पुरूंगा जनसुनवाई 15-22 जनवरी के बीच, ग्रामीण खुलकर कर रहे अंबुजा सिमेंट की कोल ब्लॉक का विरोध

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धरमजयगढ़। विकास खण्ड के पुरूंगा कोल मांइस अंबुजा सिमेंट कंपनी को आबंटन हुआ है, अंबुजा कंपनी का पुरूंगा कोल मांइस का पर्यावरण जन सुनवाई 11 नवंबर 2025 को होना था, प्रभावित ग्रामीणों के विरोध के कारण प्रशासन जन सुनवाई करवा नहीं पाया और जन सुनवाई के एक दिन पहले अगामी तिथि तक के लिए स्थागित कर दिया गया। कोल ब्लॉक से प्रभावित ग्रामीणा किसी भी हाल में कोयला खदान खुलने नहीं देना चहते हैं, ग्रामीणों का कहना है कि पर्यावरण जन सुनवाई स्थागित नहीं निरस्त करना पड़ेगा शासन-प्रशासन को, हमरा क्षेत्र 5वीं अनुसूचित क्षेत्र में आता है इसलिए पेसा कनून लगू है, पेसा कानून के तहत हम ग्रामीण जब तक नहीं चाहेंगे तब तक कोई कंपनी हमारे क्षेत्र में किसी प्रकार का कोई काम नहीं कर सकता, हम लोगों द्वारा ग्राम सभा में प्रस्ताव पास किया गया है कि पुरूंगा में कोयला खदान नहीं खुलना है तो नहीं खुलेगा। अगर कंपनी वाले जबरदस्ती पर्यावरण जन सुनवाई करना चाहते हैं तो जरा सोच ले इसका अंजाम क्या होगा? ग्रामीणों की लाख विरोध के बाद भी कंपनी पर्यावरण जन सुनवाई करवाने में उतावले हैं।
चर्चा का विषय बना हुआ है कि पुरूंगा कोल मांइस की पर्यावरण जन सुनवाई 15 से 22 जनवरी के बीच हो सकता है, और इसके लिए कंपनी वाले गुपचुप तरीके से ग्रामीणों को अपने पक्ष में करने लगे हुए हैं। लेकिन कंपनी वालों की एक भी चाल नहीं चलने देंगे ग्रामीण, ग्रामीणों का कहना है कि अडानी लाख कोशिश कर ले हम पुरूंगा कोल मांइस खुलने नहीं देंगे।
कोई भी कंपनी अपना पैर पसारने के लिए कई प्रकार के बड़े-बड़े सुहाने सपने दिखाते हैं, कि हम क्षेत्र में विकास करेंगे, क्षेत्र के बेरोजगार युवकों को रोजगार देंगे। हमारे द्वारा सर्व सुविधा युक्त अस्पताल, स्कूल खोले जायेंगे, साथ हम कैंसर जैसे अस्पताल भी क्षेत्र में बनवायेंगे जिससे क्षेत्र के लोगों का ईलाज किया जायेगा। अब आप जरा सोचिए कि अभी हमारे क्षेत्र में कितने कैंसर मरीज है? सुनने को भी नहीं मिलता है कि कैंसर मरीज हमारे क्षेत्र में हैं, अगर है भी एक-दो, अभी अगर कोई कैंसर अस्पताल खोले तो वह डूब जायेगा। हां कंपनी वालों को मालूम है कि हमारे कोयला खदान आने के बाद क्षेत्र में इतना अधिक प्रदुषण होगा कि आने वाले दिनों में हर घर में कैंसर मरीज मिलेगा, इसलिए कैंसर अस्पताल खोलने की बात करते हैं।
2011 में बालको कंपनी भी धरमजयगढ़ में कोयला खदान खोलने के लिए पर्यावरण जनसुनवाई करवाया था उस समय भी कैंसर अस्पताल खोलने की बात हुआ था ये कंपनी कैंसर अस्पताल ही खोलने की बात क्यों करते हैं ये आप समझ सकते हैं, अगर क्षेत्र में आ रहे कोयला खदान को नहीं रोका गया तो हम सब इनके कैंसर अस्पताल में ही मिलेंगे?



