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क्रेस्ट ग्रीन सोसायटी में करंट से मौत, 6 माह से न्याय के लिए भटक रही विधवा

 

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राजधानी के कोटा स्थित क्रेस्ट ग्रीन सोसायटी में करंट लगने से एक मजदूर की मौत हो गई, लेकिन 6 माह बाद भी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। पीड़ित परिवार को न मुआवजा मिला और न ही किसी तरह की आर्थिक मदद। मृतक की पत्नी पिछले छह महीनों से न्याय के लिए दर-दर भटक रही है।

परिजनों ने सरस्वती नगर थाना से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक शिकायत की, लेकिन सोसायटी के पदाधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मृतक ही परिवार का एकमात्र कमाने वाला था। उसके ऊपर बुजुर्ग मां, अविवाहित बहन और बेटे की जिम्मेदारी थी।

मृतक की पत्नी गायत्री ने बताया कि उनके पति एस. तूफान कोटा रोड स्थित क्रेस्ट ग्रीन सोसायटी में काम करते थे। 1 दिसंबर 2025 की सुबह वे रोज की तरह ड्यूटी पर गए थे। पेड़ की कटाई के लिए स्टोर रूम से लोहे की सीढ़ी लेकर जा रहे थे, तभी लटकते हाइटेंशन तार की चपेट में आ गए। करंट का जोरदार झटका लगने से वे दूर जा गिरे। उन्हें तुरंत पचपेड़ी नाका स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका उपचार किया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद उसकी मृत्यु हो गई। “जांच-पड़ताल में भास्कर के हाथ मृतक की मेडिकल फाइल लगी है, जिसमें घटना का स्पष्ट और विस्तृत उल्लेख है।”

गायत्री ने कहा कि घटना के बाद सोसायटी के अध्यक्ष विनय अग्रवाल, उपाध्यक्ष शंकर बजाज और पदाधिकारी योगेश अग्रवाल, विशाल अग्रवाल, अनिल अग्रवाल और महेंद्र तलरेजा ने 20 लाख रुपए मुआवजा देने का आश्वासन दिया था। साथ ही दबाव बनाकर एफआईआर और पोस्टमार्टम न कराने की बात कही। हम लोग उनकी बातों में आ गए और बिना पोस्टमार्टम कराए ही अंतिम संस्कार कर दिया। अब सोसायटी के दोनों पदाधिकारी मुआवजा देने से मुकर रहे हैं और किसी तरह की मदद नहीं कर रहे।

मृतक की पत्नी का आरोप है कि सोसायटी के पदाधिका​री के खिलाफ पहले भी पुलिस में शिकायतें हैं। योगेश अग्रवाल के खिलाफ पूर्व में भी जुआ खेलते पकड़ाए जाने के मामले में कार्रवाई हो चुकी है। विनय अग्रवाल के बारे में आरोप है कि उसकी आपराधिक प्रवृत्ति रही है। सूरजपुर के एक युवक ने आत्महत्या से पूर्व लिखे पत्र में उसके नाम का उल्लेख किया था।

पुलिस का तर्क: जांच जारी, पीएम रिपोर्ट नहीं होने से दिक्कत

सरस्वती नगर थाना प्रभारी अजीत सिंह राजपूत के अनुसार, परिजनों की शिकायत पर जांच शुरू की गई है। बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के एफआईआर दर्ज करने में तकनीकी दिक्कत आ रही है। यह हादसे में मौत का मामला है, जिसमें पोस्टमार्टम जरूरी था। इसी प्रकार बयान एडिशनल डीसीपी राहुल देव शर्मा का है। उन्होंने कहा कि मौत की वजह जब तक पता नहीं चलेगी, एफआईआर मुश्किल है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही इसका प्रमुख आधार होती है। फिर भी एक्सपर्ट की मदद से पुलिस ने जांच प्रारंभ कर दी है।

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