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MP Breaking: कराधान घोटाले का मास्टरमाइंड निलंबित लिपिक राजेश सोनी होगा बर्खास्त, सीईओ जिला पंचायत रीवा के द्वारा कमिश्नर को भेजा गया प्रस्ताव

गंगेव जनपद की 38 पंचायतों में हुए कराधान घोटाले का मुख्य आरोपी है राजेश सोनी।

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मनगवा थाने में शिवशक्ति कंस्ट्रक्शन के मालिक नागेंद्र सिंह सहित राजेश सोनी पर कई धाराओं में दर्ज है एफआईआर।

दिनांक 15 नवंबर 2022 रीवा मध्य प्रदेश।

मप्र में कराधान घोटाले में हुए व्यापक भ्रष्टाचार को लेकर एक नया मोड़ आ गया है। जहां कराधान घोटाले में संलिप्त ग्राम पंचायतों में अनैतिक तौर पर कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करते हुए उन्हें बरी करने का प्रयास किया गया था वहीं अब पूरे मामले की गाज कराधान करारोपण घोटाले के प्रमुख आरोपी गंगेव जनपद के निलंबित लिपिक राजेश सोनी के ऊपर गिरती नजर आ रही है। हालांकि मामले में गंगेव जनपद की 38 पंचायतों के तत्कालीन सरपंच सचिव बराबर के जिम्मेदार हैं लेकिन यहां पर गौरतलब है कि राजेश सोनी सरपंचों से डीएससी हासिल करते हुए उसके द्वारा मात्र तीन बार में लगभग 12 करोड़ की राशि शिव शक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी सहित अन्य फर्मों को बिना कार्य करवाए हुए जारी कर दी गई थी। राजेश सोनी पर आरोप था कि उसके द्वारा सरपंच सचिवों से मिलीभगत करते हुए कमीशन लेकर ऐसा वित्तीय अपराध कारित किया गया था। भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा स्वप्निल वानखेड़े एवं तत्कालीन कलेक्टर डॉक्टर इलैयाराजा टी द्वारा राजेश सोनी सहित शिव शक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोपराइटर नागेंद्र सिंह एवं रोजगार सहायक रही उनकी पुत्री प्रतिभा सिंह के ऊपर एफ आई आर दर्ज की गई थी।

एसडीएम मनगवा के जांच प्रतिवेदन के आधार पर सीईओ जिला पंचायत ने भेजा बर्खास्तगी का प्रस्ताव

मामले को लेकर अभी हाल ही में दिनांक 30/09/2022 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा स्वप्निल वानखेड़े के द्वारा पत्र क्रमांक 6056/जि0पं0/2022 रीवा के माध्यम से आयुक्त संभाग रीवा को पत्र लिखकर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मनगवा के पत्र क्रमांक 0318/प्रवा0/अनु0अधि0/2020 मनगवां दिनांक 22/07/2020 का हवाला देते हुए कराधान करारोपण घोटाले में मुख्य भूमिका निभाने वाले निलंबित लिपिक राजेश सोनी के द्वारा 7.14 करोड़ों रुपए के अनैतिक और अवैधानिक तरीके से शिव शक्ति ट्रेडर्स आदि वेंडर्स के खाते में एकमुश्त बिना कार्य कराए हुए राशि जारी किए जाने एवं साथ में डिजिटल सिग्नेचर और अन्य ऑनलाइन प्रक्रिया को अपने हाथ में लेकर सरपंच सचिवों की मिलीभगत से वित्तीय अनियमितता किए जाने और साथ में विभाग के द्वारा दर्जनों पत्राचार के बावजूद भी अपना प्रभार और दस्तावेज आदि जानकारी संबंधित जनपद पंचायत गंगेव के अन्य प्रभारी कर्मचारियों को न दिए जाने आदि आरोपों के चलते अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मनगवा के द्वारा राजेश सोनी को बर्खास्त किए जाने एवं कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही का प्रस्ताव के आधार पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा के द्वारा उसी प्रस्ताव का हवाला देते हुए कमिश्नर संभाग रीवा को पत्र जारी किया गया है।

सरपंच सचिवों की भूमिका पर उठे सवाल पर कार्यवाही क्यों नहीं

निलंबित लिपिक राजेश सोनी के ऊपर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मनगवा एवं तत्पश्चात 30/09/2022 में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा स्वप्निल वानखेड़े द्वारा आयुक्त संभाग रीवा को भेजे गए बर्खास्तगी संबंधी उक्त प्रस्ताव के बाद लोगों के मन में एक प्रश्न स्वाभाविक तौर पर उठा रहा है कि आखिर जब डिजिटल सिग्नेचर उपलब्ध करवाए जाने और राशि आहरण में बराबर की भूमिका तत्कालीन सरपंच सचिवों की भी थी तो आखिर निलंबित लिपिक राजेश सोनी पर कार्यवाही के साथ-साथ सरपंच और सचिवों को क्यों बख्शा जा रहा है? दूसरा सबसे बड़ा प्रश्न तत्कालीन लेखा अधिकारी सहायक लेखा अधिकारी एवं जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की भूमिका पर भी खड़ा होता है कि आखिर इतना बड़ा भ्रष्टाचार होते हुए इनकी भूमिका की जांच क्यों नहीं की गई? सवाल यह भी खड़ा होता है कि जब कराधान योजना की राशि का वितरण किया जा रहा था उस समय करारोपण की पात्रता अर्थात किन-किन पंचायतों में किन-किन वस्तुओं और व्यक्तियों पर अथवा किन स्थानों पर कर लगाया गया और उस कर लगाने की क्या प्रक्रिया है और क्या उस प्रक्रिया का पालन नियमानुसार किया गया है इन प्रश्नों को लेकर भी तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत से लेकर जिला एवं भोपाल तक के बैठे हुए वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रश्न खड़े हो जाते हैं।
बहरहाल अभी तक इन प्रश्नों का जवाब न तो किसी जांच अधिकारी के द्वारा दिया गया है और न ही इन मामलों पर जांच ही उस गंभीरता के साथ ही हो पाई है जिससे सभी भ्रष्टाचार की परतें खुल पाए। जानकारी अनुसार यह मामला लोकायुक्त आर्थिक अपराध शाखा से लेकर हाईकोर्ट जबलपुर में चल रहा है। इस मामले को मुख्य रूप से उठाने वाले और भ्रष्टाचार की परतें खोलने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी एवं संजय पांडेय की भूमिका अहम रही है। मामले को लेकर पूर्व जनपद उपाध्यक्ष संजय पांडेय के द्वारा गंगेव जनपद की 38 पंचायतों को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई है वहीं सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा मामले पर वरिष्ठ एवं उच्च स्तर पर कार्यवाही की मांग करते हुए आरटीआई के माध्यम से बड़े बड़े खुलासे किए गए हैं जिसके बाद न केवल गंगेव जनपद की 38 पंचायतों की बल्कि संपूर्ण रीवा जिले की 75 पंचायतों एवं पूरे मध्यप्रदेश की 1148 पंचायतों में कराधान करारोपण घोटाले के दायरे में आ चुकी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर लिपिक राजेश सोनी की बर्खास्तगी के बाद आगे क्या आम जनता के टैक्स के पैसे की गाढ़ी कमाई से भ्रष्टाचार करने वाले इन सरपंच सचिवों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के ऊपर भी कार्यवाही हो पाएगी अथवा नहीं?

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MP Breaking: ऐतिहासिक सेदहा पंचायत शांतिधाम चोरी मामला: 7 भ्रष्टों पर गिरेगी गाज, गंगेव जनपद CEO से भी पौने 2 लाख की होगी वसूली

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जांच अधिकारियों ने निष्फल व्यय मानते हुए साढ़े 11 लाख रूपये शांतिधाम व्यय पर वसूली के लिए भेजा प्रतिवेदन।

सरपंच सचिव GRS सहित 2 इंजिनियर सहायक लेखाधिकारी एवं जनपद CEO गंगेव से होगी बराबर की वसूली।

मनमाने ढंग से कार्य करवाने गलत डीपीआर बनाए जाने के पाए गए दोषी।

अधीक्षण यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा आर एस धुर्वे के द्वारा जांच रिपोर्ट कमिश्नर रीवा संभाग को सौंपी गई।

जाँचकर्ता रामलाल कोकोटे

दिनांक 08 अक्टूबर 2022 रीवा मप्र।

रीवा मप्र के शांतिधाम चोरी मामले में एक नया मोड़ आ गया है. अब तक कुल 4 मतर्बा की गयी जांच में 7 जिम्मेदारों को दोषी पाया गया है जिसमें अब साढ़े 11 लाख रूपये की वसूली और दंडात्मक कार्यवाही होनी है. मामले की जांच सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी पूर्व सेदहा सरपंच राजमणि सिंह एवं पुष्पराज सिंह की शिकायत पर हुई है. बताया जा रहा है की इसके पहले भी कई बार जाँच हुई थी लेकिन जांच में लीपापोती की जा रही थी जिसको लेकर एक बार फिर शिकायत की गयी थी. शिकायत कमिश्नर रीवा संभाग के समक्ष की गयी थी जिसके बाद अधीक्षण यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा आर एस धुर्वे को लेख किया जाकर जाँच प्रतिवेदन चाहा गया था. जांच में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्री रामलाल कोकोटे और सहायक यंत्री श्रीकांत द्विवेदी की टीम ने संयुक्त तौर पर जांच की थी. इसी मामले की जांच राजस्व विभाग द्वारा की गयी थी जिसमे कमिश्नर द्वारा ही एस डी एम से जांच करवाई गयी थी जिसमे शांतिधाम सेदहा की आराजी नंबर 3 में न बनाया जाकर हिनौती पंचायत की गदही की आराजी नंबर 24 और 27 में बना होना पाया गया था. मामले पर दोनों रिपोर्ट को संयुक्त किया जाकर जांचकर्ता अधिकारी रामलाल कोकोटे ने जांच रिपोर्ट दी है जिसमे शांतिधाम चोरी मामले में 7 अधिकारियों को दोषी पाया गया है. दोषियों में सेदहा से तत्कालीन सरपंच प्राणवती सिंह, तत्कालीन सचिव शशिकांत मिश्रा, तत्कालीन रोजगार सहायक दिलीप कुमार गुप्ता, तत्कालीन उपयंत्री अजय तिवारी, तत्कालीन सहायक यंत्री अनिल सिंह, तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी एवं तत्कालीन जनपद गंगेव मुख्य कार्यपालन अधिकारी सम्मिलित हैं. जाँच रिपोर्ट के अनुसार फर्जी तरीके से मूल्यांकित की गयी कुल राशि 11 लाख 41 हज़ार 642 रूपये को निष्पल व्यय और निर्माण कार्य में मनमानी मानते हुए प्रत्येक व्यक्ति से 01 लाख 63 हजार 91 रूपये की वसूली बनायी गयी है.

मुख्य कार्यपालन अधिकारी से लगातार वसूली के मामले व्यापक स्तर के भ्रष्टाचार की तरफ इशारा

गौरतलब है की भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी ऊपर तक फैली हैं इसका सबसे प्रमुख उदाहरण मुख्य कार्यपालन स्तर के अधिकारियों के नाम लगातार बनाई जा रही वसूली हैं. इसके पहले भी अभी हाल ही में जनपद गंगेव की चौरी पंचायत में हुए व्यापक स्तर के भ्रष्टाचार पर की गयी जाँच में भी जनपद गंगेव के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रमोद ओझा के ऊपर भी पौने 2 लाख रूपये के आसपास की वसूली बनायी गयी थी. बांस पंचायत में भी पिछले वर्षों ग्रामीण यात्रिकी सेवा के अधिकारियों और तत्कालीन कार्यपालन यंत्री दिनेश आर्मो द्वारा की गयी संयुक्त जांच में तत्कालीन जनपद सीईओ सहित सरपंच सचिव और इंजिनियर को दोषी पाया गया था और वसूली बनायी गयी थी.

पंचायतों में हो रहे भ्रष्टाचार पर हाई कोर्ट जजों ने भी समय समय पर की है टिप्पणियां

गौरतलब है की पंचायतों में बढ़ रहे व्यापक स्तर के भ्रष्टाचार को लेकर समय समय पर वरिष्ठ न्यायालयों में पदासीन न्यायधीशों ने टिप्पणियां की हैं. आये दिन पंचायतों में राशि गबन और बिना कार्य कराये ही प्रभक्षण के मामले सामने आते रहते हैं. स्वतंत्रता प्राप्ति के 75 वर्षों के बाद भी ग्रामों की दुर्दशा बनी हुई है. ग्रामों में मूलभूत सेवाएँ सड़क बिजली पानी आवास शौचालय और स्वास्थ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का व्यापक अभाव है. लेकिन सब कुछ जानते हुए भी चाहे वह जनप्रतिनिधि हों अथवा बड़े अधिकारी या की वह स्वयं इस प्रकार के भ्रष्ट आचरण में संलिप्त हैं अथवा आँख में पट्टी बाँध कर बैठे हुए हैं.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी द्वारा एफ़आईआर दर्ज किये जाने के निर्देश लेकिन कोई पालन नहीं

गौरतलब है की 31 दिसम्बर 2020 के एक आदेश में तत्कालीन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनोज श्रीवास्तव द्वारा निर्देश जारी करते हुए समस्त कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायततों को गबन और दुर्वियोजन पर वसूली के साथ एफआईआर दर्ज किये जाने के निर्देश दिए गए थे. लेकिन बिडम्बना यह है की ऐसे आदेशों और निर्देशों के बाबजूद भी जिला कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी कई मामलों में कोई एफआईआर दर्ज नहीं करवा पाए. जहाँ तक राशि वसूली की बात है तो कई वर्षों से वसूली लंबित पड़ी हुई हैं और आरआरसी भी जारी नहीं हुई हैं. तहसीलदारों द्वारा न तो वसूली करवाई गयी और न ही कुर्की की आगे की कार्यवाहियां हो पायी हैं.

कुछ बिंदुओं पर वसूली न बनाया जाना जांच दल पर भी सवाल

जांच बिंदु क्रमांक 2 :- जिरौही शान्तिधाम 2 चबूतरे मामले में जांच अधिकारी कार्यपालन यंत्री आरएल कोकोटे की वर्तमान माप 40 गुना 50 गुना 0.28 अर्थात 56 घन मीटर लिखा है। जबकि पूर्व मूल्यांकन 1198.63 घनमीटर का हुआ था। इस जांच से मतलब यह साबित होता है कि मिट्टी क्षरण में 21 गुना कमी पिछले 6 से 7 वर्ष में आई जो कि पूरी तरह से असंभव है। शासकीय नियमों के अनुरूप मिट्टी में कॉम्पक्शन अधिकतम 30 से 40 प्रतिशत होगा न कि 21 गुना कम। यदि 21 गुना मिट्टी क्षरण हुआ है मतलब 7 वर्ष में मात्र 5 प्रतिशत से भी कम मिट्टी शेष बच पाई है और शेष 95 प्रतिशत से अधिक मिट्टी का क्षरण हो चुका है जोकि मिट्टी डालने के 100 साल बाद भी नहीं हो सकता। फिर भी जांच अधिकारी कह रहे हैं 7 वर्ष बाद मूल्यांकन किया जाना संभव नही है। जानकारों और सिविल कंस्ट्रक्शन से जुड़े हुए इंजीनियरों का मानना है कि कई बिंदुओं पर बेहतर जांच रिपोर्ट बनाई जा सकती थी लेकिन कहीं न कहीं जांच अधिकारियों के द्वारा 4 जांचों के बाद भी रिपोर्ट बनाने में कोम्प्रोमाईज़ किया गया है। ऐसे में स्वाभाविक है कि जांच अधिकारियों की कर्तव्यनिष्ठा पर भी सवाल खड़े हो जाते हैं।

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MP breaking: विदेशी एनजीओ को गोशालाओं का संचालन, पंचायत अनजान // एफपीओ मनगवां और गंगेव को दे दिया गया दर्जनों गोशालाओं का काम

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एनजीओ को पता नही कहां है उनकी गोशालाएं // एफपीओ के अध्यक्ष हैं कलेक्टर और सचिव हैं सीईओ जिला पंचायत // जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर लगा प्रश्न चिन्ह//

27 सितंबर 2022 रीवा मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में सरकारी गौशालाओं के संचालन का कार्य पूर्ण प्रोड्यूजिंग ऑर्गनाइजेशन अर्थात एफपीओ को थोक में दे दिया गया है। गंगेव की फूड प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन के संचालक शिवचरण तिवारी के द्वारा बताया गया कि उन्हें लगभग 2 दर्जन से अधिक गौशालाओं का संचालन का कार्य इन एफपीओ के अध्यक्ष जिला कलेक्टर और इनके सचिव सीईओ जिला पंचायत रीवा द्वारा आवंटित किया गया है और उनके लिए संबंधित ग्राम पंचायतों में राशि भी भेजी जा चुकी है।

ग्राम पंचायतों के सरपंच सचिव को पता नहीं कौन है संचालक

दिनांक 27 सितंबर 2022 को मुख्यमंत्री के गोपूजन अभियान के तहत गंगेव जनपद की हिनौती गौशाला में पहुंचे ग्राम पंचायत के सरपंच भारत साकेत और अन्य नागरिक रामायण प्रसाद चतुर्वेदी, हीरामणि शुक्ला, चिंतामणि चतुर्वेदी, कामता प्रसाद चतुर्वेदी और राम शिरोमणि साकेत आदि के द्वारा बताया गया की पिछले सरपंच शिववती सिंह और सचिव हीरालाल साकेत ने अप्रैल के आसपास बिना ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित किए हुए गौशाला संचालन का कार्य किसी एफपीओ के अधीन कर दिया जिसके संचालन का जिम्मा किसी शिवचरण तिवारी को दिया गया है। चुनाव उपरांत जब बेसहारा पशुओं की समस्या उत्पन्न हुई और किसानों ने दबाव बनाया तो ग्राम पंचायत के नवनिर्वाचित सरपंच भारत साकेत और प्रभारी सचिव प्रकाश उपाध्याय सहित अन्य ग्रामीणों के द्वारा जुलाई से गौशाला संचालन का कार्य प्रारंभ करवा दिया गया।

गौशाला संचालन और प्रबंधन किया पंचायत ने और पैसे की मांग कर रहे एफपीओ

ग्राम पंचायत हिनौती के सरपंच भारत साकेत और प्रभारी सचिव प्रकाश उपाध्याय ने आरोप लगाया है की गौशाला संचालन का कार्य उनके द्वारा निर्धारित किए गए कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है जिसमें उनकी पूरी भूमिका है लेकिन जब पैसे की बात आई तो पता चला कि जिला कलेक्टर और जिला सीईओ के माध्यम से पशु चिकित्सा सेवाएं के डिप्टी डायरेक्टर की अनुशंसा पर गौशाला संचालन का कार्य एफपीओ एनजीओ को दे दिया गया और अब इन एफपीओ द्वारा लगभग पौने 2 लाख रुपये राशि की माग की जा रही है जो पंचायत के खाते में आया हुआ है।

गौशालाओं में काम कर रहे लेबर ने कहा हमें पता नहीं कौन है एफपीओ और कौन है एनजीओ

मामले का खुलासा तब हुआ जब 27 सितंबर को गौपूजन के लिए आए एफपीओ गंगेव के संचालक शिवचरण तिवारी के द्वारा कहा गया कि मेरे द्वारा लेबर लगाए गए हैं और गौशाला का संचालन मेरे द्वारा किया जा रहा है जिस पर उपस्थित गोशाला कर्मचारियों राम शिरोमण साकेत एवं अन्य के द्वारा बताया गया कि हम आपको नहीं जानते कि आप कौन हैं क्योंकि इसके पहले तो आप कभी आए नहीं और हम गौशाला में काम सिर्फ ग्राम पंचायत के सरपंच भारत साकेत और सचिव प्रकाश उपाध्याय एवं ग्रामीणजनों के कहने पर कर रहे हैं और हमारा पैसा भी अभी बाकी है जिसका पिछले 6 माह से कोई पेमेंट नहीं हुआ है।

बड़ा सवाल क्या ग्राम सभा और ग्राम पंचायत को अंधेरे में रखकर संचालित हो रही है गौशालाऐं

गौरतलब है कि एफपीओ की इंट्री से जहां कई दर्जन गौशालाओं को थोक में जिला कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ की अनुशंसा और पत्रों के द्वारा इन फूड प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन के जिम्मे कर दिया गया है उसे स्थानीय ग्राम पंचायतों में कार्य कर रहे महिला स्व सहायता समूह और ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव में आक्रोश है और उनका यह कहना है कि जब सरकार ने हर ग्राम पंचायत में महिला स्व सहायता समूह का निर्माण कराया है तो फिर यह किस लिए हैं? यही कार्य तो गांव के महिला स्व सहायता समूह कर सकते थे और दो पैसे की आमदनी भी पा सकते थे लेकिन किसी विदेशी फूड प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन नामक एनजीओ को इस प्रकार थोक में बिना ग्राम पंचायत की जानकारी और ग्राम सभा के विधिवत प्रस्ताव के बिना यदि संचालन का कार्य दे दिया गया है तो इससे लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है और जो रोजगार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध करवाया जा सकता था उसके लिए इस प्रकार दूरदराज बैठे हुए एनजीओ के संचालक हजम कर रहे हैं और मौके पर गौशालाओं का कोई कार्य भी नहीं कर रहे हैं।

इस मामले से एक नया प्रश्न खड़ा हो गया है कि आखिर सरकार और प्रशासन में बैठे हुए अधिकारियों की मंशा क्या है? क्या सिर्फ गौशालाऐं इसी प्रकार कागजों में संचालित होती रहेंगी? क्या गौशालाओं और गोवंशों की सुरक्षा संरक्षण के लिए आने वाली राशि इसी प्रकार एनजीओ और उनके संचालक हजम करते जाएंगे? सवाल यह भी है कि जब इन संचालकों को यह नहीं पता कि उनकी गौशालायें कहां है और उनमें कितने मवेशी हैं कौन उनकी व्यवस्था और देखरेख कर रहा है तो आखिर इनको किस आधार पर पैसे दिया जाए?

एफपीओ संचालक शिवचरण तिवारी ने सरपंच सचिव पर बनाया अनैतिक दबाव

गंगेव जनपद में एफपीओ के संचालक शिवचरण तिवारी के द्वारा जिस प्रकार से मात्र अपने पैसे प्राप्त करने के लिए विवाद करने का प्रयास किया गया और हर स्तर पर ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव के ऊपर प्रभाव डालने का प्रयास किया जा रहा था जो की वीडियो में भी रिकॉर्डिंग की गई है उससे साफ जाहिर है कि इन एनजीओ के संचालकों को सिर्फ पैसे की भूख है और इनको इस बात की फिक्र नहीं है कि गौशालाओं में गोवंशों की क्या दुर्दशा है? यदि देखा जाए तो हिनौती ग्राम पंचायत की गौशाला में ही 100 के स्थान पर 500 के आसपास गोवंश रखे गए हैं जिनकी कोई समुचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है और चार से पांच फीट गोबर भरा पड़ा हुआ है जिसमें मरने वाले गोवंश भी वही नजदीकी तालाब में फेंक दिए जा रहे हैं जिसकी वजह से महामारी भी फैलने का खतरा है। ऐसे में एफपीओ एनजीओ के द्वारा मात्र पैसे का क्लेम किया जाना जिला कलेक्टर रीवा और जिला पंचायत सीईओ जो कि क्रमशः इस एफपीओ के अध्यक्ष और सचिव हैं उनकी कार्यप्रणाली और मंशा पर भी प्रश्न खड़ा करता है।

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MP Breaking: गंगेव की बांस पंचायत के सरपंच सचिव से होगी 70 लाख की वसूली, दर्ज होगी एफआईआर

जाँच अधिकारियों को अभिलेख उपलब्ध न कराये जाने पर जारी हुई नोटिस।
सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी की शिकायत पर जाँच के बाद कार्यवाही पर सीईओ जिला पंचायत स्वप्निल वानखेड़े द्वारा जारी किया गया कारण बताओ सूचना पत्र।
07 दिवस के भीतर जबाब नहीं दिया तो होगी बड़ी कार्यवाही।

दिनांक 24 सितम्बर 2022 रीवा मप्र.

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मप्र में रीवा संभाग पंचायती भ्रष्टाचार का केन्द्र्बिदु बनता जा रहा है. रीवा जिले का बहुचर्चित गंगेव ब्लाक आये दिन किसी न किसी भ्रष्टाचार की जांच को लेकर सुर्ख़ियों में बना रहता है. अभी पिछले दिनों चौरी पंचायत का मामला शांत नहीं हुआ और बांस में भी एक बार फिर व्यापक भ्रष्टाचार सामने आ चुका है.

बांस सरपंच सचिव से होगी 70 लाख से अधिक की वसूली, दर्ज होगी एफआईआर

गंगेव की बांस पंचायत कराधान घोटाले में भी अग्रणी रही है. अभी कराधान का जिन्न बोतल में पहुचा नहीं की भ्रष्टाचार का उससे भी भयानक प्रेत बाहर आ चुका है. इस बार मामला कुल 09 बिन्दुओं की शिकायत की जाँच के बाद दिए गए प्रतिवेदन में सामने आया है. बताया गया है की सामाजिक कार्यकर्त्ता शिवानंद द्विवेदी की शिकायत पर 09 बिन्दुओं की जाँच सीईओ जिला पंचायत स्वप्निल वानखेड़े के द्वारा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अधिकारियों द्वारा करवाई गयी थी. आरईएस के तीन अधिकारियों की टीम ने जांच तो किया लेकिन भ्रष्टाचार को दबाने के लिए तत्कालीन सरपंच सचिव के द्वारा जाँच टीम को अभिलेख उपलब्ध नहीं करवाए गए जिससे भ्रष्टाचार का आकलन नहीं किया जा सका. इस बाबत जानकारी सीईओ जिला पंचायत को प्रेषित कर जाँच टीम ने धारा 40 और 92 के लिए अनुशंसा की है. इसके बाद सीईओ जिला पंचायत द्वारा पत्र क्रमांक 4915/धारा 40-92/जि0पं0/2022 रीवा दिनांक 20/09/2022 के माध्यम से जारी करते हुए 07 दिवस के भीतर अभिलेख जांच अधिकारियों को उपलब्ध कराये जाने के सख्त निर्देश दिए हैं. कारण बताओ सूचना पत्र यह भी उल्लेख किया गया है की यदि 07 दिवस के भीतर सरपंच सचिव द्वारा अभिलेख प्रस्तुत नहीं किये जाते तो यह माना जाएगा की कोई भी कार्य धरातल पर हुए ही नहीं और अभिलेख नष्ट कर दिए गए हैं. जिसके लिए पूरे 09 कार्यों के लिए कुल 70 लाख 37 हज़ार रूपये की वसूली बनायी जाएगी और गबन के लिए एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी.

सरपंच सचिव ने इन इन कार्यों का नहीं सौंपा अभिलेख

ग्राम पंचायत बांस के सरपंच सचिव द्वारा जिन जिन कार्यों का अभिलेख नहीं दिया गया है उनमे से कलवर्ट रपटा निर्माण पुसई वाले नाले के पास ग्राम भदौहा कुल लागत 06 लाख रूपये, ह्युम पाइप पुलिया निर्माण खुटहा से अमवा रोड 5 लाख 11 हजार रुपया, रपटा निर्माण हनुमान स्वामी मंदिर के पास 14 लाख 49 हज़ार रूपये, कलवर्ट रपटा निर्माण पुसई वाले बांध के नीचे भदौहा टोला लागत राशि 06 लाख रूपये, ह्यूम पाइप कलवर्ट निर्माण मर्गुना नाला के पास लागत राशि 14 लाख 49 हज़ार रूपये, बाउंड्री वाल निर्माण आमला बगीचे के लिए लागत राशि 10 लाख 65 हजार रूपये, बाउंड्री वाल निर्माण प्राथमिक शाला भदौहा ग्राम बांस कुल लागत राशि 04 लाख 97 हज़ार रूपये, बाउंड्री निर्माण शांतिधाम के चारों तरफ बांस कुल लागत राशि 5 लाख 85 हज़ार रूपये, नाली निर्माण कार्य हरिजन बस्ती बांस में कुल लागत राशि 2 लाख 81 हजार रूपये. इस प्रकार कुल 09 कार्यों में कुल लागत राशि 70 लाख 37 हज़ार रूपये खर्च होना बताई गयी है. लेकिन सरपंच सचिव द्वारा कार्य की जाँच के लिए प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, मापपुस्तिका और पूर्णता प्रमाण नहीं प्रस्तुत किये जाने से भ्रष्टाचार का आकलन नहीं किया जा सका है. इसलिए जांच रिपोर्ट में जाँच अधिकारियों ने सभी कार्यों में अनियमिता और भ्रष्टाचार के लिए पूर्णतया सरपंच सचिव को दोषी ठहराया है और कहा है की जाँच के साक्ष्य छुपाने के लिए ही जाँच दल को इन सभी 09 कार्यों के अभिलेख नहीं दिए गए हैं जिसके लिए सीईओ जिला पंचायत रीवा स्वप्निल वानखेड़े द्वारा दोषी पाए जाने पर समस्त 70 लाख 37 हज़ार रूपये की वसूली के लिए कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है.

कराधान योजना के रपटा निर्माण में भ्रष्टाचार, 14 लाख 49 हज़ार का कार्य चढा भ्रष्टाचार की भेंट

बांस ग्राम पंचायत में 14 वें वित्त आयोग का कराधान योजना का कार्य रपटा निर्माण हनुमान स्वामी मंदिर के पास पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है. गौरतलब है की पूर्व में गठित जांच दल जिसने कराधान योजना के तहत कराये गए कार्यों का फर्जी तरीके से मूल्यांकन कर पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करते हुए क्लीन चिट दिया है उसे ही कार्यपालन यंत्री आर एस धुर्वे के जांच दल ने दोषी पाया है. बताया गया की इसके पहले इसी की जांच तत्कालीन कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा दिनेश आर्मो द्वरा भी की गयी थी जिसमे मूल्यांकनकर्ता टीम को दोषी पाया गया था. रपटा मौके पर 21 मीटर ही पाया गया था जबकि मूल्यांकन पूरे 30 मीटर का किया गया था. इसी प्रकार रपटा मापदंड के अनुसार न बनाया जाकर ह्युम पाइप के नीचे मात्र एक फीट का बेस कंक्रीट दिया गया था जबकि तकनीकी स्वीकृति में बेस 1 मीटर और 70 सेंटीमीटर का रखा गया था. इसी प्रकार ऊपर की सरफेस में 30 सेंटीमीटर के टॉप को 1 अनुपात 2 अनुपात 4 में मसाला के स्थान पर घटिया मिटटी डस्ट से बनाए जाने के कारण टॉप सरफेस पूरी तरह से टूट कर धंस गयी है. इस प्रकार यह 14 लाख 49 हज़ार रूपये का पूरा कार्य ही अमान्य करार करते हुए वसूली के लिए प्रस्तावित हुआ है. गौरतलब है की सीईओ जिला पंचायत स्वप्निल वानखेड़े द्वारा इन्ही सब कार्यों का सहायक यंत्री और उपयंत्री द्वारा कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी होना बताकर हाई कोर्ट और लोकायुक्त को जबाब भी भेजा जा चुका है. अब सवाल यह है यह तो वे कार्य हैं जिनकी जाँच हुई हैं और अभी पता नहीं ऐसे कितने कार्य होंगे जिनकी जांच पेंडिंग पड़ी है और यदि पूरी हुई तो कराधान योजना में हुए भ्रष्टाचार पर क्लीन चिट देने के प्रयास पर वरिष्ठ अधिकारी भी जाँच के घेरे में आ जायेंगे.

आमले के बगीचे के लिए 11 लाख रूपये की बाउंड्रीवाल, जाँच अधिकारी भी रह गए सन्न

बाउंड्री वाल का निर्माण अमूमन भवनों के लिए होता है. जैसे की यदि स्कूल, सामुदायिक भवन अथवा पंचायत भवन है तो उसके लिए बाउंड्री वाल का निर्माण किया जाता है लेकिन क्या आपने सुना है की कभी बगीचे और खेतों के लिए बाउंड्री वाल का निर्माण हुआ है? बांस पंचायत में भ्रष्टाचार की हद तो तब हो गयी जब 14 वें वित्त आयोग की परफॉरमेंस ग्रांट की राशि का दुरूपयोग करते हुए आमले के बगीचे के लिए बाउंड्री वाल बनवा दी गयी. 14 वें वित्त आयोग के दिशानिर्देश भी देखे गए तो कहीं भी ग्रांट के उपयोग के लिए बगीचे अथवा खेत के लिए बाउंड्री वाल निर्माण का जिक्र नहीं है. जांच अधिकारी भी यह देख कर सन्न रह गए की आखिर पंचायत में बहुत से ऐसे कार्य होते हैं जहाँ इस प्रकार की ग्रांट का उपयोग किया जा सकता है. और बांस हाई स्कूल ही है जहाँ पर अब तक बाउंड्री वाल नहीं बनाई गयी है जहाँ इस राशि का प्रयोग किया जा सकता था. बांस में प्राथमिक और माध्यमिक शाला भी है जहाँ बाउंड्री वाल बनाया जा सकता था लेकिन बांस से हटकर भदौहा टोला में तत्कालीन सरपंच गीता पटेल द्वारा अपने ठीक घर के सामने स्थित आमले के बगीचे में अपने निजी उपयोग के उद्देश्य से बाउंड्री वाल बनवाकर राशि का पूरी तरह से दुरूपयोग किया गया है. इस बात का जिक्र हालाँकि जांच अधिकारियों धुर्वे और प्रजापति की टीम ने भी किया और वहीँ पूर्व के आर्मो और आर डी पाण्डेय की टीम ने भी किया.

अब बड़ा सवाल यह है क्या पंचायत के विकास के लिए आने वाले फण्ड का ऐसा दुरूपयोग करने वाले पंचायत सरपंच सचिव को कब जेल की सलाखों के पीछे पहुचाया जाएगा.

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MP breaking: चौरी ग्राम पंचायत में लगभग 24 लाख रूपये की होगी वसूली, सीईओ जनपद गंगेव, सहायक यंत्री, उपयंत्री, सहायक लेखाधिकारी, और तत्कालीन सरपंच सचिव से होगी वसूली

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व्यापक भ्रष्टाचार के मामले में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी की शिकायत पर हुई बड़ी कार्यवाही।

सीईओ जिला पंचायत रीवा स्वप्निल वानखेड़े ने जारी किया कारण बताओ सूचना पत्र।

दिनांक 21 सितम्बर 2022 रीवा मप्र

चौरी ग्राम पंचायत जनपद पंचायत गंगेव में व्यापक भ्रष्टाचार के मामले में सीईओ जिला पंचायत स्वप्निल वानखेड़े द्वारा गठित जाँच दल कार्यपालन यंत्री आर एस धुर्वे ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग रीवा की अगुआई में हुई जाँच के बाद जांच रिपोर्ट सामने आने से बड़े घोटाले का पर्दाफास हुआ है. अमूमन ग्राम पंचायत के विकास के लिए आने वाली राशि का कैसे सरपंच सचिव और अधिकारी मिलकर बन्दरवाट कर रहे हैं इसका एक ताजा उदाहरण रीवा गंगेव की चौरी पंचायत का सामने आया है.

तत्कालीन सीईओ जनपद, सहायक यंत्री, उपयंत्री सहित लेखाधिकारी और सरपंच सचिव से होगी वसूली

सीईओ जिला पंचायत रीवा द्वारा गठित आरईएस के जाँच दल द्वारा जांच रिपोर्ट सामने आने से बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं. जाँच रिपोर्ट में सरपंच सचिव और इंजिनियर के अलावा सीईओ जनपद और सहायक लेखाधिकारी को भी दोषी पाया गया है. सीईओ जिला पंचायत रीवा ने कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांक 4880/धारा 40-92/जि0पं0/2022 दिनांक 16-09-2022 की नोटिस जारी करते हुए तत्कालीन जनपद पंचायत गंगेव, सहायक यंत्री गगेव, उपयंत्री गंगेव, सहायक लेखाधिकारी गंगेव सहित तत्कालीन सरपंच सविता जायसवाल और सचिव बुद्धसेन कोल के नाम पर 12 कार्यों में अनियमितता के लिए दोषी पाए जाने पर कुल 23 लाख 99 हज़ार 448 रूपये की वसूली बनाई गयी है. लगभग 24 लाख की इस कुल वसूली में तत्कालीन सीईओ जनपद गंगेव के नाम 01 लाख 49 हज़ार 207 रूपये, तत्कालीन सहायक यंत्री गंगेव के नाम 01 लाख 98 हज़ार 436 रूपये की वसूली, तत्कालीन उपयंत्री के नाम 01 लाख 98 हज़ार 436 रूपये की वसूली, तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी के नाम 01 लाख 49 हज़ार 207 रूपये की वसूली जबकि तत्कालीन सरपंच सविता जायसवाल और सचिव के नाम पर बराबर-बराबर 8 लाख 52 हज़ार 131 रूपये की वसूली बनाई गयी है.

सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह ने भी पत्र लिखकर भ्रष्टाचार दबाने का किया था प्रयास

गौरतलब है की चौरी ग्राम पंचायत की जांच को विधायक सिरमौर भी प्रभावित करने का प्रयास कर चुके हैं. मौखिक और अन्य दबाब तो सामान्य बात हैं परन्तु यहाँ तो हद हो गयी जब सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह ने चौरी और सेदहा पंचायत के भ्रष्ट सरपंच सचिवों को बचाने के लिए अपने लैटर हेड में पत्र लिखकर सीईओ जिला पंचायत और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्री पर दबाब बनाने का प्रयास किया था जिसके बाद जांच टीम को बदल दिया गया था. लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा पुनः सीईओ जिला पंचायत और कमिश्नर संभाग रीवा के समक्ष शिकायत प्रस्तुत किया जाकर जांच करवाई गयी जिसके बाद जो सामने आया उससे विधायक की भी करतूत अब सामने आ चुकी है. चूँकि जाँच में लगभग 24 लाख रूपये के उन कार्यों का भ्रष्टाचार सामने आया है जो मौके पर अब तक मिले ही नहीं हैं जबकि दर्जनों कार्य अभी भी ऐसे हैं जिनके जाँच के दस्तावेज ही उपलब्ध नहीं कराये गए जिसके चलते उन कार्यों का उचित मूल्यांकन और जाँच ही नहीं हो पायी है.

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MP Breaking: कैथा के पूर्व भ्रष्टाचारी सचिव अच्छेलाल पटेल को सेदहा की कमान देने की तैयारी // कराधान करारोपण जैसे घोटाले में महती भूमिका निभाने वाले गंगेव जनपद के सीईओ प्रमोद ओझा का कारनामा // प्रस्ताव बनाकर जिला पंचायत सीईओ को भेजा

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सेदहा ग्राम पंचायत के सरपंच सहित ग्रामीणों ने भ्रष्टाचारी सचिव को सेदहा भेजने पर किया विरोध

दिनांक 17 सितंबर 2022 रीवा मध्य प्रदेश। अपने पूर्व के कार्यकाल में पंचायती भ्रष्टाचार में अब्बल दर्जे पर रहे और गंगेव जनपद की कैथा पंचायत के पूर्व निलंबित सचिव अच्छेलाल पटेल को अब सेदहा पंचायत की जिम्मेदारी देने का सिलसिला चल रहा है। कराधान और करारोपण 14वें वित्त आयोग के भ्रष्टाचार के मास्टरमाइंड रहे गंगेव जनपद में जनक रहे वर्तमान गंगेव जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रमोद ओझा के द्वारा जिला पंचायत सीईओ स्वप्निल वानखेडे को तत्सम्बन्ध में प्रस्ताव प्रेषित किया गया है। लेकिन ग्राम पंचायत सेदहा के सरपंच पूनम सिंह और अन्य गणमान्य ग्रामीण भूतपूर्व सरपंच राजमणि सिंह, जयप्रकाश त्रिपाठी, दिलराज सिंह एवं अधिवक्ता अरुण सिंह आदि ने भ्रष्टाचारी सचिव के सेदहा पंचायत में आने का विरोध किया है।

409 और 420 जैसे गंभीर धाराओं में दर्ज हैं भ्रष्टाचारी सचिव अच्छेलाल के ऊपर प्रकरण

गौरतलब है कि वर्ष 2015 से लेकर 2021 तक पूरे 7 वर्ष के कार्यकाल मे पिछली पंचायती क्रियाकलापों के दौरान ग्राम पंचायत कैथा जनपद पंचायत गंगेव के बर्खास्त सरपंच संत कुमार पटेल और तत्कालीन निलंबित सचिव अच्छेलाल पटेल के ऊपर लगभग 18 लाख रुपये की रिकवरी और साथ में भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420 और 34 के तहत एफआईआर संबंधित गढ़ थाने में दर्ज है जिसका मुकदमा अभी भी चल रहा है। मामले में हाईकोर्ट जबलपुर से रिलीफ लेने का प्रयास किया गया लेकिन सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया गया की रिकवरी के कुछ पैसे जमा करने के बाद इन्हें जमानत मिली थी जबकि अभी तक मामला प्रक्रिया में है और फैसला नहीं हुआ है ऐसे में निलंबित सचिव को बहाल किया जाना और किसी ग्राम पंचायत का प्रभार दिया जाना मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत गंगेव के भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले चरित्र को उजागर करता है।

ओझा के कार्यकाल में करारोपण की पात्रता और पंचायतों में कर लगाने की प्रक्रिया में कूट रचित दस्तावेज तैयार कर हासिल की गई थी पात्रता

बता दें कि इसके पहले भी कराधान करारोपण और 14वें वित्त आयोग की परफॉर्मेंस ग्रांट में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार के दौरान तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत गंगेव के पद पर प्रमोद ओझा आसीन थे। उसी समय इनके कार्यकाल में व्यापक स्तर का भ्रष्टाचार हुआ। बताया गया कि जब करारोपण का कार्य किया जा रहा था उस समय फर्जी तरीके से कूट रचित दस्तावेज तैयार कर ग्राम पंचायतों के द्वारा करारोपण होना बताया गया जिसके आधार पर 14वें वित्त आयोग की परफॉर्मेंस ग्रांट की राशि सीधे जनपद पंचायत गंगेव की 38 ग्राम पंचायतों के एकल खाते में अंतरित की गई थी।

पीएम आवास घोटाले को लेकर प्रिंसिपल सेक्रेट्री उमाकांत उमराव ने सीईओ प्रमोद ओझा को किया था निलंबित

इसके पूर्व गंगेव जनपद की कई ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास को लेकर व्यापक स्तर का घोटाला सामने आया था। जिसके आधार पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी उमाकांत उमराव के द्वारा कठोर कदम उठाते हुए वर्तमान गंगेव जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रमोद ओझा को दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया था। इसके बाद अपने राजनीतिक रसूख का प्रयोग करते हुए प्रमोद ओझा वापस गंगेव जनपद में पदस्थ हुए लेकिन जबसे इनकी पदस्थापना हुई है पहले की भांति यह निरंतर संपूर्ण गंगेव जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। अभी भी कई ग्राम पंचायतों में पीएम आवास घोटाले की जांच चल रही है लेकिन इनके द्वारा फाइल को दबाने का ही कार्य किया जा रहा है। हाल ही में चौरी ग्राम पंचायत में फर्जी एफटीओ जारी कर इनके द्वारा नाला सफाई के नाम पर भ्रष्टाचार करवाया गया।

जनपद पंचायत गंगेव में भ्रष्टाचार की नित नई इबारत लिख रहे प्रमोद ओझा

पिछले कुछ दशक से रीवा जिले की गंगेव जनपद में भ्रष्टाचार के मामले दिन दूनी रात चौगुनी तरीके से बढ़ रहे हैं उसका कारण मात्र गंगेव जनपद में वर्तमान में पदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रमोद ओझा है। आए दिन इनके विषय में चाहे वह पीएम आवास हो अथवा अन्य भ्रष्टाचार सभी में अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं। इनके कमीशन का खेल इस कदर चल रहा है जिससे लोग बेहद परेशान हैं। सीईओ प्रमोद ओझा के विषय में दर्जनों शिकायतें लंबित हैं जिन पर जांचें चल रही हैं। लेकिन भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले सीईओ ओझा अंगद की तरह एक ही जगह पर गंगेव जनपद में पांव जमाए बैठे हुए हैं। और इसके लिए कोई सबसे अधिक जिम्मेदार है तो यहां के स्थानीय नेता विधायक जो कमीशन के चक्कर में भ्रष्टाचारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी को गंगेव जनपद में बैठा कर रखे हुए हैं।

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MP Breaking: चोरी हुए सेदहा मुक्तिधाम की फिर हुई तकनीकी जांच, जंगल की अवैध खखरी पत्थर से बने शान्तिधाम की हुई जांच

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भ्रष्टाचार का केंद्रबिंदु रही बहुचर्चित सेदहा पंचायत का है मामला

कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा आर एल कोकोटे ने की जांच

गंगेव सहायक यंत्री श्रीकांत द्विवेदी और उपयंत्री कुजूर भी रहे सम्मिलित।

दिनांक 31 अगस्त 2022 रीवा मध्य प्रदेश

रीवा मध्य प्रदेश के चोरी हुए अजीबोगरीब सेदहा ग्राम पंचायत के मुक्तिधाम की तकनीकी जांच एक बार पुनः ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम के द्वारा किया गया। मामला था गंगेव जनपद की सेदहा ग्राम पंचायत में 14.95 लाख रुपए में बनाए गए सेदहा शांतिधाम का। गौरतलब है कि यह वही मामला है जिसमें सेदहा ग्राम पंचायत के आराजी नंबर 3 में बनाए गए शांतिधाम को हिनौती पंचायत के गदही ग्राम की आराजी नंबर 47 और 74 में होना पाया गया था इसके बाद मामला मीडिया में छाया रहा था।

ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्री आर एल कोकोटे की टीम ने की तकनीकी जांच

बता दें मामले की तकनीकी जांच एक बार पुनः ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग रीवा के कार्यपालन यंत्री आर एल कोकोटे, गंगेव जनपद के सहायक यंत्री श्रीकांत द्विवेदी एवं उपयंत्री डोमिनिक कुजूर के द्वारा की गई। जांच के दौरान तीन बिंदुओं की जांच को जमीन का कॉम्पेक्शन और सरफेस से लेवल देखने के लिए कुदाल से खुदाई की गई। बघविल शांतिधाम और जिरौही में बने 2 अन्य शांति धाम की लगभग एक दर्जन जगह पर तकनीकी विशेषज्ञों की उपस्थिति में दो से ढाई फीट तक गहरी खुदाई की गई जिसमें मिट्टी का स्तर और कॉम्पक्शन देखा गया। देखने पर पाया गया कि जिस बघविल शांतिधाम की सरफेस बनाने के लिए ही मात्र लगभग 9 लाख रुपये मिट्टीकरण होना बताया गया है वहां कोई मिट्टीकरण हुआ ही नहीं है और मात्र लेवलर अथवा ट्रैक्टर दौड़ा कर सरफेस को समतल कर दिया गया है।

मुक्तिधाम की सतह को खोदकर हर स्तर पर की गई जांच

गौरतलब है कि यह जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तकनीकी तौर पर कार्यपालन यंत्री एसडीओ और उपयंत्री की उपस्थिति में मजदूर लगाकर कुदाल से कई जगह शांतिधामों और खेल मैदान की खोद खोद कर जांच की गई। जांच के दौरान व्यापक अनियमितता प्रकाश में आई है जिसमें कई लाख रुपए की रिकवरी बनने का अनुमान है।

सेदहा के स्थान पर हिनौती ग्राम पंचायत में बना दिया शांतिधाम

जहां तक मामला सेदहा ग्राम पंचायत के आराजी नंबर 3 पर बनाए गए बघविल शांतिधाम का है वह शांतिधाम सेदहा ग्राम पंचायत की आराजी नंबर 3 पर न बना होकर हिनौती ग्राम पंचायत के गदही ग्राम की आराजी नंबर 47 और 74 में बना हुआ पाया गया था। गौरतलब है कि यह जांच भी कमिश्नर रीवा संभाग के द्वारा एसडीएम सिरमोर से कराई गई थी जिसमें प्रतिवेदन संभागीय आयुक्त को भेजा जा चुका है। जाहिर है जिस स्थान के लिए तकनीकी स्वीकृति होती है कार्य उसी स्थान पर किया जाता है और जिस प्रकार सेदहा ग्राम पंचायत का शांतिधाम हिनौती ग्राम पंचायत में बिना किसी शासकीय अनुमति के बना दिया गया यह पूरी तरह से रिकवरी की श्रेणी में आता है।

बिना लेवल के ही जारी कर दी तकनीकी स्वीकृति मूल्यांकन, इंजीनियर पर बनती है कार्यवाही

गौरतलब है कि सेदहा ग्राम पंचायत के उक्त तीन बिंदुओं की जांच जिसमें शांतिधाम और खेल का मैदान सम्मिलित हैं इनमें तकनीकी स्वीकृति दिए जाने के दौरान आसपास की जमीन से किए जाने वाले कार्य का लेवल नहीं दर्शाया गया था जिसमें मन मुताबिक मूल्यांकन कर कार्य की पूरी राशि हजम कर ली गई थी। अब सवाल यह है कि जो मनरेगा और पंचायती कार्य की तकनीकी स्वीकृति दी जाती है उसमें कार्य का जमीनी लेवल अवश्य देखा जाता है। विशेषतौर पर यदि मनरेगा का कार्य किया जाना है तो उस मिट्टी का लेवल आसपास की मिट्टी के लेवल से आवश्यक तौर पर देखा जाता है और इसी आधार पर उस कार्य की लागत का प्रारंभिक आकलन किया जाकर टीएस जारी होते हैं। अब यदि शांतिधाम के ही कार्य को ले लिया जाए तो शांतिधाम के पश्चिम उत्तर और दक्षिण सिरे में जमीन का लेवल लगभग इतना ही था जितना शांतिधाम के अंदर। जबकि पूर्वी सिरे में लगभग शांतिधाम के बराबर लेबल था पर चट्टानी एरिया आने के कारण थोड़ा सा मामूली अंतर दिखा। जबकि इस शांतिधाम का 14 लाख 95 हजार रुपए का जो तकनीकी स्वीकृति संबंधित इंजीनियर के द्वारा पूर्व में जारी की गई है उसमें और मूल्यांकन में भी किसी भी प्रकार के लेवल का जिक्र नहीं है।

मनरेगा के कार्यों में सरफेस लेवल को ही लेकर होता है सबसे अधिक भ्रष्टाचार

अक्सर तकनीकी स्वीकृति और मूल्यांकन में सरफेस लेवल का जिक्र न करने से मनरेगा के कार्यों में मनमुताबिक राशि हजम कर ली जाती है और लोगों को पता तक नहीं चलता। विशेष तौर पर मनरेगा के मिट्टी मोरम और पंचायती कार्यों में अक्सर भ्रष्टाचार करने का यह काफी महत्वपूर्ण बिंदु होता है जिस पर शिकायतकर्ता भी ध्यान नहीं देते। जबकि यदि मनरेगा से संबंधित शिकायतें की जानी है तो कार्य के पूर्व का सरफेस लेवल और कार्य के बाद के लेवल का अंतर स्पष्ट तौर पर बताया जाना चाहिए।

इन इन ग्रामवासियों की उपस्थिति में हुई जांच

सेदहा ग्राम पंचायत की जिन तीन बिंदुओं की जांच जिसमें बघविल शांतिधाम, जिरौही प्लाट शांतिधाम और जिरोही प्लाट खेल का मैदान सम्मिलित हैं गणमान्य नागरिकों भूतपूर्व सरपंच राजमणि सिंह, मनोज सिंह, अरुण सिंह, गेंदराज सिंह, संजय सिंह, बृजेंद्र सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी, केशव अहिर, शिवेंद्र सिंह एवं मेवालाल चौबे, नंदलाल कोल आदि की उपस्थिति में हुई।

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MP Breaking: अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों ने मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री सहित विधायक सांसद मुर्दाबाद के लगाए नारे, मामला रीवा जिले के त्योंथर बिजली डिवीजन के कटरा विद्युत वितरण केंद्र के कैथा साकेत बस्ती के जले ट्रांसफार्मर का

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राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन का ट्रांसफार्मर पिछले 1 वर्ष से जला हुआ है जिसे बदलने को लेकर ग्रामीणों ने आवाज उठाई है।

रीवा। रीवा जिले के त्योंथर बिजली डिवीज़न में जले ट्रांसफार्मर को न बदलने पर ग्रामीणों ने भारतीय जनता पार्टी की शिवराज सिंह चौहान एवं नरेंद्र मोदी की सरकार सहित विधायक और सांसद सहित बिजली विभाग के एक बार फिर मुर्दाबाद के नारे लगाए हैं। आजकल संपूर्ण रीवा संभाग सहित पूरे मध्यप्रदेश में बिजली विभाग की मनमानी और राज्य सरकार के मूक दर्शक बने रहने और किसानों और ग्रामीणों के जले हुए ट्रांसफार्मर न बदलने के कारण पूरे प्रदेश में आंदोलन जैसी स्थिति है और जमकर इनकी नीतियों के विरुद्ध मुर्दाबाद के नारे लगाए जा रहे है। प्रदर्शन के दौरान कटरा विद्युत वितरण केंद्र के कैथा हरिजन बस्ती के बतसिया साकेत, सुखलाल साकेत, संतलाल साकेत, लालजी साकेत, गोपाल साकेत और प्रेम शंकर पटेल सहित महिलाओं और छोटे बच्चों ने मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री विधायक सांसद सहित बिजली विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है और जमकर मुर्दाबाद के नारे लगाए हैं।

देखें वीडियो में 1 वर्षों से जले हुए ट्रांसफार्मर को लेकर चल रहे प्रोटेस्ट के दौरान ग्रामीणों ने क्या कहा।

यह मामला रीवा जिले के कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत ग्राम कैथा की पुरानी हरिजन बस्ती का है जहां राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन के तहत लगाए गए 25 केवी के ट्रांसफार्मर के एक वर्ष पूर्व जलने के कारण हरिजन लोगों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा

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MP breaking: किलविस के राज्य में अंधेरा कायम है, अंग्रेजों जैसे शासन में गुलाम जैसी स्थिति

यदि घर मे महीनों से अंधेरा रहे तो कैसे मनाएं आजादी का पर्व।
बिजली विभाग की हिटलरसाही से रीवा की जनता त्रस्त, जले ट्रांसफार्मर महीनों से नही बदल रहा विभाग।
अब सोरहवा मिसिरा के बाद क्योटा के ग्रामीणों ने लगाए मुर्दाबाद के नारे।
5000 रुपये रिश्वत लेकर भी नही बदला गया ट्रांसफार्मर।

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 दिनांक 13 अगस्त 2022 रीवा मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के रीवा संभाग में बिजली विभाग की तानाशाही हावी है ऐसे में आम ग्रामीणजन और किसान बिजली की समस्याओं से जूझ रहे हैं। कुल 24 घंटे में मात्र 6 से लेकर 8 घंटे तक बड़ी ही मुश्किल से बिजली दिया जाना और वह भी मात्र 1 फेस में बिजली उपलब्ध कराए जाने से किसानों में आक्रोश है। साथ ही रीवा संभाग में हजारों की संख्या में ट्रांसफार्मर जले हुए हैं जिसकी वजह से सूखे और अकाल जैसी स्थिति में किसानों को जहां सिंचाई के लिए दिक्कत हो रही है वही महीनों से घरों में अंधेरा पसरा हुआ है। इस बात को लेकर पूरे रीवा संभाग में जगह-जगह किसान और ग्रामीणजन मध्य प्रदेश सरकार की नीतियों के विरुद्ध खुलकर सामने आ रहे हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं। जगह-जगह गांव-गांव बिजली विभाग के आला अधिकारियों और मध्य प्रदेश सरकार के विरुद्ध मुर्दाबाद के नारे लगाए जा रहे हैं।

सोरहवा और मिसिरा के बाद अब क्योटा के लोगों ने सरकार और बिजली विभाग के मुर्दाबाद के लगाए नारे

अभी पिछले दिनों सोरहवा और मिसिरा ग्राम के ट्रांसफार्मर न बदले जाने के कारण ग्रामीणों में काफी आक्रोश दिखा था और बिजली विभाग एवं मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन के नाम से मुर्दाबाद के नारे लगाए थे और तत्काल ट्रांसफार्मर बदले जाने की मांग की थी। साथ में ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाए हैं कि बिजली विभाग के आला अधिकारियों की सह से गांव के किसानों और गरीब जनता से चंदा इकट्ठा कर रिश्वत के पैसे की माग की जा रही है जिस पर भी ग्रामीणों ने कार्यवाही की मांग की थी। दिनांक 13 जुलाई 2022 को इसी तारतम्य में लोटनी पंचायत के ग्राम क्योटा में भी भूतपूर्व सरपंच इंद्रभान पटेल एवं राधेश्याम शुक्ला की अगुवाई में दर्जनों ग्रामीणों ने जले हुए ट्रांसफार्मर के समक्ष उपस्थित होकर सरकार और बिजली विभाग की नीतियों के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की और मुर्दाबाद के नारे लगाए। ग्रामीणों ने बिजली विभाग के अधिकारियों पर चंदे से रिश्वत लेकर ट्रांसफार्मर बदले जाने के भी आरोप लगाए हैं। ऐसे में अब यह देखना होगा जिस प्रकार मध्य प्रदेश सरकार और बिजली विभाग की नीतियों के खिलाफ ग्रामीणों में आक्रोश फूट रहा है आगे आने वाले समय में ऊर्जा विभाग किस प्रकार मामले को हैंडल करता है और कितना जल्दी ग्रामीण क्षेत्रों के जले हुए ट्रांसफार्मर बदलता है।

ज्ञातव्य है कि मध्य प्रदेश सरकार की ऊर्जा विभाग को लेकर कोई ठोस नीतिया न होने के कारण यह समस्याएं बढ़ी हुई है। एक तरफ तो मध्य प्रदेश सरकार अटल बिजली के नाम पर 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने के खोंखले दावे करती है वहीं संभाग में सूखे अकाल की स्थिति में किसानों को 6 घंटे भी बिजली उपलब्ध न करवाते हुए अपने ही मजाक का पात्र बनती है। अब बड़ा सवाल यह भी है कि यदि मध्य प्रदेश सरकार और ऊर्जा विभाग के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कोई ठोस नीति सामने नहीं आती है ऐसे में आने वाले समय में सरकार और ऊर्जा विभाग के खिलाफ प्रदर्शन बढ़ते जाएंगे और निश्चित तौर पर इसका खामियाजा सरकार को आने वाले आगामी चुनाव में भुगतना पड़ेगा।

रीवा जिले में बनाया जाए ट्रांसफॉर्मर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट

एक आम समस्या जो देखी जा रही है वह जले हुए ट्रांसफार्मर को जल्द से जल्द बदलने की है। अब यदि इस दिशा में बात की जाए तो रीवा जिले का जब भी कोई ट्रांसफार्मर जलता है तो उसके लिए अधिकारी गाड़ी भेजकर सतना से ट्रांसफार्मर मंगवाते हैं। कई बार तो ऐसा होता है कि सतना में 100 केवी अथवा 63 केवी के ट्रांसफार्मर उपलब्ध ही नहीं रहते इसकी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर बदलने के लिए हफ्तों लग जाते हैं। ऐसी स्थिति में मध्य प्रदेश सरकार और ऊर्जा विभाग को दूरगामी सोच दिखाते हुए रीवा जिले में ही ट्रांसफॉर्मर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगानी पड़ेगी जिससे यदि जिले में ट्रांसफार्मर जलने तो उन्हें तत्काल सप्लाई किया जा सके।

संलग्न – कृपया इस संदेश के साथ संलग्न क्योटा ग्राम और कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत उपस्थित दर्जनों ग्रामीणों के प्रदर्शन की तस्वीरें देखने का कष्ट करें।

स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश

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MP breaking: जला ट्रांसफार्मर बदलने के लिए पैसे की मांग पर ग्रामीणों में फूटा आक्रोश,सोरहवा के बाद अब मिसिरा ग्राम में भी बिजली विभाग और मध्यप्रदेश शासन मुर्दाबाद के लगे नारे

जले ट्रांसफार्मर बदलने के एवज में एक बार पुनः चंदा से पैसे इकट्ठा करने का मामला आया प्रकाश में।

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रीवा मध्य प्रदेश दिनांक 12 अगस्त 2022। मध्यप्रदेश के रीवा संभाग में ग्रामीण क्षेत्रों में आए दिन जले हुए ट्रांसफार्मर बदलने की एवज में ग्रामीणों से चंदे के माध्यम से पैसे इकट्ठा कर रिश्वत की वारदात सामने आ रही है। अभी रीवा जिले के त्योंथर बिजली डिवीजन एवं कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत सोरहवा ग्राम का मामला ठंडा नहीं हुआ है ऐसे में एक बार पुनः नजदीकी पंडुआ ग्राम पंचायत के मिसिरा ग्राम में 63 केवी के जले हुए ट्रांसफार्मर को बदलने के लिए ग्रामीणों से चंदा इकट्ठा कर बिजली विभाग को पैसे पहुंचाए जाने का मामला प्रकाश में आया है। जिस पर ग्रामीणों ने आक्रोश जाहिर किया है और बिजली विभाग सहित मध्य प्रदेश शासन के मुर्दाबाद के नारे लगाए हैं।

डीई जेई एसई सीई मप्र शासन मुर्दाबाद के लगे नारे

दिनांक 12 अगस्त 2022 को थाना गढ़ क्षेत्र अंतर्गत कटारा विद्युत वितरण केंद्र के ग्राम मिसिरा में आक्रोशित ग्रामीणों ने ट्रांसफार्मर बदलने के एवज में पैसे की मांग को लेकर डीई एसई सीई और मध्य प्रदेश शासन के मुर्दाबाद के नारे लगाए हैं। ग्रामीणों के द्वारा बताया गया कि बिजली विभाग के अधिकारी ग्रामवासियों को टॉर्चर कर रहे हैं और जबकि कई लोगों ने पहले से बिजली का बिल भर रखा है उनके मानवाधिकार का हनन करते हुए इस भीषण अंधेरी रात और बारिश के मौसम में ट्रांसफार्मर न बदल कर उनसे पैसे की माग की जा रही है। बताया गया कि चंदा के माध्यम से पैसे इकट्ठा कर बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाए जाने का मामला प्रकाश में आया है।

कई मर्तबा शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्यवाही तब आक्रोशित ग्रामीणों ने लगाए मुर्दाबाद के नारे

ग्रामीणों के द्वारा बताया गया कि इसके पहले भी उनके द्वारा 1912 से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक कई बार शिकायतें की गई लेकिन 3 वर्ष पूर्व ग्राम मिसिरा का एक फेस जला हुआ ट्रांसफार्मर सुधार नहीं किया गया जिसकी वजह से लोड बढ़ने से पिछले 3 माह पूर्व शेष 2 फेज लाइन भी जल गई जिसकी वजह से पूरे गांव में अंधेरा छाया रहता है। बच्चों को पढ़ाई में तकलीफ होती है महिलाओं बुजुर्गों को भी दिक्कत हो रही है और पूरे गांव को अंधेरे में रखा गया है। इसके लिए ग्रामीणों में काफी आक्रोश देखा गया और उन्होंने ऐसे बिजली अधिकारियों डिविजनल इंजीनियर सुशील यादव अधीक्षण यंत्री सहित चीफ इंजीनियर के ऊपर भी कार्यवाही करने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि पूरे रीवा संभाग का बिजली विभाग निरंकुश हो गया है और नाजियों की तरह उनके ग्रामों को कंसंट्रेशन कैंप और गैस चेंबर में बदलने जैसा माहौल बना दिया है जिसमें ग्रामीण बिजली पानी के अभाव और अंधेरे में घुट घुट कर मर जाएं। उन्होंने बताया कि इन अधिकारियों ने रीवा को वसूली का अड्डा भी बना लिया है।

इन इन ग्रामीणों ने बिजली विभाग के मुर्दाबाद के लगाए नारे

ग्राम मिसिरा के आक्रोशित ग्रामीणों शिवनाथ सिंह, गेंदलाल आदिवासी, बिंदा प्रसाद रजक, नीतू देवी कोल, प्रहलाद कोल, चैता साकेत, हिन्छराज सिंह, सोनू आदिवासी, मोती सिंह, राहुल सिंह, रानी देवी कोल, मीनू कोल, राकेश सिंह, बुटान साकेत, राजराखन साकेत आदि ने बिजली विभाग के अधिकारियों समेत मध्य प्रदेश शासन के मुर्दाबाद के नारे लगाए हैं।
इनका कहना था कि यदि जल्द से जल्द जला ट्रांसफार्मर नहीं बदला जाता तो बहुत जल्द वह एक बड़ा आंदोलन करेंगे।

आगे वीडियो वाइट में देखिए कि ग्रामीणों ने क्या कहा।

संलग्न– कृपया संलग्न ग्राम वासियों की सामूहिक तस्वीरें देखने का कष्ट करें।

स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा

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MP Breaking: जेई डीई रिश्वत मामले में कटरा डीसी के किसानों ने दवाब देकर शिकायत वापस लेने का लगाया आरोप

 

कहा रिश्वत मांगने के मामले में ऊपर से अधिकारी दवाब लगाकर ट्रांसफॉर्मर न बदलने की दे रहे धमकी।

दिनाँक 08 अगस्त 2022।  रीवा  जिले के त्योंथर बिजली डिवीज़न में कटरा डीसी के कई ग्रामों में जले हुए ट्रांसफॉर्मर बदलने के एवज में बिजली अधिकारियों द्वारा चंदा कर रिश्वत देने के मामले में एक नया मोड़ आ गया है।

बताया गया है कि पिछले दिनों लालगांव और कटरा के प्रभारी जेई संजय गुप्ता द्वारा अपने बचाव में वीडियो जारी कर 19 ग्रामीणों पर कुल 48 हज़ार रूपये का बिजली बिल बकाया बताया गया था। जबकि ग्रामीण उपभोक्ताओं का कहना है कि यह बहुत पुराना बिल है और बिजली अधिकारी रिश्वत मामले को दबाने और दबाब बनाने के उद्देश्य से ऐसी अफवाह फैलाई जा रही है।

उपस्थित ग्रामीण अभिनेष पटेल अरुणेंद्र पटेल हिन्छलाल पटेल और कुसुमकली पटेल और मणिराज पटेल आदि ने बताया कि यदि दूसरे प्रकरणों को देखा जाय तो उसके मुकाबले उनका बकाया बहुत कम और लगभग 20 से 25 हज़ार के लगभग है जबकि उसमे अभी ट्रांसफॉर्मर जलने वाले महीने का भी आधा से अधिक बिल सम्मिलित है जिसे वह देने के लिए इसलिए बाध्य नही हैं क्योंकि ग्रामीणों ने बिजली का 2 माह से कोई उपयोग ही नही किया। उन्होंने तो यहां तक कहा कि वह बकाया बिल भी देने के लिए तैयार हैं लेकिन सबसे पहले उनका ट्रांसफॉर्मर लगाया जाए और साथ मे दोषी डिविजनल इंजीनियर सुशील यादव, अस्सिटेंट इंजीनियर जवा गणेश अकोदिया और जूनियर इंजीनियर संजय गुप्ता पर कार्यवाही की जाए।

अब यदि देखा जाय तो ट्रांसफॉर्मर जलने के बाद उसे बदलने में आनाकानी करने और रिश्वत की माग का यह अकेला मामला नही है। सम्पूर्ण रीवा जिले में लगभग एक हज़ार के लगभग ट्रांसफॉर्मर फैल हैं और उन क्षेत्रों में बिजली पूरी तरह से बाधित है। लेकिन बिजली विभाग हर जगह मनमानी करने में उतारू है और ग्रामीणों और किसानों को गलत बिजली बिल के नाम पर टार्चर कर रहा है। ऐसे में सोरहवा और बड़ोखर ग्राम के ग्रामीणों ने तो बिजली अधिकारियों के नाम से मुर्दाबाद के नारे भी लगाए हैं और दोषियों पर कार्यवाही करते हुए तत्काल निलंबित किये जाने की माग की है।

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MP Breaking: सेदहा पंचायत के विकास को डकार गए दलाल, जांच में मिला व्यापक भ्रष्टाचार,सीईओ जिला पंचायत स्वप्निल वानखेड़े के आदेश पर हुई जांच

कार्यपालन यंत्री आर एस धुर्वे और तीन एसडीओ की टीम ने किया जांच// 50 लाख से अधिक की रिकवरी का अनुमान।।

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दिनांक 3 अगस्त 2022 रीवा मध्य प्रदेश

दलाली प्रथा में पंचायतों के कितने बुरे हाल हैं इसका अंदाजा दिनांक 2 अगस्त 2022 को रीवा जिले के गंगेव जनपद की सेदहा पंचायत में हुई जांच में पाई गई व्यापक अनियमितता और भ्रष्टाचार से लगाया जा सकता है

गौरतलब है की रीवा जिला पंचायत सीईओ स्वप्निल वानखेडे के निर्देश पर 3 सदस्य टीम कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 1 आर एस धुर्वे एसडीओ सिरमौर जितेंद्र अहिरवार एसडीओ त्योंथर एसआर प्रजापति गंगेव के सहायक यंत्री श्रीकांत द्विवेदी एवं उपयंत्री डोमिनिक कुजुर के द्वारा मंगलवार को 32 बिंदुओं की जांच की गई। शिकायती पत्र समाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा दिया गया था।

कलवर्ट रपटा निर्माण में मिला व्यापक भ्रष्टाचार, किसी के व्यक्तिगत खेत पर बना दिया कलवर्ट रपटा

आदिवासी बस्ती से वन मार्ग को जोड़ने वाली कल्वर्ट रपटा निर्माण जिसकी लागत 14 लाख 49 हज़ार बताई गई है उसमें जांच के दौरान बेस और नींव मटेरियल नहीं मिला साथ में ऊपर की सरफेस भी डस्ट सफेद गिफ्ट से गुणवत्ताविहीन बनाई गई थी। खोदकर देखा गया तो पाया गया जिन मापदंडों में तकनीकी स्वीकृत हुई थी उस पर बिल्कुल कार्य नहीं हुआ है और पुल में कई जगह से दर्रे भी दिखे। इसी प्रकार किसी अशोक सिंह के खेत पर बस्तियों से दूर वीरान जंगल पहाड़ में एक अन्य रपटा निर्माण मिला जहां आदमी तो पहुंचे नही बल्कि जंगली जानवरों और भूतों का डेरा रहता है। इसमें भी सही तरीके से न बनने के कारण पानी के बहाव में रपटा टूटा हुआ पाया गया जबकि सरफेस भी बुरी तरह से टूटी हुई मिली।

बिना बेस और नींव के सूखी डस्ट से बनाई मिली पीसीसी सड़कें

इसी प्रकार जांच के दौरान सेदहा पंचायत के जिरौही टोला में आदिवासी बस्ती के पास थोक में 5 पीसीसी सड़क निर्माण मिले जिसमें पाया गया कि जिन तकनीकी मापदंडों के अनुसार कार्य होना था वह न होकर यत्र तत्र अन्यत्र मन मुताबिक काम कर दिया गया है। साथ मे पहाड़ी एरिया में बनने के कारण वहां बेस भी नहीं था जबकि तकनीकी स्वीकृति में बेस बनाने का पैसा भी निकाला गया। जहां पीसीसी सड़क की बेस के अतिरिक्त दो ऊपर की लेयर में 1 अनुपात 3 अनुपात 6 कंक्रीट मसाला डाला रहता है वहां जांच के दौरान मात्र सूखी गिट्टी और डस्ट मिली जबकि ऊपरी सतह जहां 1 अनुपात 2 अनुपात 4 का मिक्सर मसाला डाला रहता है वहां घटिया तरीके का मटेरियल मिला जो थोड़ा सा ठोकर मारते ही टूट गया।

यह सब कार्यपालन यंत्री और उपस्थित तीन एसडीओ के समक्ष हुआ जिनके वीडियो भी बनाये गए हैं।

स्कूल परिसर की पीसीसी सड़क को भी भ्रष्टाचारियों ने नहीं छोड़ा

जांच के दौरान जब शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हिनौती स्कूल परिसर में 14वें वित्त आयोग की परफारमेंस ग्रांट से बनाई गई 2 पीसीसी सड़क की जांच करने अधिकारी पहुंचे तो देखा कि मुख्य मार्ग से लेकर स्कूल के अंदर तक पहुंचने वाली सड़क बीच से 2 टुकड़ों में टूटी हुई है। इस बात को देखकर एक जांच अधिकारी एस आर प्रजापति ने तो यहां तक कहा कि इसकी बस फोटो ले लो इसमें जांच की क्या जरूरत है। यह तो टोटल रिकवरी की श्रेणी में आती है। ऐसे ही तकनीकी जांच के दौरान इन पीसीसी सड़क में न तो नींव देखी और न ही ऊपरी सतह दिखी जो की पूरी तरह से गुणवत्ताविहीन डस्ट और सफेद गिट्टी डालकर बनाई गई।

पौधारोपण के नाम पर घोटाला: सैकड़ों के स्थान पर मात्र मिले 10 या 20 पौधे

ग्राम पंचायत सेदहा में पंचायती कार्य में पौधारोपण का कार्य भी सम्मिलित था। लेकिन जब पौधारोपण के कार्य की जांच हो रही थी तो पाया गया कि मात्र उंगली में गिनने के लिए 10 या 20 पौधे मिले जबकि जांच अधिकारियों को भ्रमित करते हुए गांववालों के द्वारा लगाए गए नीम के पौधे भी पंचायती कार्य को दिखाने के प्रयास किए गए। जिसका ग्रामीण लोगों ने विरोध किया।

स्कूल मरम्मत, शौचालय निर्माण की राशि भी हजम कर गए भ्रष्टाचारी

मामला यहीं तक शांत नहीं हुआ। पंचायती कार्यों की जांच में स्कूल भवन मरम्मत और कन्या शाला के शौचालय निर्माण की भी राशि का जारी होना और निकाला जाना बताया गया था जिसकी जांच के दौरान पाया गया कि कन्या शाला का शौचालय कहीं बना ही नहीं है और जो थोड़ा बहुत बना था उसमें घास फूस और पेड़ों उगे हुए थे जबकी मरम्मत के नाम पर पूरी राशि डकार ली गई और स्कूल की छत से पानी टपक रहा है।

रोजगार सहायक ने अपने घर के परिसर में बनवा लिया चबूतरा, होगी पूरी रिकवरी

32 बिंदुओं की जांच में परफॉर्मेंस ग्रांट 14वें वित्त आयोग की राशि से बनाए गए चबूतरे भी सम्मिलित थे। जांच के दौरान पाया गया की चबूतरों की ऊपरी सतह पूरी तरह से बेकार थी जो बाइक की चाबी से ही खोदने पर उखड़ रही थी। इस विषय पर ग्रामीणों ने कुछ वीडियो भी बनाए। जबकि कार्यपालन यंत्री आर एस धुर्वे का कहना था कि यह सब ठीक है और कॉम्पेक्शन की कमी के कारण टूट रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि पूरा काम गुणवत्ताविहीन हुआ और भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध कार्यवाही की माग की गई।

एक मजेदार मामला तब सामने आया जब ग्राम पंचायत सेदहा के रोजगार सहायक दिलीप गुप्ता ने अपने पिता रामसजीवन गुप्ता के नाम पर पंचायत का चबूतरा अपने घर के सामने ही बनवा लिया और उसे चारों तरफ से ढककर अब वह प्लेन सरफेस हो चुकी है जो चबूतरा है ही नहीं।

इस विषय पर कार्यपालन यंत्री आर एस धुर्वे का कहना था कि निजी और व्यक्तिगत लाभ के लिए बनाया गया है और इसमें पूरी रिकवरी और कार्यवाही होगी।

पूरे 15 साल पंचायत के दलाल सीएम सिंह की दलाली पर चली सेदहा पंचायत

इस प्रकार सेदहा पंचायत की जांच के दौरान व्यापक स्तर पर अनियमितता और भ्रष्टाचार दिखा जो न केवल रिकॉर्ड में था बल्कि भौतिक धरातल पर भी देखा गया। जांच दर्जनों ग्रामीणों की उपस्थिति में हुई जिसके कई वीडियो और फोटो उपलब्ध हैं। जांच में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि किस प्रकार से जनता के विकास कार्य के लिए जनता के टैक्स के पैसे से आने वाली राशि का सहायक यंत्री, उपयंत्री, सीईओ जनपद और पंचायत के सरपंच सचिव रोजगार सहायक मिलकर चूना लगा रहे हैं। ग्रामीणों के द्वारा बताया गया कि पिछले 15 वर्ष से अधिक समय से ग्राम पंचायत सेदहा में चिंतामणि सिंह उर्फ सीएम सिंह नामक एक दलाल ग्राम पंचायत के सभी कार्यों पर अधिपत्य जमाए हुए था जो सेदहा ग्राम पंचायत के सरपंचों को अपने कब्जे में रखता था और पंचायती विकास कार्य के लिए आने वाली राशि पंचायत के विकास में न लगाकर अपनी निजी हित के लिए उपयोग करता था। ग्रामीणजनों द्वारा बताया गया कि उसके पास आय से अधिक संपत्ति भी है और रीवा में कई फ्लैट बोलेरो फोर व्हीलर गाड़ी और चल अचल संपत्ति भी इसी दलाली और पंचायती भ्रष्टाचार से अर्जित किया हुआ है। लोगों ने कहा की इन दलालों की समस्त चल अचल संपत्ति की जांच ईओडब्ल्यू से होनी चाहिए और पंचायत की दलाली प्रथा बंद होनी चाहिए । पंचायत पंचायती राज व्यवस्था का नाम है जहां स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से प्रत्येक ग्रामीणजन की आवाज सुनी जा कर जनता के टैक्स के पैसे से विकास के लिए आने वाली राशि का सदुपयोग किया जाए और सार्वजनिक कार्य में लगाया जाए। किसी भी प्रकार से दलाली प्रथा को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस विषय पर सेदहा ग्राम पंचायत के गणमान्य नागरिक राजमणि सिंह परिहार, दिलराज सिंह, राजबली सिंह, संजय सिंह, रितेश सिंह, अरुण सिंह, मनोज सिंह, जयप्रकाश त्रिपाठी, नंदलाल कोल आदि ने संपूर्ण रिकवरी और दोषियों के विरुद्ध एफ आई आर दर्ज करवाए जाने की मांग की है।

ग्रामीणों ने कहा है कि यदि जांच रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी की जाती है तो इसको विरुद्ध उग्र आंदोलन करेंगे और सीईओ जिला पंचायत और कलेक्टर के समक्ष धरना करेंगे।

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MP Breaking: सीईओ गंगेव प्रमोद ओझा ने फर्जी एफटीओ जारी कर किया भ्रष्टाचार, गंगेव की चौरी ग्राम पंचायत में मनरेगा नाला सफाई का है मामला

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जांच में दोषी होने के बाद भी नही जारी हुई नोटिस।

मात्र सरपंच सचिव और रोजगार सहायक को ही बनाया आरोपी।

दिनांक 19 जुलाई 2022 रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले अंतर्गत गंगेव जनपद की ग्राम पंचायत चौरी में मनरेगा योजना के तहत नाला खुदाई और सफाई के कार्य में भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है।
ज्ञातव्य है इसके पहले ग्रामीणों ने मामले की शिकायत सीईओ जिला पंचायत रीवा स्वप्निल वानखेडे से की थी लेकिन त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के चलते जांच में देरी होने से मामला तूल पकड़ा और मीडिया में छाया रहा इसके बाद सीईओ जिला पंचायत के द्वारा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा रीवा एवं सिरमौर के सहायक यंत्री एवं एसडीओ जितेंद्र अहिरवार और गंगेव के पीसीओ भारत पटेल को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए मामले की जांच के आदेश दिए थे।
जितेंद्र अहिरवार द्वारा मामले की जांच 6 जुलाई 2022 को मौके पर जाकर की गई और अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी गई जिसके आधार पर कूल रिकवरी राशि 236875 रुपये निकालते हुए सीईओ जिला पंचायत रीवा श्री स्वप्निल वानखेड़े के द्वारा पत्र क्रमांक 3415 धारा 40-92 नोटिस दिनांक 14 जुलाई 2022 को ग्राम पंचायत की प्रधान रही सविता जयसवाल, रोजगार सहायक आरती त्रिपाठी और वर्तमान चौरी सचिव बुद्धसेन कोल के नाम पर जारी की गई है।

बिना एफटीओ जारी किए नहीं होती मनरेगा के पैसे की निकासी

मनरेगा अधिनियम 2005-06 से यह भी स्पष्ट है कि किसी भी प्रकार के पंचायती निर्माण कार्य में जब तक कार्य का मूल्यांकन सत्यापन होकर एफटीओ जारी नहीं होता कब तक पैसे की निकासी नहीं होती है। तब सवाल पैदा होता है कि फिर गंगेव जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रमोद कुमार ओझा के द्वारा बिना कार्य का मूल्यांकन और सत्यापन किए हुए कैसे एफटीओ जारी कर दिया गया? जाहिर है इस मामले में ग्राम पंचायत के प्रधान, सचिव और रोजगार सहायक जितने दोषी हैं उससे कहीं अधिक दोषी जनपद पंचायत गंगेव के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रमोद ओझा हैं जिनके संरक्षण में न केवल चौरी ग्राम पंचायत में बल्कि जनपद की समस्त ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है।

मनरेगा में जितना काम उतना दाम, फिर बिना काम हुए कैसे जारी हुआ एफटीओ

मनरेगा के नियमानुसार जितना काम उतना दाम का भुगतान होता है। कार्य होने के बाद मूल्यांकन/सत्यापन होता है। इसके बाद मूल्यांकन के आधार पर समानुपातिक रूप से श्रमिकों को मजदूरी भुगतान हेतु एफटीओ होता है। एफटीओ का फर्स्ट सिग्नट्री मनरेगा का सहायक लेखाधिकारी होता है जबकि सेकंड सिग्नट्री सीईओ जनपद होता है। अगर बिना मूल्यांकन/सत्यापन के एफटीओ जारी हो गया तो फर्स्ट एवं सेकंड दोनो सिग्नट्री दोषी होते हैं।

प्रधानमंत्री आवास और कराधान घोटाले में ओझा का हो चुका है निलंबन

ज्ञातव्य है इसके पूर्व गंगेव जनपद के वर्तमान सीईओ प्रमोद ओझा प्रधानमंत्री आवास में गड़बड़ी के चलते पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव के द्वारा निलंबित किए जा चुके हैं लेकिन अपनी राजनीतिक पकड़ और जोर जुगत लगाकर वापस भ्रष्टाचार करने के लिए उसी स्थान पर गंगेव में पदस्थ किए गए हैं। गंगेव में पुनः पदस्थापना के बाद प्रमोद ओझा भ्रष्टाचार में दिन दुगनी रात चौगुनी वृद्धि कर रहे हैं। अब तो ऐसा लगता है जैसे सीईओ प्रमोद ओझा को किसी भी प्रकार का भय ही नहीं है। हालांकि चौरी ग्राम पंचायत में मनरेगा की राशि की निकासी मौके पर बिना काम किए हुए और बिना मूल्यांकन सत्यापन के जारी किया जाना अपने आप में ही सवाल खड़े करता है और स्वयं सीईओ जिला पंचायत रीवा स्वप्निल वानखेड़े के द्वारा धारा 40-92 की कारण बताओ नोटिस पर भी सवाल खड़ा करता है। जिसमें उन्होंने मात्र सरपंच सचिव और रोजगार सहायक के नाम ही नोटिस जारी की है जबकि मामले में सीधे आरोपी गंगेव जनपद के वर्तमान सीईओ प्रमोद ओझा भी हैं जिन्होंने बिना कार्य का मूल्यांकन और सत्यापन देखे हुए ही अपने आईडी से एफटीओ जारी कर दिया।

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