छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 के तहत नागरिकों को जल देना निगम का प्राथमिक कर्तव्य, व्यापार करना नहीं:- मनोज सिंह ठाकुर

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रायपुर नगर निगम द्वारा नल कनेक्शन और पेनाल्टी के नाम पर जनता से ₹20,000 से अधिक की अवैध वसूली के खिलाफ वरिष्ठ कांग्रेस नेता व अधिवक्ता ने खोला मोर्चा; जरूरत पड़ी तो करेंगे उग्र जन-आंदोलन
रायपुर। छत्तीसगढ़ सहकारिता मंडल के पूर्व सदस्य, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने रायपुर नगर निगम द्वारा नल कनेक्शन के नियमितीकरण के नाम पर शुल्कों में की गई बेतहाशा वृद्धि की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने इसे आम जनता की जेब पर डाका डालने जैसा और पूरी तरह से तानाशाही पूर्ण निर्णय बताया है।
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने विधिक प्रावधानों का स्पष्ट हवाला देते हुए कहा कि “छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की वैधानिक धाराओं के तहत शहर के नागरिकों को स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना नगर निगम का प्राथमिक संवैधानिक कर्तव्य (Primary Duty) है, न कि इसके जरिए व्यापार करना।” उन्होंने आगे कहा कि बुनियादी नागरिक सुविधा की आड़ में जनता से ₹20,000 से अधिक की एकमुश्त राशि वसूलना पूरी तरह से अमानवीय और कानून की मूल भावना के विपरीत है।
प्रेस विज्ञप्ति के मुख्य बिंदु:
अवैध वसूली का विरोध: पहले जो नल कनेक्शन शुल्क और पेनाल्टी आम जनता की पहुंच में थी, उसे रातों-रात बढ़ाकर आवासीय के लिए ₹20,882 और व्यावसायिक के लिए ₹30,882 कर दिया गया है। महंगाई के इस दौर में मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों के लिए इतनी बड़ी राशि मात्र 90 दिनों के भीतर दे पाना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
अल्टीमेटम और तीन गुना पेनाल्टी अनुचित: 90 दिनों की समय-सीमा के बाद तीन गुना पेनाल्टी लगाने या कनेक्शन काटने की धमकी देना सीधे तौर पर नागरिकों को प्रताड़ित करने जैसा है। नगर निगम अपनी प्रशासनिक विफलताओं और वित्तीय कुप्रबंधन का ठीकरा शहर की निर्दोष जनता पर फोड़ रहा है।
सुविधाएं शून्य, टैक्स आसमान पर: रायपुर के कई वार्डों में आज भी दूषित जलापूर्ति और लो-प्रेशर की गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं। बुनियादी ढांचे को सुधारे बिना, केवल राजस्व बढ़ाने के लिए मीटर प्रणाली थोपना और भारी-भरकम शुल्क वसूलना नीतिगत रूप से पूरी तरह गलत है।
कड़ी चेतावनी:
वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज सिंह ठाकुर ने नगर निगम प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि इस जनविरोधी और बढ़े हुए शुल्क के फैसले को तत्काल वापस लिया जाए और दरों को व्यावहारिक व तर्कसंगत बनाया जाए। यदि समय रहते इस तुगलकी आदेश को वापस नहीं लिया गया, तो वे आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए वार्ड स्तर पर नागरिकों को लामबंद कर नगर निगम के खिलाफ उग्र जन-आंदोलन छेड़ेंगे और आवश्यकता पड़ने पर इसके खिलाफ कानूनी कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।




