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राज्य के मेडिकल पीजी सीटों में कोटा घटाकर 25% करना छात्रों के प्रति अन्याय-आदित्य मिश्रा,प्रदेश अध्यक्ष, ASAP

 

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रायपुर। आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन ASAP के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य मिश्रा ने कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार का नारा था – “बदल के रहिबो छत्तीसगढ़”; आज स्थिति यह है कि इस नारे का अर्थ ही बदलकर पूरे छत्तीसगढ़ को ही बदलने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, वह भी अपने ही प्रदेश के मेडिकल विद्यार्थियों के हितों के विरुद्ध। छत्तीसगढ़ के एमबीबीएस व पीजी छात्रों के अधिकारों पर सीधा प्रहार करते हुए राज्य के मेडिकल पीजी सीटों में राज्य कोटा घटाकर मात्र 25% तक सीमित करने और अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए रास्ता चौड़ा करने की जो नीति अपनाई गई है, वह बेहद चिंताजनक और छात्र–विरोधी है।छत्तीसगढ़ में मेडिकल पीजी की राज्य कोटे की सीटों को घटाकर केवल 25% तक सीमित करने और अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए हिस्सेदारी बढ़ाने का फैसला मौजूदा भाजपा सरकार की छात्र–विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि सरकार के इस गजट नोटिफिकेशन पर गंभीर सवाल उठाता हूँ और मांग करता हूँ कि इसे तुरंत वापस लिया जाए। यह निर्णय छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस कर चुके हजारों विद्यार्थियों के साथ सीधा अन्याय है, जिन्होंने उम्मीद की थी कि उन्हें अपने ही राज्य में पीजी में उचित प्राथमिकता मिलेगी, न कि उनकी सीटें बाहर के अभ्यर्थियों को सौंप दी जाएँ।यही नहीं, प्रदेश के एमबीबीएस व पीजी छात्रों से दो वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप/सेवा करवाई जाती है, जिसका तर्क यह दिया जाता है कि वे प्रदेश की जनता की सेवा करें और सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर हो। लेकिन जब सरकार स्वयं राज्य के छात्रों की पीजी सीटें घटाकर बाहरी अभ्यर्थियों के लिए रास्ता खोल रही है, तब इस दो वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप और बॉन्ड नीति का नैतिक औचित्य ही संदिग्ध हो जाता है। यदि प्रदेश के ही छात्रों को पीजी सीटों में प्राथमिकता नहीं मिलेगी, तो फिर वही छात्र क्यों दो वर्ष तक बंधुआ की तरह सेवा करें?और तो और, जो छात्र किसी कारणवश यह अनिवार्य सेवा/इंटर्नशिप पूरी नहीं कर पाते, उनसे लाखों रुपये वसूले जाते हैं, जो कि अत्यंत निंदनीय, अमानवीय और आर्थिक रूप से शोषणकारी व्यवस्था है। मध्यमवर्गीय व ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र इस भारी भरकम पेनल्टी के बोझ तले दब जाते हैं, जबकि सरकार उनकी समस्याओं की ओर आंख मूंदे रहती है। यह नीति स्पष्ट रूप से छात्र–विरोधी है और प्रतिभाशाली युवाओं को या तो दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने या फिर मेडिकल क्षेत्र से ही हतोत्साहित करने का काम कर रही है।

ASAP की ओर से मांग की जाती है कि मेडिकल पीजी में छत्तीसगढ़ के छात्रों के लिए राज्य कोटा की हिस्सेदारी को कम करके 25% करने का निर्णय तुरंत रद्द किया जाए और स्थानीय एमबीबीएस पास छात्रों को उचित व न्यायसंगत प्राथमिकता दी जाए।दो वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप/सेवा नीति की समीक्षा कर छात्रों के हित में संतुलित व व्यावहारिक नीति लाई जाए।इंटर्नशिप या बॉन्ड सेवा पूरी न कर पाने पर लगाए जाने वाले अत्यधिक जुर्मानों को तत्काल घटाया जाए या समाप्त किया जाए, ताकि छात्रों पर आर्थिक उत्पीड़न बंद हो।यदि सरकार इस गजट नोटिफिकेशन और अपनी छात्र–विरोधी नीतियों को वापस नहीं लेती, तो ASAP प्रदेश संगठन व्यापक छात्र–आंदोलन, जन–जागरण अभियान और लोकतांत्रिक विरोध के लिए बाध्य होगा। छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उनकी लड़ाई सड़क से मंच और न्यायालय तक पूरे दमखम के साथ लड़ी जाएगी

 

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