5 माह में 332 तस्कर गिरफ्तार, लेकिन गांजा उगाने वाले अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर

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राजधानी में पिछले पांच माह में 332 से अधिक तस्करों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनके पास से पुड़िया के साथ हरे-भरे गांजे के पौधे भी जब्त किए गए हैं। हर कार्रवाई के बाद पुलिस दावा करती है कि गांजा तस्करी की अंतिम कड़ी, यानी उत्पादकों तक पहुंचकर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अब तक एक भी गांजा उगाने वाले को नहीं पकड़ा जा सका है।
स्थिति यह है कि गांजा की खेती करने वालों से खरीदकर देश के अलग-अलग राज्यों में सप्लाई करने वाले बड़े नेटवर्क भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। अब तक ज्यादातर वही लोग पकड़े गए हैं, जो दूसरों से खरीदकर तस्करी करते हैं या दूसरे राज्यों से माल लाकर यहां सप्लाई करते हैं। यही कारण है कि लगातार कार्रवाई और सख्ती के बावजूद राज्य में गांजा, ड्रग्स, चरस और अफीम की सप्लाई थम नहीं रही है।
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से मई तक 162 एनडीपीएस केस दर्ज किए गए हैं, जिनमें 332 तस्कर पकड़े गए हैं। इनमें 9 नाबालिग, 26 युवतियां व महिलाएं और 219 युवक व अधेड़ शामिल हैं। इनमें 78 तस्कर दूसरे राज्यों के निवासी हैं, जो गांजा लेकर रायपुर से गुजर रहे थे या पंजाब-हरियाणा से ड्रग्स की सप्लाई कर रहे थे।
हालांकि इन मामलों में गांजा के उत्पादक या खेती करने वाले एक भी आरोपी सामने नहीं आया है। पुलिस खुद मान रही है कि ओडिशा में बड़े पैमाने पर गांजा की खेती हो रही है, जहां से छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों में सप्लाई की जा रही है। इसके अलावा अफीम और डोडा की तस्करी भी जारी है, लेकिन इनके बड़े सप्लायर अब भी पकड़ से दूर हैं।
बड़े तस्करों का नहीं मिल पाता लिंक
टास्क फोर्स के एक अधिकारी के अनुसार हर मामले में एंड-टू-एंड कार्रवाई की कोशिश की जाती है। पकड़े गए तस्करों से दो स्तर पर पूछताछ होती है। आगे माल कहां जाना था और पीछे उसने किससे खरीदा। अधिकांश मामलों में बड़े तस्करों तक सीधा कनेक्शन या तकनीकी साक्ष्य नहीं मिल पाता।
इसकी वजह यह है कि खेती करने वाले और बड़े सप्लायर सीधे संपर्क में नहीं रहते, बल्कि चैन सिस्टम पर काम करते हैं। दूसरे राज्यों से ओडिशा जाकर गांजा खरीदने वाले लोग एजेंट के माध्यम से डील करते हैं। एजेंट ही गाड़ी लेकर जंगल तक जाता है, माल लोड कराता है या खुद डिलीवरी करता है। हर डिलीवरी के बाद मोबाइल नंबर बदल दिए जाते हैं और पूरा लेन-देन नकद में होता है, जिससे डिजिटल ट्रैकिंग संभव नहीं हो पाती।
तीन एजेंसियां कर रहीं काम, नहीं थम रही सप्लाई नशे के खिलाफ कार्रवाई के लिए देश में 1957 में राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) का गठन किया गया था, जो विभिन्न प्रकार की तस्करी पर काम करता है।
इसके बाद 1986 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) का गठन विशेष रूप से नशे के मामलों के लिए किया गया। इस वर्ष छत्तीसगढ़ में जिला स्तर पर कार्रवाई के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) बनाई गई है। एएनटीएफ ने रायपुर के करीब 210 से अधिक मोहल्लों की पहचान की है, जहां तस्करी की गतिविधियां हैं।
पुलिस कमिश्नरी में लगातार नशे के खिलाफ कार्रवाई चल रही है। चार माह में 332 से अधिक तस्कर पकड़े गए हैं। ओडिशा में भी 9 स्थानों पर दबिश दी गई थी। अन्य राज्यों से 78 से अधिक तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की हमेशा कोशिश रहती है कि अंतिम कड़ी या बड़े तस्करों तक हर हाल में पहुंचा जाए। -डॉ. संजीव शुक्ला, पुलिस कमिश्नर
ओडिशा से गांजा लाकर शहर में बेचने की कोशिश कर रहा था, युवक गिरफ्तार
गंज थाने की पुलिस ने पेट्रोलिंग के दौरान गुरुवार की रात को एक युवक को अवैध तरीके से गांजा परिवहन करते हुए गिरफ्तार किया है। मुखबिर से सूचना मिली थी कि युवक अवैध मादक पदार्थ गांजा लेकर एक्सप्रेस-वे रोड, चूनाभट्टी से गुजर रहा है।
पेट्रोलिंग टीम तत्काल वहां पहुंची। घेराबंदी कर संदिग्ध को पकड़ा गया। पूछताछ में उसने अपना नाम सैय्यद मुस्तकीन (20 वर्ष) बताया। वो श्रद्धा विहार कॉलोनी, मोतीनगर टिकरापारा का रहने वाला है। पुलिस ने उसके पास डेढ़ किलो गांजा बरामद किया। इसकी कीमत करीब 75000 रुपए बताई गई है। युवक ने बताया कि वो ओडिशा के कालाहांडी से गांजा लेकर रायपुर आया था।


