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नहीं होता पैकेट बंद खाद्य पदार्थों, मिठाईयों की सुरक्षा एवं मानकों का निरीक्षण

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परितोष शर्मा की कलम से :

महासमुंद:  शहर में ” छप्पन भोग” के नाम से संचालित एक मिठाई वाला संचालक विभागीय कार्यवाही ना होने पर दुकानदारों के हौसले बुलंद। खरीददार को बिल भी नहीं देते।

बाजार में बिकने वाली मिठाईयों समेत तमाम खाद्द पदार्थों की गुणवत्ता जांच के लिये बनाये गये खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के द्वारा नियमित रूप से जांच नहीं किया जाता है। जिसके कारण दुकानदार नकली मिठाई भी तैयार करते हैं और फिर उसे मनमानी मूल्य पर भी बेचते हैं। खाद्य पदार्थों की मानकता की जांच के लिये टास्क फोर्स का भी गठ़न किया गया है। परन्तु सभी मामले को उपर ही उपर वारा-न्यारा कर दिया जाता है। जिला स्तर पर खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी मौन है या किस अधिकारी को इस पद का प्रभार सौंपा गया है।

इसका भी कोई पता ठिकाना नहीं है:

ऐसा ही एक मामला आया महासमुंद से की
नाम ना छापने के शर्त पर एक उपभोक्ता ने शिकायत की, की महासमुंद बस स्टैंड के गेट नंबर 1 पर छप्पन भोग नाम से एक मिठाई दुकान संचालित होता है जिसमें बिकने वाली अधिकांश खाद्य पदार्थो में निर्वाण एवं अवसान की तिथि ही नहीं लिखी होती यानि बिना एक्सपायरी डेट लिखे मिठाइयाँ और पैकेट बंद खाद्य समग्रीयों की बिक्री कर रहा है।
बुलेट न्यूज़ एवं सच तक इंडिया न्यूज़ के पत्रकार दुकान में जा कर जब खुद निरीक्षण करने पहुंचे तो पाया गया की सचमुच बेंचने के लिए सजाकर रखी गईं मिठाईयों के ऊपर निर्माण की तिथि ही नहीं थीं।
दुकान संचालन करने वाले व्यक्ति से जब इसका कारण पूछा गया तो वह भड़क गया और पूछने वाले पत्रकारों को ही देख लेने की धमकी दे कर कहने लगा की मेरी मर्ज़ी निर्माण तारीख लिखूं या ना लिखूं तुम्हे क्या ।
मेरी राजनीतिज्ञ पंहुच है और मेरा उठना बैठना भी विभागीय अधिकारीयों के सांथ है तुम यहाँ से चले जाओ नहीं तो ठीक नहीं होगा ।
जब जनहित में खबर लेने वाले पत्रकारों से ही संचालक बत्तमीजी करने पर उतर आए तो उपभोक्ताओं के सांथ उसका व्यवहार कैसा होगा ये सोंचने वाला विषय है।
इससे यह पता चलता है की दूकानदार अपनी पहुँच और पावर के घमंड में मगरूर हो उपभोक्ताओं को अमानक खाद्य पदार्थ ही परोस रहा होगा ।

मिठाई के रूप मे जहर बेंच रहे हैं दुकानदार:

शहर के दुकानदारों के द्वारा मिठाई के रूप में जहर बेचा जा रहा है। नकली दुग्ध एवं मावा से बनाई गयी मिठाईयों को खाने से लोगों को पिलिया एवं आंत की कैंसर जैसी बिमारियां होती है। कृत्रिम दुग्ध स्वास्थ के लिये हानिकारक ही नहीं, बल्की जहर के समान है। मिठाई बना कर बेचने वाले दुकानदारों द्वारा मानको का भी अनुपालन नहीं किया जाता है और मिठाई का मूल्य भी वह स्वयं निर्धारित करते हैं।

क्या कहता है नियम:

खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिये सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकारण एफएफएसआई का गठन किया गया है। जिसका कार्यालय जिला मुख्यालय स्तर पर खोलने का प्रावधान है। एफएफएसआई का मुख्य उद्वेश्य खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकना है। इसके लिये टास्क फोर्स का भी गठन किया गया है। किसी भी प्रकार के खाद्य पदार्थो का निर्माण करने एवं बिक्री करने से पूर्व आवेदन कर लाईसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। जिसे खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोका जा सके। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अनुसार मिलावटी समान बेचने वालों को कम से कम दो लाख रूपये का जुर्माना एवं सजा तथा मिलावटी समान बनाने वाले को कम से कम दस लाख रूपये जुर्माना एवं सजा का प्रावधान है।

क्या कहते हैं अधिकारी:

विभागीय नियमों के अनुसार मिलावट रोकने को लेकर प्रशासन सख्त है। एफएसएसआई को पत्र लिख कर सभी कारखानों एवं दुकानों पर उपलब्ध मिठाईयों की मानकता की जांच करने एवं मिलावट करने वालों पर कार्रवाई करने को कहा जाता रहा है ।
यहाँ देखना अब जरुरी है की अधिकारीयों के द्वारा छप्पन भोग संचालक के ऊपर कार्यवाही होती है की नहीं।

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