यूपी में ओवरस्पीडिंग पर बड़ी कार्रवाई:2 दिन में 6,777 वाहनों के चालान, 1.38 करोड़ का जुर्माना

इंटरसेप्टर वाहनों से हुई निगरानी डीजीपी राजीव कृष्ण की पहल पर यातायात निदेशालय ने यह अभियान चलाया। अपर पुलिस महानिदेशक यातायात ए. सतीश गणेश के निर्देशन में प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे और चिन्हित स्थानों पर इंटरसेप्टर वाहन तैनात किए गए। इनके जरिए निर्धारित गति सीमा से अधिक रफ्तार से चलने वाले वाहनों की पहचान कर चालान किए गए।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!तेज रफ्तार से बढ़ता है हादसों में गंभीर चोट का खतरा यातायात निदेशालय के मुताबिक, तेज रफ्तार सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शामिल है। अधिक गति के कारण हादसे की स्थिति में गंभीर चोट लगने और जान जाने का खतरा बढ़ जाता है।
पुलिस का कहना है कि अभियान का मकसद सिर्फ चालान करना नहीं, बल्कि वाहन चालकों को निर्धारित गति सीमा का पालन करने के लिए जागरूक करना भी है। वाहन चालकों से अपनी और सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सावधानी से वाहन चलाने की अपील की गई है।
प्रदेश में तेज रफ्तार से वाहन चलाने वालों के खिलाफ यातायात पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की है। ‘ऑपरेशन सेफ स्पीड’ के दो चरणों में प्रदेश के एक्सप्रेसवे और चिन्हित हाईवे पर 6,777 वाहनों के चालान किए गए। इन पर कुल 1 करोड़ 38 लाख 32 हजार 500 रुपये का जुर्माना दर्ज किया गया। 26 और 28 अक्टूबर 2026 को चलाए गए इस अभियान में इंटरसेप्टर वाहनों के जरिए तेज रफ्तार वाहनों की निगरानी की गई। पुलिस का उद्देश्य गति सीमा का उल्लंघन रोकने के साथ सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि कम करना है।
यमुना एक्सप्रेसवे पर सबसे ज्यादा चालान अभियान के दौरान यमुना एक्सप्रेसवे पर सबसे अधिक 3,116 वाहनों के चालान किए गए। यहां 66 लाख 98 हजार रुपये का जुर्माना दर्ज किया गया। दूसरे एक्सप्रेसवे और हाईवे पर हुई कार्रवाई का ब्योरा इस प्रकार है:
| एक्सप्रेसवे/हाईवे | चालान | जुर्माना |
| यमुना एक्सप्रेसवे | 3,116 | 66.98 लाख |
| दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे | 1,289 | 24.18 लाख |
| लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे | 537 | 11.82 लाख |
| गंगा एक्सप्रेसवे | 553 | 9.40 लाख |
| दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे | 497 | 9.94 लाख |
| पूर्वांचल एक्सप्रेसवे | 348 | 6.96 लाख |
| ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे | 214 | 4.28 लाख |
| बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे | 103 | 2.28 लाख |
| गोरखपुर-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे | 90 | 1.88 लाख |
| कानपुर-वाराणसी हाईवे | 30 | 60 हजार |
इंटरसेप्टर वाहनों से हुई निगरानी डीजीपी राजीव कृष्ण की पहल पर यातायात निदेशालय ने यह अभियान चलाया। अपर पुलिस महानिदेशक यातायात ए. सतीश गणेश के निर्देशन में प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे और चिन्हित स्थानों पर इंटरसेप्टर वाहन तैनात किए गए। इनके जरिए निर्धारित गति सीमा से अधिक रफ्तार से चलने वाले वाहनों की पहचान कर चालान किए गए।
तेज रफ्तार से बढ़ता है हादसों में गंभीर चोट का खतरा यातायात निदेशालय के मुताबिक, तेज रफ्तार सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शामिल है। अधिक गति के कारण हादसे की स्थिति में गंभीर चोट लगने और जान जाने का खतरा बढ़ जाता है। पुलिस का कहना है कि अभियान का मकसद सिर्फ चालान करना नहीं, बल्कि वाहन चालकों को निर्धारित गति सीमा का पालन करने के लिए जागरूक करना भी है। वाहन चालकों से अपनी और सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सावधानी से वाहन चलाने की अपील की गई है।



