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संविधान के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21A) के तहत बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की अनदेखी कर,गरीब परिवार के बच्चों को शिक्षित नहीं करना चाहती भाजपा सरकार -आम आदमी पार्टी

आत्मानंद स्कूलों की बदहाली, आरटीई में सीटों को कम करने और शिक्षक भर्ती नहीं करने पर आम आदमी पार्टी ने की पत्रकार वार्ता

 

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रायपुर, 20 फरवरी 2026। प्रदेश में भारतीय संविधान में 86वें संशोधन (2002) के माध्यम से शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया है, जो अनुच्छेद 21A के तहत 6-14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है। यह प्रावधान 1 अप्रैल 2010 से प्रभावी हुआ और इसी के अंतर्गत शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 लाया गया, इस अधिकार को आज छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार चौतरफ़ा अनदेखी कर रही है। प्रदेश में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की बदहाल स्थिति और शिक्षा फंड में कटौती,गरीब बच्चों की आरटीई सीटों की समाप्ति और शिक्षकों की वरीयता को नज़र अंदाज कर सीधी भर्ती को लेकर आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ इकाई ने सरकार पर बड़ा हमला करते हुए पत्रकार वार्ता की । पत्रकार वार्ता में प्रदेश महासचिव वदूद आलम ने बताया कि आत्मानंद स्कूलों को मिल रहे फंड में कटौती, कई स्कूलों के बंद होने की आशंका, शिक्षकों की कमी, बिजली बिल बकाया, संसाधनों के अभाव और बच्चों को ड्रेस-किताबें न मिलने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सरकार प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, जबकि आत्मानंद स्कूलों को नियमित और पर्याप्त बजट नहीं दिया जा रहा। फंड की कमी के कारण कई स्कूलों में मरम्मत, रंग-रोगन, प्रयोगशाला और शैक्षणिक गतिविधियां ठप पड़ी हैं। पत्रकार वार्ता में राजधानी रायपुर के आत्मानंद स्कूलों को मिले बिजली बिल के नोटिस, राजनांदगांव में शिक्षकों के खाली पदों और कम फंड, तथा बस्तर संभाग में संसाधनों की भारी कमी जैसे मामलों को उदाहरण के तौर पर रखा जाएगा। ये सिर्फ चुनिंदा उदाहरण नहीं, बल्कि प्रदेश भर के स्कूलों की हकीकत है।

प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ़ ने कहा कि हाल ही में प्रदेश सरकार ने आरटीई की 44173 सीटों की बजाय 19466 सीटों पर ही एडमिशन देने का निर्णय लिया। मतलब 24 हजार से ज्यादा सीटें खत्म कर दी गयीं हैं। दरअसल पहले आरटीई के तहत निजी स्कूलों में नर्सरी, पीपी-1 पीपी -2 से लेकर कक्षा पहली तक प्रवेश दिया जाता था लेकिन अब नियम बदलकर सीधे कक्षा पहली में ही भर्ती अनिवार्य कर दी गई है। इससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा उन्हें बच्चों को नर्सरी और पीपी 1 में निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए मोटी फीस चुकानी पड़ेगी।

प्रदेश अध्यक्ष (कर्मचारी विंग ) विजय कुमार झा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बच्चों के भविष्य को बर्बाद करने के लिए सरकार पूरी प्लानिंग से चल रही है, युक्तियुक्तकरण में 10 हजार स्कूल बंद कर दिये, ग्रामीण इलाकों में स्कूलों की जर्ज़र स्थिति है। 50 हजार शिक्षकों की भर्ती नहीं की जा रही है। सरकारी मुफ्त शिक्षा की बजाय निजी स्कूलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह सरकार शिक्षा विरोधी सरकार है।

सरकार से तीन बड़ी मांगें:

प्रदेश मीडिया प्रभारी मिहिर कुर्मी ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सरकार से मांग करती है कि सभी आत्मानंद स्कूलों को तत्काल नियमित और पूरा फंड जारी करने, आरटीई के तहत नर्सरी, पीपी -1 और पीपी-2 से प्रवेश की पुरानी व्यवस्था बहाल करने और छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा में पुराना फीडिंग कैडर सिस्टम के तहत नये शिक्षकों की भर्ती करना चाहिए ।

बच्चों के भविष्य से समझौता नहीं:

रायपुर लोकसभा अध्यक्ष अज़ीम खान ने कहा कि सरकार की नई नीतियों से संविधान के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21A) के तहत गरीब और मध्यम वर्गीय बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाये । और यदि सरकार ने शिक्षा के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में पार्टी इसे प्रदेशव्यापी जनआंदोलन का रूप देगी

 

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