पद्म विभूषण तीजन बाई के निधन पर भिलाई इस्पात संयंत्र ने व्यक्त किया गहरा शोक

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भिलाई। इस्पात संयंत्र परिवार ने विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्म विभूषण से अलंकृत लोककला की अप्रतिम साधिका तथा भिलाई इस्पात संयंत्र की पूर्व कर्मी तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उनका निधन न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि संपूर्ण देश की सांस्कृतिक एवं लोककलात्मक परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति है।
भिलाई के समीप स्थित गनियारी ग्राम में जन्मी तीजन बाई ने अत्यंत साधारण परिवेश से निकलकर अपनी अद्भुत प्रतिभा, अथक साधना और संघर्ष के बल पर पंडवानी जैसी समृद्ध लोककला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपने ओजस्वी गायन, सशक्त अभिनय और विशिष्ट प्रस्तुति शैली के माध्यम से जीवंत स्वरूप प्रदान किया। उनकी कला ने भारतीय लोकसंस्कृति को विश्व के अनेक देशों तक पहुँचाते हुए भारत की सांस्कृतिक गरिमा को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। तीजन बाई ने सामाजिक रूढिय़ों को चुनौती देते हुए पंडवानी की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ा और अपनी विशिष्ट कापालिक शैली की प्रस्तुति से इस लोकविधा को नई ऊर्जा एवं व्यापक स्वीकार्यता प्रदान की। वे केवल एक लोकगायिका नहीं थीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत की सशक्त संवाहक और लोककलाओं की वैश्विक पहचान थीं।




