छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ‘कस्टडी के एवरग्रीनिंग’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में मुख्य आरोपियों में से एक कारोबारी अनवर ढेबर की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान “कस्टडी के एवरग्रीनिंग” यानी आरोपी को लगातार जेल में बनाए रखने के लिए नए-नए मामले दर्ज करने की संभावित प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की. अदालत ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब आरोपी पिछले मामलों में जमानत पाने के बेहद करीब होता है, ठीक उसी चरण में उसके खिलाफ नई प्राथमिकी (FIR) क्यों दर्ज कर ली जाती है. पीठ ने टिप्पणी की कि यद्यपि नवीनतम कार्रवाई एक अलग प्राथमिकी से जुड़ी है, लेकिन जांच एजेंसी को वर्ष 2023 से ही अनवर ढेबर की कथित संलिप्तता की जानकारी थी, फिर भी नए मामले में गिरफ्तारी या कार्रवाई के लिए इतना इंतजार क्यों किया गया.शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी मुख्य चिंता यह जांचना है कि क्या आरोपी को लगातार न्यायिक हिरासत में रखने के उद्देश्य से क्रमिक मुकदमों का सहारा लिया जा रहा है, ताकि पुराने मामलों में जमानत का अधिकार मिलने के बाद भी उसकी रिहाई को रोका जा सके.

पूर्व रायपुर महापौर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) द्वारा वर्ष 2019 से 2022 के बीच राज्य में एक अवैध शराब सिंडिकेट चलाकर सैकड़ों करोड़ रुपये के घोटाले और अवैध कमीशनखोरी का मुख्य षड्यंत्रकारी होने का आरोप है. अदालत में ढेबर का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि उनके मुवक्किल पहले ही लगभग ढाई साल हिरासत में बिता चुके हैं. उन्होंने तर्क दिया कि हर बार जब भी आरोपी जमानत का हकदार बनता है, तब एक नया आपराधिक मामला सामने लाकर रिहाई के आदेशों को व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी कर दिया जाता है. उन्होंने गुहार लगाई कि लगातार नए मामले दर्ज करके हिरासत को आगे बढ़ाने के इस चक्र को अब समाप्त किया जाना चाहिए.
दूसरी ओर, राज्य सरकार के वकील ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान कार्रवाई एक पूरी तरह से स्वतंत्र जांच पर आधारित है और इसका मकसद हिरासत को बढ़ाना नहीं है. राज्य ने अदालत को बताया कि चार साल से फरार चल रहे एक अन्य मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है. सरकार के अनुसार, इस मामले में 300 से 400 करोड़ रुपये की संपत्तियों की कुर्की और लगभग 1,000 करोड़ रुपये के नकद लेनदेन के तार जुड़े हुए हैं. राज्य ने जांच पूरी करने और अंतिम पूरक आरोप पत्र दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा. हालांकि, अदालत ने सवाल उठाया कि जब आरोपी जेल में उपलब्ध था, तो उससे पहले पूछताछ क्यों नहीं की गई. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने का अंतिम अवसर देते हुए मामले की अगली सुनवाई स्थगित कर दी है.



