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रायपुर का टिकरापारा बांग्लादेशियों का ठिकाना:15 घुसपैठिए मिले, छह गायब; कई ने पासपोर्ट और वीजा भी बनवा लिए

 

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रायपुर ।   का टिकरापारा इलाका अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों का पनाहगाह बन गया है। रायपुर में पिछले डेढ़ साल में इस इलाके से 15 घुसपैठिए पकड़े गए हैं। सभी टिकरापारा थाना क्षेत्र में ही पकड़े गए हैं। चार बांग्लादेशी धरमनगर में पकड़े गए हैं। बाकी 11 का ठिकाना संजय नगर और संतोषी नगर है। किसी भी बांग्लादेशी ने 26 साल में मकान नहीं खरीदा है। सभी किराए के मकान में रह रहे हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि सभी के पास आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड हैं। वे सरकार की हर योजना का लाभ ले रहे हैं। यहां तक कि कई ने पासपोर्ट और वीजा भी बनवा लिया है। घुसपैठियों के दस्तावेज तैयार करने वाला शेख अली पिछले डेढ़ साल से फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। उसकी पत्नी और बच्चा यहीं हैं, लेकिन वह फरार हो गया है। चर्चा है कि वह पुलिस के संपर्क में है, इसलिए वह बचकर भाग गया।

तत्कालीन पार्षद पर कार्रवाई की अनुशंसा पर अमल नहीं

रायपुर पुलिस ने पहली बार फरवरी 2025 में मोहम्मद इस्माइल, शेख अकबर और शेख साजन को पकड़ा था। तीनों विदेश भागने वाले थे। तीनों का वीजा और पासपोर्ट बना लिया गया था। तीनों जेल में हैं। इसके बाद जून में 10 बांग्लादेशी पकड़े गए। इनमें एक ही परिवार के पांच लोग थे। हालांकि इनके दस्तावेज भी फर्जी हैं, लेकिन इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। सभी को डिपोर्ट किया गया है। अब रेहान और जमाल पकड़े गए हैं। सभी के दस्तावेजों की जांच में खुलासा हुआ है कि तत्कालीन पार्षद की चिट्ठी के आधार पर उनका पहचान पत्र बना है। उसी के आधार पर बाकी दस्तावेज तैयार किए गए। बयान और जांच के बाद तत्कालीन पार्षद पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।

आधा दर्जन के नाम उजागर, तलाश जारी पुलिस के पास आधा दर्जन बांग्लादेशियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। इनमें महिलाएं भी हैं, जो कम उम्र में यहां आई थीं। बाद में उन्होंने शादी कर ली और अब उनके बच्चे भी यहीं रह रहे हैं। कुछ बुजुर्ग दंपती भी यहां रहते थे, जो फोन बंद कर गायब हैं।

टास्क फोर्स सिर्फ कागजों में, बैठक तक नहीं हुई राज्य के सभी जिलों में पिछले साल अवैध घुसपैठियों की तलाश के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) बनाई गई थी। इसकी जिम्मेदारी एडिशनल एसपी रैंक के अधिकारियों को दी गई है। रायपुर में जब पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू नहीं हुआ था, तब इसका गठन किया गया था। कमिश्नरी लागू होने के बाद अभी किसी को इसकी जिम्मेदारी नहीं दी गई है। ग्रामीण क्षेत्र में भी इसके लिए कोई अधिकारी नहीं है। जबकि बाकी जिलों में स्थिति दयनीय है। घुसपैठियों पर कार्रवाई तो दूर, हर माह इनकी बैठक तक नहीं हो रही है। जबकि हर माह पहले सप्ताह में एसटीएफ की कार्रवाई की रिपोर्ट गृह विभाग को देनी है। वहां से रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जानी है। एसटीएफ की कार्रवाई सिर्फ कागजों में चल रही है। पकड़े गए अवैध घुसपैठियों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इनका राशन कार्ड और आधार कार्ड किस आधार पर बना था, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है। कुछ और लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी तस्दीक की जा रही है। -डॉ. संजीव शुक्ला, पुलिस कमिश्नर, रायपुर

बांग्लादेशियों ने पार्षद के दस्तावेज से बनवाए आधार-राशन कार्ड, राशन भी लेते रहे

रायपुर पुलिस की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। पकड़े गए बांग्लादेशी घुसपैठिए शेख रेहान (31 वर्ष) और जमाल करीम (42 वर्ष) ने तत्कालीन पार्षद की चिट्ठी के आधार पर फर्जी पहचान पत्र बनवाए। रेहान 26 साल से रायपुर में रह रहा है, जबकि जमाल 13 साल से यहां रह रहा है।पार्षद के लिखित दावों के जरिए उनके परिजनों और फिर दोनों के वोटर आईडी, राशन कार्ड तथा अन्य दस्तावेज तैयार हुए। वे शासन से मुफ्त राशन ले रहे थे। जमाल ने ओडिशा की महिला से शादी की है और उसके बच्चे भी हैं। पुलिस ने कलेक्टर व आधार केंद्र को पत्र लिखकर उनके जमा दस्तावेजों का रिकॉर्ड मांगा है।

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