Uncategorizedछत्तीसगढ़प्रमुख खबरें

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य के लगभग 8,500 नगर सैनिकों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है

 

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य के लगभग 8,500 नगर सैनिकों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने ‘समान काम-समान वेतन’ के सिद्धांत के आधार पर नगर सैनिकों को पुलिस कर्मियों के समकक्ष वेतन और अन्य सुविधाएं प्रदान करने का आदेश राज्य सरकार को दिया है।

इसके साथ ही, शासन द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज करते हुए इस आदेश का पालन तीन महीने के भीतर सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

समान काम के लिए समान वेतनमान की मांग की थी

साल 2022 में बिलासपुर जिले में कार्यरत होमगार्ड ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर समान काम के लिए समान वेतनमान की मांग की थी। उच्च न्यायालय ने याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को समान वेतनमान देने का निर्देश दिया था।

इस आदेश का पालन न करने पर नगर सैनिक डोमनलाल चंद्राकर और सुरेंद्र कुमार देशमुख ने छत्तीसगढ़ सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने तय समयावधि में आदेश का पालन करने के निर्देश दिए थे।

छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की

इसके बाद राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए रिट अपील दायर की, जिसे उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। अंततः, छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए हाई कोर्ट के आदेश के तहत नगर सैनिकों को पुलिस कर्मियों के सामने वेतनमान व अन्य सुविधाएं देने के निर्देश दिए।

32 हजार तक है नगर सैनिक का मानदेय

नगर सैनिकों को दैनिक मजदूरी के आधार पर भुगतान किया जाता है, जो वर्तमान में लगभग 774 रुपये प्रतिदिन (लगभग 23,000 रुपये प्रतिमाह) और भत्तों को मिलाकर 33,200 तक पहुंच जाता है। उन्हें दैनिक मानदेय में महंगाई भत्ता जोड़कर दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद महंगाई भत्ते में भी इजाफा होगा।

Related Articles

Back to top button