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अखाड़ों में शुद्धिकरण की तैयारी, फर्जी बाबाओं को जेल भेजेगी अखाड़ा परिषद, ऑपरेशन कालनेमि शुरू

 

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उज्जैन: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने सनातन धर्म की छवि बिगाड़ने वाले फर्जी साधुओं के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ दी है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी महाराज ने कालनेमि अभियान चलाने का ऐलान किया है। इस मुहिम के तहत उन लोगों को अखाड़ों और संत समाज से बाहर किया जाएगा, जो भगवा चोला पहनकर मर्यादाएं तोड़ रहे हैं। परिषद ने साफ कर दिया है कि साधु का काम जप-तप करना है, गृहस्थ जीवन जीना या परिवार पालना नहीं।

ID कार्ड और आधार के बिना अखाड़ों में नो एंट्री

आगामी सिंहस्थ महाकुंभ की पवित्रता बनाए रखने के लिए अब सुरक्षा और पहचान के कड़े नियम लागू होंगे। महंत रविंद्रपुरी के मुताबिक, अब हर भगवाधारी को अपनी पहचान साबित करनी होगी। सिंहस्थ में आने वाले हर साधु के पास अपना आधार कार्ड होना जरूरी होगा। महंत ने यह भी कहा कि संबंधित अखाड़े द्वारा जारी किया गया आधिकारिक पहचान पत्र साथ रखना होगा। बिना पहचान वाले संदिग्ध लोगों की जांच होगी और दोषी पाए जाने पर उन्हें सीधे जेल भेजा जाएगा।

उज्जैन के हालिया विवाद ने बढ़ाई सख्ती

पिछले कुछ दिनों से उज्जैन में साधु-संतों के बीच चल रहे विवादों ने इस फैसले की नींव रखी है। एक साध्वी और उसके सहयोगी द्वारा एक महामंडलेश्वर को दुष्कर्म के झूठे केस में फंसाने की कोशिश ने पूरे संत समाज की छवि को नुकसान पहुंचाया है। महंत रविंद्रपुरी ने इसे भगवा की छिछालेदर करार देते हुए कहा कि अब समुद्र मंथन का समय आ गया है।

क्या है कालनेमि अभियान?

रामायण काल में कालनेमि वह राक्षस था जिसने साधु का वेश धरकर हनुमान जी को रोकने की कोशिश की थी। अखाड़ा परिषद इसी संदर्भ का उपयोग कर उन लोगों को चिन्हित कर रही है जो संत के रूप में समाज को भ्रमित कर रहे हैं। 2028 के उज्जैन सिंहस्थ से पहले यह कदम अखाड़ों के आंतरिक ढांचे को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

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