कांग्रेस बोली- भाजपा उद्योगपतियों की सरकार:बिजली दर बढ़ोतरी के खिलाफ मोर्चा, बिजली दफ्तर का घेराव किया, नगाड़ा बजाकर भी जताया विरोध

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छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी के विरोध में कांग्रेस प्रदर्शन कर रही है किया। रायपुर और बिलासपुर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बिजली विभाग के कार्यालय का घेराव कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही बिजली दरों में वृद्धि के विरोध में प्रतीकात्मक रूप से पुतला दहन भी किया।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि बढ़ी हुई बिजली दरों से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। वहीं, रायपुर के डंगनिया में कांग्रेस ने नगाड़ा बजाकर अपना विरोध दर्ज कराया। जिलाध्यक्ष कुमार मेनन ने कहा कि भाजपा की सरकार आम जनता को लूटने का काम कर रही है।
वहीं, बिलासपुर के कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने कहा कि भाजपा की यह सरकार उद्योगपतियों की सरकार है। उन्हें सब्सिडी और छूट दिया जाता है। सरकार आम जनता को लूट रही है। सदन मे भी इस मुद्दे को प्राथमिकता से उठाया जाएगा।
विकास उपाध्याय बोले- बढ़ोतरी के पीछे प्लानिंग
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि प्लानिंग के तहत बिजली दरों में बढ़ोतरी की जा रही है, क्योंकि उन्हें अडानी के स्मार्ट मीटर और सोलर पैनल लगाना है। चुनाव से पहले भाजपा ने जनता से कई वादे किए थे, लेकिन अब बिजली दरों में वृद्धि कर आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
जानिए कितनी बढ़ी हैं बिजली दरें
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों को मंजूरी दी है। इसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक महंगी होगी। वहीं, व्यावसायिक (कॉमर्शियल) उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है।
कृषि पंपों की बिजली दर में भी 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि आयोग ने बिजली कंपनी की ओर से प्रस्तावित 24 प्रतिशत वृद्धि को खारिज करते हुए औसतन 6.23 प्रतिशत बढ़ोतरी को ही मंजूरी दी है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू होंगी।
आयोग का दावा- 70 से 75% घरेलू उपभोक्ताओं पर असर सीमित
CSERC के सचिव सूर्य प्रकाश शुक्ला के अनुसार औसतन 40 से 42 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। घरेलू उपभोक्ताओं के निचले स्लैब में 30 पैसे और ऊपरी स्लैब में 50 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने बताया कि बिजली बिल हाफ योजना के तहत 400 यूनिट तक मासिक खपत वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक की छूट मिलती रहेगी। प्रदेश के 70 से 75 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ता इसी श्रेणी में आते हैं, इसलिए नई दरों का प्रभाव उन पर अपेक्षाकृत कम पड़ेगा।
आयोग के अनुसार, बिजली वितरण कंपनी को एक यूनिट बिजली उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में औसतन 7.13 रुपए खर्च हो रहे हैं, जबकि मौजूदा दरों के आधार पर उसे प्रति यूनिट 6.71 रुपए की आय हो रही है



