छत्तीसगढ़प्रमुख खबरें

बारनवापारा में बनाया जाएगा गिद्धों का बसेरा

गिद्ध संरक्षण के लिए स्कूल और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

सच तक इंडिया रायपुर । गिद्धों को बचाने के लिए बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में व्हाईट रम्पड वल्चर को पुनः बसाने के प्रयास किए जाएंगे। साथ में वन विभाग, पशु चिकित्सा विभाग और ड्रग कंट्रोल विभाग के साथ समन्वय स्थापित करेगा, ताकि पालतू जानवरों के उपचार के दौरान उपयोग किए जाने वाले घातक दवाईयों पर प्रतिबंध लगाया जा सके। यह जानकारी गिद्ध संरक्षण पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) प्रेम कुमार ने दी। प्रेम कुमार ने कहा कि गिद्ध संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ वन विभाग नागरिकों की भावनाओं को गिद्धों से जोड़ने का प्रयास करेगा, जिससे वे इनके संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनें। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे छात्रों को प्रकृति और गिद्ध संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके। संरक्षण के प्रयासों को सुदृढ़ करने के लिए वन विभाग एनजीओ, शोधकर्ताओं और अन्य संबंधित संगठनों के साथ समन्वय करेगा। गिद्धों के आवास और उनकी गतिविधियों को समझने के लिए एक निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी और उनका जियोटैगिंग किया जाएगा।

गिद्ध संरक्षण पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन में हुआ। इस कार्यक्रम में शोधकर्ता, छात्र, और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एकत्रित हुए। कार्यशाला में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और बर्ड काउंट इंडिया जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के विशेषज्ञों ने गिद्धों की वर्तमान स्थिति, उनकी संख्या में गिरावट के कारण और उनके लिए सकारात्मक वातावरण बनाने के उपायों पर चर्चा की। कार्यक्रम में न केवल गिद्ध संरक्षण के प्रयासों को प्रोत्साहन दिया, बल्कि सभी प्रतिभागियों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित भी किया। शोधकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ में गिद्धों की गणना से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत किए। इंद्रावती टाइगर रिजर्व और अचानकमार टाइगर रिजर्व के प्रयासों को विशेष रूप से सराहा गया, जहां गिद्ध संरक्षण के लिए वल्चर रेस्टोरेंट और वल्चर सेफ जोन जैसी पहल की जा रही हैं।

इस कार्यशाला में सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक आर. के. सिंह, सहायक प्रधान मुख्य वन संरक्षक, योजना एवं विकास अरुण कुमार, सीसीएफ वाइल्डलाइफ एवं फील्ड डायरेक्टर, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व श्रीमती सातोविषा समझदार, संचालक, जंगल सफारी रायपुर धम्मशील गणवीर, उप निदेशक, अचानकमार टाइगर रिजर्व यू. आर. गणेश, उप निदेशक, इंद्रावती टाइगर रिजर्व संदीप बालगा और डीएफओ, कवर्धा शशि कुमार उपस्थित थे ।पैनल चर्चा में शोधार्थी डॉ. विभू प्रकाश, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया डॉ. सुरेश कुमार, क्रिस्टोफर बाउडेन, डॉ. काजवीन उमरीगर , शेखर कोलिपाका और दिलशेर खान ने अपने अनुभव साझा किए और गिद्ध संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

Related Articles

Back to top button