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रायपुर रेल मंडल के तीन फैसले, तीनों हुए फेल…:कंबल नहीं दे पाए, जनता दरबार और टीटीई की जांच बंद

 

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रायपुर रेल मंडल ने यात्री सुविधाओं में विस्तार के लिए पिछले एक साल में कई तरह की योजनाएं शुरू की। लेकिन बिना किसी ठोस प्लानिंग और उसे लागू करने में आने वाली परेशानी को ध्यान नहीं देने के कारण ये घोषणाएं ठंडे बस्ते में चली गई।

रेलवे ने एसी कोच की तरह स्लीपर कोच में सफर करने वाले यात्रियों को चादर-कंबल की सुविधा देने की घोषणा की, टेंडर निकला, एजेंसी भी तय कर ली, लेकिन इसका लाभ यात्रियों को नहीं दे पाए।

इसी तरह टीटीई शराब के नशे में तो नहीं हैं, इसकी जांच शुरू की, लेकिन यह भी बंद हो गया। स्टेशन में यात्रियों और कर्मचारियों की समस्याओं के निवारण के लिए जनता दरबार लगाने का फैसला लिया, लेकिन इसे भी लागू नहीं कर पाए। हालांकि रेलवे के अफसर लगातार यह कह रहे हैं कि तकनीकी खामियों के चलते ये योजनाएं अब तक शुरू नहीं हो पाई और जल्द ही इसे शुरू कर लिया जाएगा।

योजना-1 सप्ताह में एक दिन लगना था जनता दरबार

रेलवे ने यात्रियों और कर्मचारियों की शिकायतें सीधे सुनने के लिए स्टेशन परिसर में जनता दरबार लगाने की घोषणा की थी। इसके तहत सप्ताह में एक दिन वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में शिकायतों और सुझावों पर चर्चा करने की योजना बनाई गई थी।

कब शुरू किया: स्टेशन पर 9 अप्रैल 2025

क्यों फेल हुई योजना : अफसर ने दावा किया कि सीधे यात्रियों से वे कनेक्ट हो गए हैं और उन तक शिकायतें पहुंच रही हैं।

योजना-2 स्लीपर के यात्रियों को नहीं दे पाए बेडरोल

रेलवे ने एसी कोच की तर्ज पर स्लीपर यात्रियों को बेडरोल उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी और इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर ली थी। लेकिन कोच में बेडरोल रखने के लिए दो बर्थ हटाने तथा अन्य जोनों से अनुमति नहीं मिलने के कारण योजना अटक गई।

कब शुरू किया: 25 फरवरी को टेंडर फाइनल हुआ

क्यों फेल हुई योजना : बेडसीट के लिए ट्रेन में 60 दिन पहले सीट ब्लॉक करना पड़ेगा। लेकिन रायपुर मंडल के अफसरों ने बिना दूसरे जोन के तालमेल के ही निर्णय ले लिया। दूसरे जोन से सीट ब्लॉक कराने में परेशानी आ रही है।

योजना-3 टीटीई का होना था एल्कोहल टेस्ट

मंडल के टीटीई शराब पीकर तो ड्यूटी नहीं कर रहे हैं, इसकी जांच के लिए रायपुर स्टेशन में ब्रीथ एनालाइजर मशीन लगाकर ट्रायल शुरू किया गया था। रेलवे ने दावा किया था कि विमान के केबिन क्रू की तरह टीटीई भी ड्यूटी पर जाने और लौटने से पहले जांच से गुजरेंगे। वर्तमान में जांच की प्रक्रिया बंद हो गई है।

कब शुरू किया: 6 सितंबर 2025

क्यों फेल हुई योजना : शुरूआत में टीटीई कक्ष में इसका ट्रायल लिया गया। लेकिन अचानक से तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए इस बंद कर दिया गया।

तीनों फैसलों को जल्द ही लागू किए जाएंगे

Q. स्लीपर कोच में यात्रियों को बेडरोल देने की योजना बनाई, लेकिन शुरू नहीं कर पाए? – नार्दन रेलवे से अभी तक अनुमति नहीं मिली है। बाकी अन्य ट्रेनों की मंजूरी मिल गई है। जल्द ही यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।

Q. यात्रियों और कर्मचारियों की शिकायत सुनने लगने वाला जनता दरबार भी बंद हो गया? – जनता दरबार में बहुत से लोग नहीं आते थे। इसलिए अफसर स्टेशन पर ही यात्रियों से मिलकर उनकी समस्याओं का निराकरण कर रहे।

Q. टीटीई का एल्कोहल टेस्ट करना था, वो भी बंद है? – ट्रायल हो गया है, लेकिन बजट अप्रूवल नहीं मिला है। मंजूरी मिलते ही शुरू करेंगे।

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