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Vizag: पिघला हुआ लोहा गिरने से 8 कर्मचारियों की मौत

 

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आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में स्थित राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) के स्टील प्लांट में सोमवार दोपहर एक भीषण हादसा हो गया. प्लांट के स्टील मेल्टिंग फैसिलिटी के कंटीन्यूअस कास्टिंग विभाग में करीब 1,600 डिग्री सेल्सियस तापमान पर उबलता हुआ तरल स्टील ले जा रहा एक लैडल (बड़ा पात्र) अचानक धमाके के साथ पलट गया. इस धमाके के बाद टनों पिघला हुआ लोहा फैक्ट्री के फर्श पर फैल गया, जिसकी चपेट में आने से 8 कर्मचारियों की मौके पर ही झुलसकर दर्दनाक मौत हो गई.

इस हादसे में कई अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिन्हें नाजुक हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पिछले एक दशक में विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में यह सबसे बड़ा और भयावह हादसा माना जा रहा है. इससे पहले साल 2012 में यहां एक ऑक्सीजन प्लांट में हुए धमाके में 19 लोगों की जान गई थी.

प्रत्यक्षदर्शियों और प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह घटना सोमवार दोपहर करीब 4:15 बजे हुई. उस समय लगभग 150 टन पिघला हुआ स्टील ले जा रहा लैडल अचानक एक विस्फोट के बाद अनियंत्रित होकर जमीन पर गिर गया. हादसे के वक्त उस हिस्से में करीब 18 कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात थे. पिघले हुए लोहे का तापमान इतना अधिक था कि आठ कर्मचारियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और वे जिंदा जल गए.

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां और बचाव दल मौके पर पहुंचे, लेकिन करीब 90 मिनट तक भड़की आग और अत्यधिक गर्मी के कारण शवों को बाहर निकालने में भारी मशक्कत करनी पड़ी.

मृतकों की पहचान जी. भानु कुमार, के. प्रभाकर, जीवी अप्पा राव, एम. कृष्णा नागू, गोल्ड कुमार और अनुबंध श्रमिक रमना, त्रिनाथ व एन. अप्पाला राजू के रूप में हुई है. वहीं, गंभीर रूप से झुलसे कर्मचारियों में रवुरी मल्लिकार्जुन, पी. श्रीनिवास राव, अर्जुन अप्पा राव, सत्य नंद, पाइडिराजू और हरि बाबू शामिल हैं, जिन्हें पहले प्लांट के अस्पताल और बाद में बेहतर इलाज के लिए केजीएच तथा अन्य निजी अस्पतालों में रेफर किया गया.

इस दर्दनाक घटना के बाद श्रमिक संगठनों ने प्लांट प्रबंधन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं. सीटू (CITU) और इंटक (INTUC) के नेताओं का कहना है कि लैडल में लीकेज की वजह से यह ब्लास्ट हुआ.

यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में प्लांट से करीब 10,000 नियमित और अनुबंध कर्मचारियों को कम किया गया है, जिससे भारी मैनपावर शॉर्टेज हो गई है. कर्मचारियों की कमी के कारण सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही है और जरूरी मेंटेनेंस वर्क को टाला जा रहा है.

नेताओं का दावा है कि प्रबंधन का पूरा ध्यान केवल उत्पादन बढ़ाने पर है, जबकि सुरक्षा और रखरखाव को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है. इसके अलावा, वित्तीय संकट से जूझ रहे इस प्लांट में घटिया स्तर के कच्चे माल की खरीद को भी इस तरह के हादसों की एक बड़ी वजह बताया जा रहा है.

हादसे की खबर मिलते ही प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं. उन्होंने सभी संबंधित विभागों को बचाव और राहत कार्यों में तेजी लाने और घायलों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए हैं.

राज्य की गृह मंत्री वंगलापुडी अनिता ने अपना विजयनगरम दौरा बीच में ही रद्द कर दिया और राहत कार्यों की निगरानी के लिए तुरंत विशाखापत्तनम स्टील प्लांट पहुंचीं.

वहीं, केंद्र सरकार भी इस मामले को लेकर गंभीर है और केंद्रीय इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी मंगलवार को स्थिति का जायजा लेने के लिए खुद विशाखापत्तनम स्टील प्लांट का दौरा करेंगे. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और सुरक्षा में चूक के आरोपों पर सोमवार देर शाम तक प्लांट प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था.

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