बेहद शुभ योग में धनतेरस आज, इस विधि से करें कुबेर-लक्ष्मी पूजा, जानें विधि, कथा, मंत्र, आरती और खरीदारी मुहूर्त
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को दीं धनतेरस की शुभकामनाएं

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दीपावली की धूम शुरू हो चुकी है. धनतेरस से इसकी शुरुआत हो जातीहै. आज यानी 18 अक्तूबर को कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी
तिथि पर धनतेरस का पर्व मनाया जा रहा है. यह दिन खरीदारी और पूजा-पाठ के लिए बहुत शुभ होती है. आइए जानते हैं तिथि, पूजा
विधि और खरीदारी का शुभ मुहूर्त
दीपोत्सव पर्व की आज यानी धनतेरस से शुरुआत हो चुकी है. देश में इस पर्व को उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है. सभी लोग एक-दूसरे को बधाई-शुभकामनाएं दे रहे हैं. इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने देशवासियों के लिए सुख-समृद्धि की कामना की और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेश दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को धनतेरस की शुभकामनाएं देते हुए भगवान धन्वंतरि से सभी के लिए आशीर्वाद मांगा.
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों होती है?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान धन्वंतरि ने मानव कल्याण के लिए अमृतमय औषधियों की खोज की. इन्हीं के वंश में राजा दिवोदास हुए, जिन्हें शल्य चिकित्सा का जनक कहा गया. उनके शिष्य महर्षि सुश्रुत ने “सुश्रुत संहिता” जैसे महान आयुर्वेद ग्रंथ की रचना की, जिसमें चिकित्सा विज्ञान का विस्तृत वर्णन है. यही कारण है कि धनतेरस को भगवान धन्वंतरि की पूजा होती है. आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है.
धनतेरस की शाम मिट्टी का एक चौमुखा दीया लें. उसे पानी से धोकर सुखा लें. इससे वह दीपक अच्छे से जलेगा. आज शाम 05 बजकर 48 मिनट पर यम के लिए दीपक जलाएं. दीपक में सरसों का तेल भर लें. अब उस चौमुखे दीपक में 4 बत्ती लगाएं. मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह, त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम. इस मंत्र को पढ़ते हुए दीपक जलाएं. इस दीपक को घर के बाहर दक्षिण दिशा में रखें. दक्षिण दिशा यमराज की दिशा मानी गई है
धनतेरस के दिन करें इन शक्तिशाली मंत्रों का जप
गणेश मंत्र: वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा.
लक्ष्मी मंत्र: ऊँ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नम:
कुबेर मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः
भगवान धन्वंतरि मंत्र
ओम नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:
अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोग निवारणाय
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप
श्री धन्वंतरि स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नम:



