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अंबेडकर में डॉक्टर तक पहुंचने में लगे 3 घंटे; डीकेएस में एक्सरे-रिपोर्ट में देरी

 

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राजधानी के बड़े सरकारी अस्पतालों में इलाज से ज्यादा समय मरीजों को कतारों में बिताना पड़ रहा है। डीकेएस और अंबेडकर अस्पताल की ग्राउंड रिपोर्ट में पर्ची, जांच और रिपोर्ट तक लंबा इंतजार सामने आया। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि मरीज इलाज से ज्यादा समय कतारों में खड़ा रहता है।

पर्ची, डॉक्टर, जांच और रिपोर्ट हर स्तर पर लंबा इंतजार है। गर्मी और भीड़ के बीच मरीज की स्थिति और बिगड़ती है। अस्पतालों में एक्सरे तो हो जाता है, लेकिन एमआरआई, सोनोग्राफी और सीटी स्कैन के लिए अगले दिन या लंबी तारीख दी जाती है। इससे इलाज शुरू होने में देरी होती है।

अंबेडकर अस्पताल में सुबह 9:30 बजे पहुंचने पर भारी भीड़ मिली। आधे घंटे बाद पर्ची बनी, जो निशुल्क थी। इसके बाद 50 नंबर काउंटर, फिर सील और फिर डॉक्टर के लिए लंबी कतार का सामना करना पड़ा। करीब 11 बजे डॉक्टर ने एक्सरे कराने कहा। एक्सरे विभाग में फिर बिलिंग और कमरे बदलने की प्रक्रिया चली।

11:30 बजे के बाद एक्सरे के लिए 21 नंबर कमरे में भेजा गया, जहां फिर इंतजार करना पड़ा। सुबह 9:30 से शुरू हुआ यह पूरा प्रोसेस दोपहर 1 बजे एक्सरे तक पहुंचा। रिपोर्ट के लिए डॉक्टर के पास जाने पर पता चला कि रिपोर्ट मोबाइल पर अपलोड नहीं हुई है। जांच में सामने आया कि स्टाफ ने नाम गलत दर्ज कर दिया था। सुधार के बाद ही रिपोर्ट मिली और दवा लिखी गई।

डीकेएस अस्पताल: डीकेएस अस्पताल में न्यूरो मरीज को सबसे पहले पर्ची के लिए ही एक घंटे तक कतार में खड़ा रहना पड़ा। सुबह 10 बजे पहुंचने के बाद 11 बजे पर्ची बन पाई। इस दौरान एसी बंद थी, कूलर भी गर्मी में बेअसर रहे और मरीज-परिजन पसीने से तर रहे।

पर्ची के बाद डॉक्टर के कमरे के बाहर दो घंटे का इंतजार करना पड़ा। करीब 1 बजे नंबर आया। मरीज ने हाथ में झुनझुनी, गर्दन से पीठ और कमर तक दर्द की शिकायत बताई। डॉक्टर ने एमआरआई कराने कहा, लेकिन बिलिंग के बाद जानकारी मिली कि एमआरआई के लिए अगले दिन आना होगा। इस पर एक मरीज ने कहा कि इससे अच्छा निजी अस्पताल चले जाते।

अस्पतालों में भीड़ ज्यादा, इसलिए लगता है समय अंबेडकर अस्पताल में रोजाना ढाई से तीन हजार की ओपीडी रहती है। भीड़ ज्यादा होने से इलाज में कुछ समय लगता है। लेकिन पहले की अपेक्षा जांच और अन्य इलाज में अभी तेजी आई है। सभी मरीजों को समय पर इलाज मिले, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। -डॉ. संतोष सोनकर, अंबेडकर

समय तो लगता ही है… डीकेएस में गंभीर मरीज इलाज के लिए आते हैं। उन्हें देखने में समय भी लगता है। जहां तक जांच की बात है, भर्ती और ओपीडी दोनों मरीजों की जांच होती है, इसलिए थोड़ा समय लगता है। हमारी कोशिश रहती है कि मरीजों को त्वरित इलाज मिले।

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