हूती विद्रोहियों ने यमन के राष्ट्रपति भवन पर मिसाइलें दागीं:15 दिन पहले भी यहां हमले में 4 मौतें हुई थी; सऊदी पर भी ड्रोन अटैक

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
यमन के हूती विद्रोहियों ने शुक्रवार को अदन में राष्ट्रपति भवन पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, यह साफ नहीं है कि मिसाइलें अपने निशाने पर लगीं या नहीं। न्यूज एजेंसी AFP के मुताबिक, राष्ट्रपति भवन की ओर एंबुलेंस जाते हुए देखी गईं। यमन सरकार के सैन्य प्रवक्ता ने बताया कि हूती विद्रोहियों ने अदन एयरपोर्ट पर भी बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। हालांकि, उन्होंने हमले में किसी के मारे जाने या घायल होने की जानकारी नहीं दी। राष्ट्रपति भवन पर 15 दिन में यह दूसरा हमला है। इससे पहले 15 अक्टूबर को हुए हमले में 4 लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के मदीना इलाके की ओर भी ड्रोन भेजा था। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने इसे हवा में ही मार गिराया।
अदन यमनी सरकार का हेडक्वार्टर
अदन यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का प्रमुख केंद्र है। हूती विद्रोहियों ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद सरकार को सना छोड़ना पड़ा था। जुलाई से अदन में हमले फिर बढ़े हैं। इससे पहले 28 अक्टूबर को भी हूती विद्रोहियों ने अदन एयरपोर्ट को निशाना बनाया था। हमले से पहले हूतियों ने लोगों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी थी। यह एयरपोर्ट दक्षिणी यमन में राहत सामग्री और मानवीय मदद पहुंचाने का अहम रास्ता है।
सऊदी का मक्का और मदीना में ड्रोन रोकने का दावा
सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने शुक्रवार को मदीना के ऊपर एक ड्रोन मार गिराने का दावा किया। इससे पहले गठबंधन मक्का में भी एक ड्रोन को नष्ट करने का दावा कर चुका है। मक्का में ग्रैंड मस्जिद और काबा हैं, जबकि मदीना में पैगंबर मोहम्मद की मस्जिद है। दोनों शहर मुसलमानों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में शामिल हैं। सऊदी अरब ने अक्टूबर में हूती विद्रोहियों पर मदीना के बिजली वितरण केंद्र पर हमला करने का आरोप लगाया था। यह केंद्र पैगंबर मोहम्मद की मस्जिद को बिजली की आपूर्ति करता है। हालांकि, हूतियों ने इस आरोप को खारिज कर दिया था। हूती मक्का और मदीना को निशाना बनाने से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि वे सऊदी अरब के सैन्य और तेल से जुड़े ठिकानों पर हमले करते हैं।
सऊदी अरब के समर्थन से लड़ रही यमन की सरकार
यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है। सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है। वह हूतियों के खिलाफ लड़ रही सरकारी सेना को हवाई मदद भी देता है। वहीं, ईरान पर हूतियों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं। राष्ट्रपति भवन परिसर पर हमले के बाद यमन में संघर्ष और तेज होने की आशंका है। हूतियों ने कहा है कि उन्होंने सऊदी सैन्य अभियान से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया था।
2015 से जारी है सऊदी और हूतियों की लड़ाई
- यमन में हूतियों ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब ने कई देशों के साथ मिलकर उनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया।
- सऊदी अरब चाहता था कि यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार दोबारा सत्ता में आए और हूतियों का कब्जा खत्म हो।
- इसके बाद कई साल तक यमन में हवाई हमले होते रहे। लेकिन हूतियों को पूरी तरह पीछे धकेलने में सऊदी गठबंधन कामयाब नहीं हो पाया।
- हूती अब भी यमन के बड़े हिस्से में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। उनकी लड़ाई का असर अब सऊदी अरब की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।
-
सऊदी अरब हूतियों को क्यों नहीं हरा पा रहा?
सऊदी अरब के पास आधुनिक लड़ाकू विमान और मिसाइलें हैं। अमेरिका भी उसे हथियार देता है। इसके बावजूद सऊदी अरब 2015 से हूतियों के खिलाफ जारी लड़ाई नहीं जीत पाया है। हूती आज भी यमन के बड़े हिस्से पर काबिज हैं और सऊदी अरब पर ड्रोन-मिसाइल हमले कर रहे हैं।हूतियों के सस्ते ड्रोन और मिसाइलों को रोकने के लिए सऊदी अरब को महंगी मिसाइलें दागनी पड़ती हैं। इससे उसका खर्च बढ़ता है।इसके अलावा, यमन का पहाड़ी इलाका भी बड़ी चुनौती है। यहां हूतियों के ठिकानों का पता लगाना मुश्किल है। उन्हें पूरी तरह हटाने के लिए जमीनी लड़ाई लड़नी पड़ सकती है, जिसमें सैनिकों के मारे जाने और युद्ध लंबा चलने का खतरा है।



