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टैक्सी से जबलपुर एयरपोर्ट जाने के लिए दोगुना लगता है किराया, यात्री हो रहे परेशान

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जबलपुर। एयरपोर्ट में यात्री सुविधाओं में सुधार हो रहा है। सर्वे में रैंक सातवें पायदान पर आ गई है, लेकिन टैक्सी सुविधा को लेकर यात्रियों की परेशानी कम नहीं हो रही। पुलिस ने यात्री फीडबैक से लेकर शिकायत नंबर तक जारी किए, परंतु टैक्सी माफिया की मनमानी नहीं थमी।
निजी टैक्सी संचालकों की तुलना में ओला, ऊबर व रैपिडो का किराया कम है। परंतु एयरपोर्ट में सक्रिय टैक्सी माफिया कम दर पर उपलब्ध सुविधा की राह में रोड़ा बन गए हैं। किसी अन्य टैक्सी के एयरपोर्ट में प्रवेश करने पर ये टैक्सी माफिया चालक के साथ मारपीट पर उतारू हो जाते हैं
अघोषित रूप से एयरपोर्ट में प्रतिबंध है
यही कारण है कि इन कंपनियों से जुड़े चालक एयरपोर्ट के लिए टैक्सी सुविधा यात्रियों को नहीं दे पा रहे हैं। पुलिस, परिवहन विभाग, एयरपोर्ट प्रशासन की सख्ती के बाद भी टैक्सी सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के वाहन अघोषित रूप से एयरपोर्ट में प्रतिबंध हैं।
एयरपोर्ट के लिए जाने वाले यात्री संजय सिन्हा ने इंटरनेट मीडिया में एक बार फिर पैसेंजर के दर्द को बयां किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि टैक्सी माफिया की मनमानी पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। उन्होंने बकायदा टैक्सी सर्विस प्रोवाइडर के स्क्रीन शॉट दिखाया, जिसमें शहर से एयरपोर्ट का किराया 278 रुपये दिखा रहा था, लेकिन टैक्सी चालक जब बात कर रहे थे वो 800 रुपये किराया मांग रहे थे।
एयरपोर्ट के भीतर से सवारी बैठाना संभव नहीं
जब उनसे दोगुने से ज्यादा किराया के लिए पूछा गया तो सभी ने कहा कि एयरपोर्ट के भीतर से सवारी बैठाना संभव नहीं होता है। इसलिए वहां से खाली ही गाड़ी वापस लौटती है। यदि गलती से भी सवारी एयरपोर्ट से बैठाने का प्रयास किया तो स्थानीय टैक्सी चालक मारपीट करते हैं।
संजय सिन्हा ने इस बात का जिक्र करते हुए कहा कि एयरपोर्ट के टैक्सी संचालकों की मनमानी पर कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है। इससे पहले भी संजय सिन्हा ने एयरपोर्ट से शहर आने के लिए टैक्सी संचालकों की मनमानी को लेकर इंटरनेट मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखी थी। उस वक्त वे इंदौर से जबलपुर विमान से आए थे।
तय किराया से ज्यादा मांगा जाता है
एयरपोर्ट पर संचालित प्री पेड टैक्सी काउंटर है। यहां भी तय किराया से ज्यादा मांगा जाता है। यात्री ने एयरपोर्ट से रामपुर चौक तक का किराया पूछा तो 1150 रुपये बताया गया था। उस समय जब काउंटर पर बैठी युवती से यात्री ने ओला, उबर और रैपिडो सेवा की जानकारी मांगी तो युवती ने साफ कहा कि इन सभी को एयरपोर्ट के भीतर आने की अनुमति नहीं है।
इसके बाद यात्री ने जब उबर पर किराया जांचा तो पता चला कि किराया 539 रुपये और ओला में 483 रुपये बताया था। वहीं रैपिडो में किराया 389 था।
पीटते हैं टैक्सी चालक को
टैक्सी चालक ने यात्री को बताया कि यदि सवारी एयरपोर्ट के अंदर से ली तो टैक्सी चालक को यहां के स्थानीय टैक्सी चालक मिलकर पीटते हैं। उनके भय की वजह से कोई भी गाड़ी वाला यहां आना नहीं चाहता है। यात्री ने अपने कड़वे अनुभव इंटरनेट में साझा करते हुए लिखा कि यह साफ है कि एयरपोर्ट में टैक्सी माफिया की खुली लूट चल रही है।


