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छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन, भारतीय किसान यूनियन

वकालत के छात्र और किसान नेता रुबजी सलाम पर फर्जी आरोप लगाकर गिरफ्तारी करना “तानाशाही की मिसाल”, सीबीए ने उनकी तत्काल रिहाई की माँग उठाई

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सच तक इंडिया रायपुर छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने अपने सदस्य और भारतीय किसान यूनियन के नारायणपुर जिला अध्यक्ष की गिरफ्तारी को गलत ठहराते हुए, पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निन्दा की है, और उनकी तत्काल रिहाई की माँग उठाई है। रुबजी सलाम कई वर्षों से नारायणपुर के आदिवासी किसानों के मुद्दे उठा रहे है, और राष्ट्रीय किसान नेता, राकेश टिकायत के मढ़ोनार आंदोलन में आगमन में इनकी मुख्य भूमिका रही , जिससे इस आंदोलन को राष्ट्रीय ख्याति मिली । सीबीए और बीकेयू का मानना है कि ऐसे ही कार्यों से परेशान होकर शासन प्रशासन द्वारा इन पर झूठा आरोप लगाकर, इन्हें आज उठाया है।

छोटे फरसगांव (नारायणपुर) के निवासी, 26 वर्षीय रुबजी सलाम इस समय कांकेर में वकालत की पढ़ाई कर रहे थे और उनकी गिरफ्तारी अनुसूचित जनजाति के छात्रों के होस्टल के सामने से ही हुई है। एक किसान युवा नेता के रूप में रुबजी ने अपने क्षेत्र के किसानों की समस्याओं को उजागर करने के लिए पूरी मेहनत की और इसे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई बार उठाया। इसी कारण वे नारायणपुर के सभी पुलिस और प्रसानिक अधिकारियों से, और नारायणुर के समस्त जन प्रतिनिधियों से अच्छी तरह से परिचित हैं, और उन पर प्रतिबंधित माओवादी पार्टी का आरोप झूठा ही नहीं, बल्कि हास्यास्पद है। यह गिरफ्तारी केवल एक मजबूत और साहसी नेता को चुप कराने के प्रयास के रूप में ही समझी जा सकती है।

ज्ञात हो कि जिस FIR में रुबजी सलाम को आज उठाया गया है, उसी के आधार पर 4 महीने पहले नारायणपुर में विभिन्न स्थानों पर हो रहे आदीवासी आंदोलनों से जुड़े कई युवा कार्यकर्ताओं को प्रतिबंधित माओवादी पार्टी के द्वारा किए गए जियो टावर जलाने के फर्जी आरोप गिरफ्तार किया गया है। विडम्बना की बात यह है, कि रुबजी सलाम इन्हीं कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ पुलिस से शिकायत कर रहे थे, जब उन्हें मालूम हुआ कि उनका भी नाम इस FIR में है। इसकी शिकायत करने रुबजी सलाम दूसरे दिन स्वयं पुलिस अधीक्षक नारायणपुर के ऑफिस पहुँचे, और उनसे मिलकर उन्हें यह जानकारी भी दी कि घटना 1 और 2 जून की रात्रि की है, पर 2 जून को वे अपने साथियों के साथ तेंदू पत्ता संग्राहकों की मांगों को रखने राज्य मंत्री केदार कश्यप से मिले थे (जिसका समाचार लेख यहाँ देखा जा सकता है https://public.app/video/sp_8zp0ee61a2osj?utm_medium=android&utm_source=share ) और 4 जून से दुसरे सेमेस्टर के परीक्षा शुरू हो रहे थे जिसके लिए रुबजी कांकेर में रहे थे। पुलिस अधीक्षक महोदय ने उन्हें आश्वासन भी दिया था कि वे इस जानकारी से संतुष्ट हैं, और उनके खिलाफ इस FIR को लेकर कोई अग्रिम कार्रवाई नहीं होगी। परन्तु अब कौनसी परिस्थिति बदली कि पुलिस अधीक्षक भी अपने आश्वासन पर खरे नहीं उतरे हैं, और एक स्षष्ट फर्जी केस में एक युवक को गिरफ्तार कर रहे हैं?

दिनांक 22 अक्टूबर 2024 को माढ़ बचाओ आंदोलन ने ओरछा में थल सेना को दी जा रही अबूझमाढ़ की 54,543 हे भूमि के विरोध में शांतिपूर्वक धरना प्रदर्शन किया, जिसमें रुबजी सलाम ने युवा किसान नेता की भूमिका निभाते हुए, अबूझमाढ़ से विस्थापित हो रहे किसान परिवारों के भविष्य पर चिंता जताई। इसके तुरन्त बाद 26 अक्तूबर 2024 को इनकी गिरफ्तारी से तो यही संदेश मिलता है कि जो कोई भी शासन-प्रशासन के खिलाफ आवाज़ उठाता है, उसे पुलिस उत्पीड़न का सामना करना पड़ेगा।

सीबीए और बीकेयू बस्तर में व्यापक सैन्यकरण की आड़ में हो रहे विस्थापन पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बस्तर के आंदोलनकारी साथियों के समर्थन में खड़ा है। पुलिस के इस मनमानी रवैये की सीबीए कड़ी निन्दा करता है, और आदिवासी किसान नेता रुबजी सलाम के तत्काल रिहाई की मांग करता है।

 

 

 

 

 

 

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