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UCC पर जनता से सुझाव आमंत्रित, देश में पहले से मौजूद कानूनों और पिछले वर्षों के नीतिगत फैसलों पर भी हो चर्चा

 

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देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लेकर जनता से सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं। UCC का उद्देश्य देश में नागरिक मामलों से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों में समानता लाना बताया जा रहा है।

 

हालांकि, देश में पहले से ही नागरिकों के अधिकारों और दायित्वों को नियंत्रित करने के लिए कई प्रकार के कानून मौजूद हैं, जिनमें शामिल हैं:

 

• भारतीय दंड संहिता (IPC) / अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) – आपराधिक मामलों के लिए

• दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) / अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) – आपराधिक प्रक्रिया के लिए

• भारतीय साक्ष्य अधिनियम / अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) – न्यायिक साक्ष्यों के लिए

• भारतीय संविधान – नागरिक अधिकारों और शासन व्यवस्था का आधार

• सिविल कानून (Civil Laws) – संपत्ति, अनुबंध, विवाद और नागरिक मामलों से संबंधित

• पारिवारिक कानून – विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने आदि से संबंधित व्यक्तिगत कानून

• संपत्ति एवं भूमि कानून

• उपभोक्ता संरक्षण कानून

• श्रम एवं रोजगार कानून

• शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े कानून

• कंपनी एवं आर्थिक कानून

• सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI)

• भ्रष्टाचार निरोधक कानून

• महिला एवं बाल संरक्षण कानून

 

ऐसे में जनता के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि देश में पहले से मौजूद कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, न्याय व्यवस्था में सुधार और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।

 

पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा कई बड़े नीतिगत फैसले और कानून लाए गए, जिन्हें सरकार ने देशहित में आवश्यक बताया। इनमें प्रमुख रूप से:

 

• वर्ष 2016 की नोटबंदी – काले धन और नकली मुद्रा पर रोक के उद्देश्य से लागू की गई

• वस्तु एवं सेवा कर (GST) – देश में एक समान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू करने के लिए

• अनुच्छेद 370 में बदलाव – जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक व्यवस्था में परिवर्तन

• नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) – नागरिकता से संबंधित कानून में संशोधन

• तीन तलाक कानून – मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा कानून

• नए आपराधिक कानून – IPC, CrPC और Evidence Act की जगह BNS, BNSS और BSA लागू किए गए

• कृषि कानून (बाद में वापस लिए गए) – कृषि क्षेत्र में सुधार के उद्देश्य से लाए गए

• नई शिक्षा नीति (NEP) 2020

• डिजिटल इंडिया और डेटा संरक्षण कानून

• E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति – पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य

• सरकारी संस्थानों के विनिवेश और निजी भागीदारी की नीति

• सार्वजनिक क्षेत्र की कई संस्थाओं में निजीकरण/विनिवेश की प्रक्रिया

 

इन सभी फैसलों को लेकर देश में अलग-अलग मत रहे हैं। सरकार समर्थकों का कहना है कि इनसे सुधार और विकास को गति मिली, जबकि आलोचकों ने इनके सामाजिक, आर्थिक और संवैधानिक प्रभावों पर सवाल उठाए।

 

अब जब UCC जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जनता की राय मांगी जा रही है, तो आवश्यकता है कि देश में कानून व्यवस्था, न्याय तक पहुंच, संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों पर भी व्यापक राष्ट्रीय चर्चा हो।

 

जनता की भागीदारी से ही कोई भी बड़ा कानूनी और सामाजिक परिवर्तन मजबूत आधार प्राप्त कर सकता है।

 

— महफूज़ खान | जनहित 🇮🇳

सामाजिक शोधकर्ता एवं लोकनीति विश्लेषक

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