगे कि दोबारा इस तरह की घटना न हो।

दो-दो लाख देगी बिहार सरकार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अग्निकांड से बिहार के किशनगंज जिले के रहने वाले छह लोगों की मौत पर संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने इस घटना को दुखद बताते हुए मुख्यमंत्री राहत कोष से मृतकों के आश्रितों को दो-दो लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान (मुआवजा) देने का निर्देश दिया है।

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