महिलाओं के नाम पर 26 करोड़ का प्रोजेक्ट:न रोजगार मिला, न ही छत; 15 करोड़ की गारमेंट फैक्ट्री, 11 करोड़ का वर्किंग वुमन हॉस्टल, दोनों बंद

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
नगर निगम ने शहर की महिलाओं को रोजगार देने के नाम पर मोवा में गारमेंट फैक्ट्री तैयार किया। करीब 15 करोड़ की लागत से दो साल पहले ही यह गारमेंट फैक्ट्री बनकर तैयार तो हो गई, लेकिन आज तक इसका संचालन शुरू नहीं हो पाया। नतीजा, फैक्ट्री बनने के बाद भी महिलाओं को रोजगार नहीं मिल पाया।
इसी तरह फुंडहर में कामकाजी महिलाओं के लिए 4 मंजिला हॉस्टल तैयार किया गया। 11 करोड़ खर्च कर बनाया गया यह हॉस्टल पिछले चार साल से खाली पड़ा था, लेकिन अब इसे योग आयोग को कार्यालय के लिए किराए पर दे दिया गया।
इतना ही नहीं इन दो प्रोजेक्ट के संचालन पर ध्यान देना छोड़ शहर की नई सरकार महिलाओं के लिए फिर से नई सुविधाएं विकसित करने का प्लान कर रही है। इसके लिए बजट में बाकायदा प्रावधान भी किया गया है। नगर सरकार फिर से शहर के बीच में वर्किंग वुमन हॉस्टल का निर्माण करने जा रही है और इसके लिए करीब 5 करोड़ का बजट रखा गया है।
पीपीपी मॉडल में चलानी थी फैक्ट्री
नगर निगम ने मोवा में 2000 महिलाओं को रोजगार देने के लिए गारमेंट फैक्ट्री बनाने का प्लान किया। इसके लिए करीब 15 करोड़ रुपए खर्च किए गए। यहां 2000 सिलाई मशीन के माध्यम से महिलाओं को रोजगार देने की योजना थी। इसके लिए करीब 2 एकड़ में भवन और शेड तैयार किया गया।
साल 2024 में ही इसका निर्माण कार्य भी पूरा हो गया, लेकिन संचालन के लिए अब तक एजेंसी ही निर्धारित नहीं हो पाई। निगम ने इसे पीपीपी मॉडल पर संचालित करने का प्लान बनाया था, लेकिन कोई भी संस्थान सामने नहीं आया। इसके चलते महिलाओं को न तो रोजगार मिला और न ही भवन का कोई उपयोग हुआ।
वर्किंग वुमन हॉस्टल दे दिया किराए पर
फुंडहर में करीब 11 करोड़ की लागत से वर्किंग वुमन हास्टल बनाया गया। साल 2019 में 124 फ्लैट वाला हॉस्टल बनकर तैयार हो गया, लेकिन शहर से आउटर होने और सुरक्षा वजहों से यहां रहने के लिए महिलाएं ही नहीं आईं। लिहाजा भवन खाली रहा। 2020 में कोरोना काल में शासन ने इसे अस्थायी अस्पताल और कोविड सेंटर बना दिया।
दो साल यहां कोविड की गतिविधियां चलती रहीं। कोविड काल के बाद भी दूरी और सुरक्षा वजहों से महिलाएं नहीं आईं। इसलिए 2022 में निगम ने इस भवन को किराए पर योग आयोग को कार्यालय के लिए दे दिया।
ऐसे ही नए प्रोजेक्ट ला रहे
महिला शांति गृह: 2026-27 के बजट में नगर निगम ने मध्यम वर्ग की महिलाओं के मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से महिला शांति गृह बनाने का प्रावधान रखा है। इसके लिए 5 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है।
पंडरी और नरैया तालाब में हॉस्टल: अब पंडरी और नरैया तालाब के पास वर्किंग वुमन हॉस्टल का निर्माण किया जा रहा है। नरैया तालाब के पास इसका निर्माण लगभग हो गया है और वर्तमान में फिनिशिंग का काम किया जा रहा है।
सीधी बात – मीनल चौबे, महापौर, नगर निगम, रायपुर
महिला समूह को संचालन के लिए देंगे
गार्मेंट फैक्ट्री चला नहीं, हॉस्टल भी अनुपयोगी है? – पूर्व सरकार में इसका टेंडर हुआ था, लेकिन संचालन नहीं हुआ। हॉस्टल में महिलाएं नहीं आई, इसलिए किराए पर दिया गया है।
इसके संचालन के लिए आपके पास कोई प्लान है क्या? – इसे महिला समूह द्वारा संचालित करके महिलाओं को रोजगार दिलाने का इरादा है। इस पर जल्द ही शासन स्तर पर चर्चा करेंगे।
पुराने प्रोजेक्ट सफल नहीं हुए, फिर से नए प्रोजेक्ट ला रहे हैं? – पहले बिना किसी प्लानिंग के प्रोजेक्ट पर पैसा खर्च किया गया। हमने अधिकारियों को विस्तृत प्लान बनाने कहा है।



