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बढ़े बिजली बिल, स्मार्ट मीटर की तानाशाही और पानी की किल्लत से जनता बेहाल, सरकार तुरंत वापस ले जनविरोधी फैसले: मनोज सिंह ठाकुर

 

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रही बिजली दरों, भारी-भरकम टैरिफ और अब जबरन थोपे जा रहे स्मार्ट मीटरों ने आम जनता, किसानों और व्यापारियों का जीना मुहाल कर दिया है। चारों ओर से सामने आ रही जनता की परेशानियां और जन-आक्रोश यह साबित करता है कि बिजली विभाग और प्रशासन जमीनी हकीकत से पूरी तरह आंखें मूंदे बैठा है। इस जनविरोधी नीति, स्मार्ट मीटर की तानाशाही और शहर में व्याप्त जल संकट के खिलाफ मुखर होते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व श्रम कल्याण मंडल सदस्य (छत्तीसगढ़ शासन) एवं अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने सरकार और प्रशासन को आड़े हाथों लिया है।
​अपने जारी बयान में मनोज सिंह ठाकुर ने कहा कि, “छत्तीसगढ़ एक ऊर्जा सरप्लस (बिजली उत्पादक) राज्य है, इसके बावजूद यहाँ के नागरिकों को इतनी महंगी बिजली खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। सुरक्षा निधि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) के नाम पर और बढ़े हुए ऊंचे टैरिफ के कारण आम उपभोक्ताओं के जो बिजली बिल आ रहे हैं, उन्होंने घर का बजट पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है। एक तरफ जनता पहले से ही महंगाई से त्रस्त है, दूसरी तरफ बिजली बिलों के रूप में उन पर यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ लादना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।”
​स्मार्ट मीटर का कड़ा विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि, “प्रशासन द्वारा जनता पर जबरन थोपे जा रहे स्मार्ट मीटर किसी आपदा से कम नहीं हैं। इन मीटरों की तेज़ रफ़्तार और तकनीकी खामियों के कारण उपभोक्ताओं के बिल सीधे दोगुने-तिगुने आ रहे हैं। गरीब और मध्यम वर्ग के लोग यह समझ ही नहीं पा रहे हैं कि वे इतना भारी-भरकम भुगतान कैसे करें। बिना किसी ठोस जन-जागरूकता या पारदर्शिता के, इस तरह का तानाशाही पूर्ण फैसला तुरंत बंद होना चाहिए।”
​बिजली के साथ-साथ शहर में गहराते जल संकट और अव्यवस्था पर भी उन्होंने कड़ा विरोध जताया है। मनोज सिंह ठाकुर ने कहा कि, “बिजली और पानी जीवन की सबसे मूलभूत आवश्यकताएं हैं। रायपुर के कई क्षेत्रों और कॉलोनियों में नागरिकों को पर्याप्त और साफ पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। पानी की किल्लत और बिजली की लगातार आंख-मिचौली ने जनता का दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। प्रशासन एक तरफ मूलभूत सुविधाएं देने में नाकाम साबित हो रहा है, और दूसरी तरफ टैक्स व बिलों में बेतहाशा बढ़ोतरी कर रहा है।”
​उन्होंने प्रशासन और विद्युत मंडल को चेतावनी देते हुए प्रमुख रूप से ये मांगें रखी हैं:
​बिजली दरों में की गई अनुचित बढ़ोतरी और भारी टैरिफ को तुरंत वापस लिया जाए।
​तकनीकी विसंगतियों से भरे और उपभोक्ताओं को लूटने वाले स्मार्ट मीटर लगाने के फैसले पर तुरंत रोक लगाई जाए।
​उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बिजली बिलों में आ रही तकनीकी गड़बड़ियों को तत्काल सुधारा जाए।
​शहर के सभी वार्डों और प्रभावित क्षेत्रों में सुचारू व स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
​मनोज सिंह ठाकुर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार और संबंधित विभागों ने इस बिजली-पानी के दोहरे संकट और स्मार्ट मीटर की तानाशाही से जनता को जल्द राहत नहीं दी, तो आम नागरिकों के अधिकारों और जनहित के लिए सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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