छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश से धान की फसल तबाह और पटवारियों की हड़ताल से किसान चिंतित

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोर्स के मुताबिक इसका कारण चक्रवाती तूफान अर्नब का असर है। यह बेमौसम बारिश से धान फसल नुकसान का मामला है। कई जिलों में तैयार फसल प्रभावित हुई है। खेतों में पानी भरने से कहीं बालियां डूबी हैं। कहीं तेज हवा और बारिश से फसल जमीन पर बिछ गई है।
छत्तीसगढ़ में धान किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन है। कई इलाकों में फसल पककर तैयार थी। कटाई की तैयारी चल रही थी। तभी मौसम बदल गया। लगातार बारिश से खेतों में पानी जमा है। पानी में गिरी बालियों के खराब होने का खतरा है। दानों की गुणवत्ता पर भी असर की आशंका है।
सर्वे में देरी हुई तो क्या होगा?:
फसल नुकसान का आकलन सहायता की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। किसानों को डर है कि सर्वे में देर हुई तो मुआवजे में भी देर हो सकती है। बारिश के बाद खेतों की स्थिति बदलने से असली नुकसान का आंकना भी कठिन हो सकता है।
पटवारियों की हड़ताल का क्या असर?:
छत्तीसगढ़ पटवारी हड़ताल 13 अक्टूबर से चल रही है। नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन हो रहा है। इसमें कई जिलों के पटवारी शामिल हैं। संघ की प्रमुख मांगें पीवी ऐप से जुड़ी आपत्तियों का समाधान, वेतन विसंगति दूर करना और पदोन्नति की व्यवस्था है। लेकिन अभी तक संघ से सरकार ने किसी प्रकार की बातचीत नहीं की है।
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की मांग :
प्रदेश कांग्रेस ने किसानों को जल्द आर्थिक सहायता देने की मांग की है। कांग्रेस ने पूरी फसल गंवाने वाले किसानों के लिए 70,518 रुपए प्रति एकड़ की मांग रखी है। यह राशि 3,358 रुपए प्रति क्विंटल की दर और 21 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन के आधार पर बताई गई है।
वहीं आम आदमी पार्टी ने 3358 रूपये प्रति क्विंटल और 150 रूपये प्रति क्विंटल जो कि कांग्रेस सरकार की एक किश्त का बाकी है कुल मिलाकर 3508 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य की मांग की है। और जल्द ही सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई है।आम आदमी पार्टी ने हड़ताल से धान खरीदी और पंजीयन के काम पर असर की आशंका भी जताई है।
हालांकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को प्रभावित फसलों का आकलन कराने को कहा है। उन्होंने नियमानुसार सहायता देने और सर्वे व राहत वितरण में अनावश्यक देरी न करने के निर्देश दिए। हालांकि हड़ताल के बीच सर्वे की वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी, यह स्पष्ट नहीं है।



