रात भर में 154 मिलीमीटर बारिश से रायपुर तरबतर, निचले इलाकों में पानी भरा, जनजीवन प्रभावित

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रायपुर। 12 घंटों के दौरान 150 मिलीमीटर बारिश ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की जल निकासी व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है। मानसून के आगमन से पहले नगर निगम द्वारा नालों और नालियों की सफाई के जो बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे, वे पहली ही बड़ी बारिश में बह गए। शहर के विपणन केंद्रों, प्रमुख मार्गों और कई आवासीय कालोनियों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जिससे राहगीरों और स्थानीय निवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

बारिश का सबसे ज्यादा असर शहर के प्रमुख और व्यस्ततम इलाकों में देखने को मिला। गुढ़ियारी-नर्मदापारा अंडरब्रिज में इतना पानी भर गया कि सुरक्षा के लिहाज से वहां आवागमन को पूरी तरह रोकना पड़ा। इसके अलावा समता कालोनी, पंडरी कपड़ा मार्केट, देवेंद्र नगर अस्पताल रोड, राजातालाब, अश्वनी नगर, सुंदर नगर, अवंतीबाई चौक, मंडी गेट, रविशंकर विश्वविद्यालय मार्ग और रोहिणीपुरम गोल चौक जैसी जगहों पर घुटनों तक पानी भर गया। भाजपा कार्यालय (एकात्म परिसर) के आसपास भी पानी ही पानी नजर आया। स्थिति इतनी विकट थी कि वार्ड-पांच के कई घरों के भीतर गंदा पानी प्रवेश कर गया।
नाली सफाई के दावे साबित हुए हवाई
स्थानीय नागरिकों में निगम प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि नगर निगम ने तीन चरणों में नालों की सफाई का दावा किया था, जिसके लिए 250 अतिरिक्त सफाईकर्मियों सहित जेसीबी और पोकलेन मशीनें तैनात की गई थीं। इसके बावजूद, नालों की तलहटी से कचरा ठीक से साफ न किए जाने के कारण पहली ही बारिश में नालियाँ चोक हो गईं और गंदा पानी सड़कों पर उफनने लगा।

रायपुर रेलवे स्टेशन पर टपकी छत, करंट का खतरा
इस बदइंतजामी का असर रायपुर रेलवे स्टेशन पर भी देखने को मिला। प्लेटफार्म नंबर-एक पर टिन शेड के बीच बने गैप की वजह से बारिश का पानी सीधे प्लेटफार्म के बीचों-बीच तेज धार के रूप में गिरता रहा। इस वजह से यात्री अपना सामान बचाने के लिए यहाँ-बहाँ भागते नजर आए। सबसे खतरनाक बात यह थी कि पानी सीधे पंखों और ट्यूबलाइट जैसे बिजली के उपकरणों पर गिर रहा था, जिससे प्लेटफार्म पर करंट फैलने का गंभीर खतरा बना रहा और कई यात्री पूरी तरह भीग गए।



