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दाने को दांत से दबाकर करें जांच,15cm ऊपर से काटें:कटाई में एक गलती और 15% तक नुकसान, ऐसे करें फैसला…

 

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खेती में जितना महत्व बुवाई और फसल प्रबंधन का है, उतना ही महत्व कटाई के सही समय का भी है। यदि कटाई जल्दबाजी में कर दी जाए तो दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते और वजन कम हो जाता है।

वहीं कटाई में अधिक देरी होने पर बालियों से दाने झड़ने लगते हैं, फसल गिर जाती है और उत्पादन के साथ गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। हर साल किसानों को 5 से 15 प्रतिशत तक नुकसान केवल कटाई और कटाई के बाद की गलतियों से उठाना पड़ता है।

यदि किसान कुछ सरल वैज्ञानिक उपाय अपनाएं तो इस नुकसान को आसानी से रोका जा सकता है। खेती में असली कमाई केवल ज्यादा उत्पादन से नहीं, बल्कि उत्पादन को सुरक्षित रखने से भी होती है।

सही समय पर कटाई, उचित नमी स्तर, वैज्ञानिक भंडारण और मौसम के अनुसार निर्णय लेने से किसान बिना अतिरिक्त लागत के अपनी आय बढ़ा सकते हैं। इसलिए फसल पकने के संकेत पहचानना जरूरी है। दाने को दांत से दबाकर जांच करें और तभी कटाई का फैसला लें।

फसल की कटाई के समय ये सावधानियां रखनी जरूरी

– धान फसल की कटाई जमीन से 15 सेमी ऊपर से करें। कटाई सुगम होती है, भूसे की गुणवत्ता बेहतर रहती है। खेत में अवशेष बचने से मिट्टी की जैविक गुणवत्ता को भी लाभ मिलता है। – जब धान की 80 से 85% बालियां सुनहरी या पीली पड़ जाएं, पौधों की हरियाली लगभग समाप्त हो जाए और दाने पूरी तरह भर जाएं, तब फसल कटाई के लिए तैयार मानी जाती है। – दानों की नमी का परीक्षण करें। दाने को दांत से दबाएं। दाना कठोर हो और आसानी से न टूटे तो समझिए कि फसल कटाई के लिए तैयार है। दाना नरम हो तो कुछ दिन और इंतजार करें। – कटाई के समय धान के दानों में 18 से 22% नमी आदर्श मानी जाती है। अधिक नमी से भंडारण के दौरान फफूंद लगने का खतरा होता है। ज्यादा सूखे दानों में कटाई और मिंजाई के दौरान टूट-फूट अधिक होती है।

खेती के वक्त मौसम पर भी नजर रखने की सख्त जरूरत

– मौसम पर भी नजर रखनी चाहिए। बेमौसम बारिश, तेज हवा या आंधी की संभावना होने पर कटाई में देरी होगी और यह महंगी भी पड़ सकती है। – कई बार बारिश के कारण खेत में खड़ी फसल गिर जाती है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होते हैं।

कटाई का तरीका कोई भी हो फसल की परिपक्वता अनिवार्य

– बदलते समय के साथ खेती में मशीनों का उपयोग भी बढ़ा है। बड़े किसानों के लिए हार्वेस्टर और रीपर मशीनें समय और मजदूरी दोनों बचा रही हैं। – छोटे किसान पारंपरिक हंसिया से कटाई करते हैं। तरीका कोई भी हो, महत्वपूर्ण बात फसल की परिपक्वता और सही समय पर कटाई है।

कटाई के बाद ये 5 काम बढ़ाएंगे मुनाफा

– अनाज को 2 से 3 दिन धूप में सुखाएं। – भंडारण से पहले नमी 12 प्रतिशत से कम करें। – टूटे, कच्चे व खराब दानों को अलग करके ही भंडारण करें। – साफ, सूखे व हवादार गोदाम का चयन करें। – कीट और फफूंद से बचाव के लिए नियमित निरीक्षण करें

मजदूरी और पैसे की बचत हो रही

किसान उमेश कुमार सेठिया बताते हैं कि वे पहले कई सालों तक धान की फसल को मजदूरों से कटवाते थे। इस काम के लिए काफी पैसे खर्च करने पड़ते थे। लेकिन पिछले 3 साल वे मशीन के जरिए धान की फसल कटवा रहे हैं। इसके चलते पैसे और समय की बचत हो रही है।

फसल की परिपक्वता के समय को ध्यान में रखते हुए बीते साल पांच एकड़ में लगी धान की फसल को मशीन से कटवाया था, जिसमें पूरा खर्च पांच हजार रुपए ही हुआ, जबकि मजदूरों से धान कटवाने से इसमें करीब 10-12 हजार रुपए लग जाते थे।

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