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वनतारा से लाए गए जेब्रा के शावक की मौत:‘कोलिक पेन’ वायरस से था बीमार, 5 दिन से चल रहा था इलाज

 

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नवा रायपुर जंगल सफारी में 7 महीने के जेब्रा शावक की मौत हो गई, जिसे वनतारा से लाया गया था। वह पिछले पांच दिनों से ‘कोलिक पेन’ वायरस से संक्रमित था। जंगल सफारी के डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही थी, लेकिन गुरुवार को उसकी मौत हो गई।

मौत के बाद शावक का पोस्टमार्टम कराया गया। जांच के लिए उसके कुछ अंगों के नमूने सुरक्षित रखकर फ्रीजर में संरक्षित किए गए हैं। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

गुजरात से लाई गई थी नर-मादा जेब्रा की जोड़ी

जानकारी के अनुसार, साल 2025 में नर और मादा जेब्रा की एक जोड़ी राधे कृष्णा टेम्पल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट (वनतारा प्रोजेक्ट) से नवा रायपुर जंगल सफारी लाई गई थी। बाद में मादा जेब्रा ने इसी शावक को जन्म दिया था।

हालांकि, 16 मई 2025 को नर जेब्रा की सांप के काटने से मौत हो गई थी। इसके बाद से शावक अपनी मां के साथ ही रह रहा था। अब शावक की मौत के बाद जंगल सफारी में केवल मादा जेब्रा ही बची है।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जेब्रा सामाजिक स्वभाव के जानवर होते हैं और झुंड में रहना पसंद करते हैं। ऐसे में साथी और शावक दोनों को खोने के बाद मादा जेब्रा की मानसिक स्थिति और व्यवहार पर असर पड़ सकता है।

संक्रमण होने से मौत, पीएम रिपोर्ट का इंतजार

जंगल सफारी के डायरेक्टर तेजस शेखर ने बताया कि शावक को “कोलिक पेन” की समस्या थी और डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज में जुटी हुई थी। फिलहाल मौत के सही कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

क्या होता है कोलिक पेन ?

कोलिक पेन पेट दर्द से जुड़ी एक गंभीर समस्या होती है, जो खासतौर पर अश्व वंश के जानवरों जैसे जेब्रा, घोड़ा और खच्चर में देखने को मिलती है। बदलते मौसम के दौरान इन जानवरों में कोलिक पेन की समस्या तेजी से बढ़ जाती है।

पशु चिकित्सकों के अनुसार, यह बीमारी सामान्य दिखने के बावजूद काफी गंभीर हो सकती है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है। तापमान में बढ़ोतरी, पानी की कमी, चारे में अचानक बदलाव और पशुओं की अनियमित देखभाल इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।

2023 से अब तक 74 वन्य प्राणियों की मौत

नंदनवन जंगल सफारी में पिछले तीन सालों में वन्य प्राणियों की मौत को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जनवरी 2023 से जनवरी 2024 के बीच जंगल सफारी में 74 वन्य प्राणियों की मौत हुई थी। यह जानकारी विधानसभा में वन मंत्री के लिखित जवाब में सामने आई थी।

रायपुर के सेक्टर-39 में जंगल सफारी बना है।

320 हेक्टेयर में फैला है जंगल सफारी

जंगल सफारी नवा रायपुर के सेक्टर-39 में है और 320 हेक्टेयर में फैला है। सफारी क्षेत्र में अब तक पांच सफारी बनाए गए हैं। इनमें से टाइगर सफारी 20 हेक्टेयर में, भालू सफारी 20 हेक्टेयर में, शाकाहारी वन्यप्राणी सफारी 30 हेक्टेयर में, क्रोकोडाइल सफारी 9500 वर्गमीटर और लॉयन सफारी 20 हेक्टेयर में है।

130 एकड़ में खंडवा जलाशय फैला हुआ है। इस जंगल सफारी को भारत ही नहीं, बल्‍कि एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित जंगल सफारी कहा जाता है।

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