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बहुमंजिला ईमारतो के लिए बने कानून प्रकोष्ठ स्वामित्व अधिनियम 1976 बनने के 50 वर्षों के बाद भी अनुपालन ना होना गंभीर -आम आदमी पार्टी

 

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रायपुर, 12 जून 2026। आम आदमी पार्टी के मेहरबान सिंग, विजय झा और के. ज्योति आदि नेताओं द्वारा आयोजित प्रेसवार्ता में बताया गया कि छ.ग.को बने 26 वर्ष तथा प्रकोष्ठ स्वामित्व अधिनियम 1976 कानून के बनने के 50 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज दिनांक तक इसका अनुपालन छ.ग. में नही हो पाया। सहकारी संस्था छ.ग. शासन के पंजीयक श्री राजेन्द्र से जी एक सवाल है छ.ग. में जितनी भी बहुमंजिला ईमारते है उनमें फ्लैट तथा दुकान क्रेता उसके मालिक कैसे हुए,क्योंकि जिस जमीन पर अपार्टमेंट बना है वो जमीन तो आज भी बिल्डर के नाम पर है अगर कोई प्राकृतिक आपदा आए अपार्टमेंट / काम्पलेक्स गिर जाएं तो उसमें रहने वालों के हाथ में क्या है? वो तो हवा में थे तो क्या फ्लैट के दीवारों की रजिस्टी को आप मालिक होना मानते है? क्योंकि जमीन तो आज भी बिल्डर के नाम पर है जिस जमीन पर अपार्टमेंट / काम्पलेक्स बना है उसमें उनका कोई हिस्सा नही है तो फिर वो फ्लैट के मालिक कैसे हुए। कृप्या समझाए ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है क्योंकि सहकारी संस्थाए नामक गिरोह ने बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए सहकारी संस्थाए बनने ही नहीं दी,ताकि जींदगी भर बिल्डर फ्लैट क्रेताओं का शोषण करता रहे। और इन समस्यायों पर रेरा द्वारा प्रदेश के 600 बिल्डरों को जो नोटिस दिया गया है वह क्या दिखावा मात्र है?

बिलासपुर सी.जी प्लाजा काम्पलेकस के एक दुकानदार ने सहकारी समिति बनाने के लिए आवेदन किया तो जवाब मिला कि हमारे पर कमर्शियल बायलॉज नहीं है। पंजीयक महोदय आप आई.ए एस अधिकारी है कृप्या आप बताए कि व्यवसायिक उपविधिया / कमर्शियल बायलॉज नाम की कोई चीज होती है? नहीं तो फिर क्यों न माना जाए कि छ.ग. बनने से लेकर आज दिनांक तक सहकारी संस्थाए नामक गिरोह ने बिल्डरों लाभ लेने की लालसा में सहकारी समिति बनने नही दी।

दुर्ग हेमचंद युनिर्वसिटी के सामने छ.ग. गृह निर्माण मंडल का एक अपार्टमेंट है उस अपार्टमेंट में उपर मकान नीचे दुकान है वहां की एक क्रेता ने सहकारी समिति बनाने के लिए आवेदन किया, जिसमें उसको जवाब मिलता है कि मेहरबान सिंग नामक व्यक्ति की एक याचिका उच्च न्यायालय बिलासपुर में लंबित है उसके निराकरण होने तक सहकारी समिति बनना संभव नहीं है। जबकि छ.ग. गृह निर्माण मंडल सरकार की अपनी संस्था है तो क्या माना जाए कि सहकारी संस्था नामक गिरोह को पूरे छ.ग. स्तर पर सहकारी समिति न बनने देने के एवज में बिल्डरों से एक मोटी रकम मिलती होगी अन्यथा ऐसा क्या कारण है कि कानून को बने 50 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज दिनांक तक राज्य में इसका अनुपालन नहीं हो पाया। वहीं राजनांदगाव छ.ग. गृह निर्माण मंडल का परिवहन काम्पलेक्स के क्रेता ने सहकारी समिति बनाने का आवेदन दिया था और आज दिनांक तक सहकारी सिमिती नहीं बन पाई है? इसी सम्बन्ध में आम आदमी पार्टी के मेहरबान सिंग द्वारा राज्यपाल महोदय को पत्र लिखा गया है।

सरकार को और रेरा के अधिकारियों को इन सभी समस्यायों पर संज्ञान लेते हुए आम जनता के साथ हो रहे अन्याय का निराकरण कर इसे रोकना चाहिए।

 

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