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मासूम की चीखों ने किया एकजुट…:गढ़िया पहाड़ पर 20 घंटे पत्थरों के बीच फंसे शावक की पुकार सुन दौड़े भालू, खुद पत्थर खिसकाकर उसे निकाला

 

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गढ़िया पहाड़ की खामोश रात में एक मासूम भालू शावक की दर्दभरी चीखें लगातार गूंजती रहीं। पत्थरों के बीच फंसा वह मदद के लिए पुकारता रहा, लेकिन वन विभाग का अमला वहां नहीं पहुंच सका।

आखिरकार उसकी आवाज सुनकर जंगल के दूसरे भालू पहुंचे और इंसानों की जगह खुद ‘रेस्क्यू टीम’ बन गए। पूरी रात पत्थर हटाने की कोशिश के बाद उन्होंने शावक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। कांकेर की यह घटना जंगल के जीवों के बीच संवेदना और अपनत्व की अनोखी मिसाल बन गई। गर्मी बढ़ने के साथ शाम होते ही शहर के आसपास लगातार भालू व तेंदुआ दिखाई दे रहे हैं।

सोमवार, 18 मई की शाम कुछ भालू राजापारा इलाके के गढ़िया पहाड़ में विचरण करते दिखे। इसके बाद रात में एक भालू के चीखने की आवाज आई। सामान्य दिनों में भी भालू की आवाजें आती हैं। इस कारण किसी ने ध्यान नहीं दिया। जब चीखने की आवाज तेज हुई तो पहाड़ के नीचे रहने वालों का ध्यान गया। भालू के हमले के डर कोई भी उस ओर नहीं गया।

इस बारे में सूचना वन विभाग को दी गई। खबर मिलते ही विभाग का अमला मौके पर पहुंचा। उसने भालू की तलाश शुरू की। पहाड़ में वन अमले को आवाज सुनाई दी। शावक नहीं दिखा। वन विभाग ने ड्रोन की भी मदद ली। फंसा हुआ शावक नजर नहीं आया। इधर शावक की चीखें सुनकर कुछ लोग वहां तक पहुंचे।

उन्होंने उसकी फोटो भी ली। इसके बाद सुबह से भालू घटनास्थल तक जाने लगे। 19 मई की सुबह से शाम तक भालुओं के आने-जाने का दौर चलता रहा। इसके बाद रात में पत्थर हटने की आवाज आई। भालू की आवाज आनी बंद हो गई। फायर वाचर सुनील यादव ने बताया कि कुछ भालू उस ओर गए थे। इसके बाद पत्थर हटने की आवाज आई। संभवत: भालुओं ने अपनी ताकत से पत्थर हटाए। उन्होंने फंसे हुए शावक को बाहर निकाला।

भालू कर सकता था हमला : रेंजर कांकेर अमितेष परिहार ने कहा कि अल सुबह भालू के पत्थरों में फंसने की जानकारी मिल गई थी। स्टाफ वहां गया था। ड्रोन का सहारा लिया गया। भालू नहीं दिखा। भालू अपने नैचुरल हैबिटेट (प्राकृतिक आवास) में था। इस स्थिति में वहां जाने पर भालू कौतूहलवश हमला कर सकता था। रात में वह स्वयं सुरक्षित निकल गया।

मादा भालू शावक के लिए कुछ भी कर सकती है

जंगली जानवरों में मादा जानवर का अपने बच्चे के प्रति काफी प्रेम होता है। इनमें सबसे अधिक डेडली कॉम्बिनेशन (घातक संयोजन) मादा भालू का अपने शावक के साथ होता है। वह अपने शावक को बचाने के लिए कुछ भी कर सकती है। कांकेर में यदि ऐसी स्थिति बनी है तो उम्मीद है कि शावक को निकालने के लिए मादा भालू ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी होगी।

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