छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट ऑर्गेनाइजेशन ने मामले को गंभीरता से लिया, पत्रकार हित में उठाई आवाज।

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रायपुर। पत्रकारों के साथ पुलिस व्यवहार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पत्रकार सुजीत यादव ने आरोप लगाया है कि तेलीबांधा पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और वर्दी का धौंस दिखाया।
आरोप है कि घटना की शिकायत लेकर जब पत्रकार सुजीत यादव थाने पहुंचे तो वहां भी उनके साथ बदसलूकी की गई। इतना ही नहीं, उल्टा उन्हीं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई।
मामला सामने आने के बाद घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद पत्रकारों में नाराजगी बढ़ गई।
इसके बाद बड़ी संख्या में पत्रकार तेलीबांधा थाने पहुंचे और मामले में निष्पक्ष जांच व दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। बढ़ते विरोध के बाद उच्च अधिकारी को मौके पर पहुंचना पड़ा। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर तीन दिनों के भीतर उचित कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट ऑर्गेनाइजेशन ने लिया संज्ञान
छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट ऑर्गेनाइजेशन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष व्यास पाठक का कहना है कि यह केवल एक पत्रकार का मामला नहीं, बल्कि पूरे पत्रकार समाज के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा विषय है। यह गंभीर विषय है कि बिना जाँच किए पत्रकार का बिना पक्ष जाने कैसे एफ. आई. आर. कर दिया गया है कहां है पत्रकार सुरक्षा कानून क्या पुलिस को इतना भी पता नहीं है कि पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज करने पर उच्च अधिकारियों की टीम से जांच कराए जाने के बाद दोषी पाए जाने पर एफ आई आर होता है।
छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट ऑर्गेनाइजेशन के पदाधिकारियों ने कहा है कि यदि उचित समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो मामले को बड़े स्तर पर उठाया जाएगा और पत्रकार हित में आंदोलन की स्थिति भी बन सकती है।
इस दौरान पत्रकारों में मुख्य रूप से देवेश तिवारी, व्यास पाठक , शिव शंकर सोनपिपरे, विप्लव दत्ता आशीष कंठले और प्रफुल्ल ठाकुर , सुशांत गौतम , अभिनव सोनी, मयंक श्रीवास्तव,सुरेश साहू प्रकाश तिवारी, जयप्रकाश त्रिपाठी महेंद्र साहू, गगन देवगन, योगेश साहू ,सोनाली शर्मा सहित बड़ी संख्या में अन्य पत्रकार मौजूद रहे।
छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट ऑर्गेनाइजेशन के प्रदेश अध्यक्ष व्यास पाठक ने कहा कि पुलिस को अपने SOP (Standard Operating Procedure) का ध्यान रखना चाहिए। कानून व्यवस्था संभालने वाली संस्था से उम्मीद की जाती है कि वह पत्रकारों और आम नागरिकों के साथ नियमों व मर्यादा के अनुसार व्यवहार करे।
पत्रकारों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है, जब किसी पत्रकार के साथ पुलिस द्वारा कथित दुर्व्यवहार की बात सामने आई हो। ऐसे कई मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन कुछ ही मामले सार्वजनिक हो पाते हैं।


