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बड़ावदा/रतलाम। जावरा तहसील अंतर्गत ग्राम अर्जला में सोमवार रात एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने ग्रामीण सड़कों की हकीकत और आपातकालीन व्यवस्था की संवेदनहीनता दोनों को उजागर कर दिया। प्रसव पीड़ा से तड़प रही प्रसूता चालक की हठधर्मिता के कारण जननी एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकी और स्वजनों को उसे लोडिंग वाहन में बैठाकर करीब 200 मीटर कच्चे रास्ते से शासकीय स्कूल के पास खड़ी एम्बुलेंस तक लाना पड़ा।
ग्राम अर्जला निवासी 23 वर्षीय ज्योति पत्नी भेरूलाल सूर्यवंशी को सोमवार शाम प्रसव पीड़ा शुरू हुई। शाम करीब 6:20 बजे आशा कार्यकर्ता ने 108 जननी एक्सप्रेस को सूचना दी। लगभग 15 मिनट में एम्बुलेंस (क्रमांक सीजी 04 एनवी 6402) गांव तो पहुंच गई, लेकिन चालक ने कच्चा रास्ता बताते हुए वाहन घर तक ले जाने से मना कर दिया और स्कूल के समीप ही खड़ा कर दिया।
करीब एक घंटे तक मान मन्नोवल के बाद भी चालक नहीं माना। इसके बाद करीब 08 बजे बाद लोडिंग से ज्योति को एम्बुलेंस तक पहुंचाया। ज्योति ने मंगलवार तड़के जावरा के सिविल अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया।
एक घंटे तक ग्रामीण भी करते रहे आग्रह
प्रसूता के पिता जुझारीलाल अजमेरिया ने बताया कि वे बेटी को प्रथम प्रसव के लिए दो माह पूर्व आलोट के लसुड़िया सूरजमल स्थित ससुराल से अर्जला लेकर आए थे। गांव की नई आबादी में उनके अलावा 25 से अधिक परिवार निवास करते हैं और इसी रास्ते से प्रतिदिन सैकड़ों दोपहिया-चारपहिया वाहन निकलते हैं। घर तक मात्र 200 मीटर कच्चा रास्ता है।
मौसम खराब था
जुझारीलाल ने बताया कि मौसम खराब था, चालक से बार-बार आग्रह किया कि प्रसूता की हालत गंभीर है, घर तक वाहन ले आएं। इस पर चालक ने कहा, एम्बुलेंस नहीं आ सकती, आप खुद लेकर आओ, बाइक से ले आओ। जब कहा कि बाइक से कैसे ला सकते हैं, तब भी चालक नहीं माना। यहां तक कि उन्होंने ट्रैक्टर भेजकर एम्बुलेंस फंसने पर निकालने की बात कही, लेकिन चालक ने मना कर दिया और बोला कि ट्राली में बैठाकर ले आओ। वे घर पर अकेले पुरुष थे।
इस पर सरपंच प्रतिनिधि बालू बोडाना को सूचना दी गई। वे मौके पर पहुंचे, लेकिन उनके कहने पर भी चालक नहीं माना। इस दौरान गांव के 20 से अधिक लोग एकत्रित हो चुके थे। गांव में लोकेंद्रसिंह चंद्रावत को उनकी जीप के लिए फोन किया गया, लेकिन वह उपलब्ध नहीं थी। मजबूरी में लोकेंद्रसिंह का लोडिंग वाहन बुलाया गया, जिसमें प्रसूता को बैठाकर स्कूल तक लाया गया। वहां से एम्बुलेंस में बैठाकर अस्पताल ले जाया गया।
वीडियो में ड्राइवर बोला- अधिकारियों ने मना किया
घटनाक्रम के दौरान बनाए गए वीडियो में चालक अपना नाम नवदीप पाठक बताते हुए कहता दिखाई दे रहा है कि अधिकारियों ने मना किया है। एम्बुलेंस कच्चे रास्ते पर ले जाने जैसी नहीं है। जब लोगों ने उससे कहा कि लोडिंग भी तो आई है, तो चालक ने जवाब में कहा कि रोड ठीक होता तो ले आता, एम्बुलेंस लोडिंग नहीं है। चालक के साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति भी वीडियो में ग्रामीणों को रोड ठीक करवाने की नसीहत देते सुनाई दे रहा है।
खराब सड़क पर जनप्रतिनिधि नहीं दे रहे हैं ध्यान
जुझारीलाल का कहना है कि इस मार्ग की खराब स्थिति के बारे में कई बार जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक सड़क निर्माण नहीं हुआ। जुझारीलाल ने पूरे घटनाक्रम की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर भी दर्ज कराई है, ताकि भविष्य में किसी अन्य प्रसूता या मरीज को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
एम्बुलेंस के ईएमटी मोहनसिंह गुर्जर का कहना है कि वाहन में तकनीकी समस्या थी, मार्ग कच्चा था और बारिश के कारण अंदर ले जाना संभव नहीं था। इसलिए स्वजनों को स्कूल तक प्रसूता को लाने के लिए कहा गया।