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Breaking: ओला और जलवृष्टि से फसल नुकसानी का मुआवजा दें मुख्यमंत्री,रीवा जिले सहित संपूर्ण मध्य प्रदेश का तत्काल कराया जाए सर्वे-शिवानंद द्विवेदी

10 दिवस के अंदर प्रक्रिया पूर्ण कर किसानों को दिया जाए मुआवजा // गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य रखा जाए ₹5000 प्रति क्विंटल // सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने ओला और असमय जलवृष्टि से किसानों की टूटी कमर पर शिवराज सिंह चौहान से मात्र घोषणाओं तक ही सीमित न रहने की की अपील।

दिनांक 21 मार्च 2023 रीवा मध्य प्रदेश। देश प्रदेश के अन्नदाताओं पर एक बार पुनः प्रकृति कहर बनकर टूट पड़ी है। जीवन की रोजमर्रा की जरूरत पूरी करने के लिए जद्दोजहद करने वाले अन्नदाताओं पर प्रकृति भी नाराज लग रही है। सरकारें और कॉरपोरेट तो गरीब अन्नदाताओं का शोषण कर ही रहे हैं पर समय-समय पर प्राकृतिक आपदाएं भी रही सही कसर पूरी कर उन्हें बर्बाद कर देती हैं। हाल ही में पिछले दिनों रीवा संभाग सहित पूरे मध्यप्रदेश के कई जिलों में असमय ओलावृष्टि जलवृष्टि की वजह से लाखों हेक्टेयर की फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। सरसों चना मटर एवं तिलहन दलहन से लेकर आमतौर सर्वाधिक बोई जाने वाली गेहूं की फसल भी इस ओलावृष्टि और जलवृष्टि के प्रकोप में आ चुकी है और नष्ट हो गई है। किसान अपना माथा पकड़कर रो रहे हैं और उनके आंसू पोंछने के लिए घोषणावीर सरकारें मात्र घोषणाएं कर रही हैं। रीवा संभाग को ही देख लिया जाए तो अब तक जिला और संभाग के आला राजस्व अधिकारियों ने फसलों का निरीक्षण कर मुआवजा बनाने की कोई निर्देश जारी नहीं किए हैं। जब किसानों और गरीब अन्नदाताओं की बात आती है तो सब इंतजार करते हैं की कुछ दिन बाद मामला ठंडा पड़ जाएगा और सब भूल जाएंगे। लेकिन बड़ा सवाल यह है की कॉरपोरेट और कंपनियों को मोटा लोन और रकम माफ करने वाली सरकारें और बैंक आखिर किसानों की संवेदनाओं के साथ कब जुड़ेंगे? क्या हमेशा ही किसानों को इसी तरह से प्रताड़ित किया जाएगा जिसमें न तो उनकी फसल का सही दाम मिल पा रहा है और खाद बीज की महंगाई और लागत दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि कर रही है। ऐसे में सरकारों की किसानों की आय दुगनी करने की घोषणाएं किसानों के व्यय में चार गुना वृद्धि अवश्य बनकर रह जाती हैं। मतलब साफ जाहिर है की आय तो दोगुनी हुई नहीं और लागत 4 गुनी अवश्य बढ़ गई है। अब ऐसे में भला अन्नदाता अपने बाल-बच्चों को कैसे पाले और कैसे अपने घरों की व्यवस्था करें।

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स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश

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Breaking: पंचायत विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर समाजसेवियों ने कमिश्नर रीवा को सौंपा ज्ञापन

RTI कानून का पालन, सूचना आयोग के आदेशों की अवहेलना को लेकर सौंपा गया ज्ञापन// धारा 40/92 और धारा 89 के प्रकरणों और लंबित जांचों को लेकर सौंपा गया ज्ञापन// जिला पंचायत से लेकर जनपद पंचायत तक अंगद की तरह पांव जमाए बैठे मठाधीशों को हटाए जाने और जांच कराए जाने की माग को लेकर सोपा गया ज्ञापन//

 

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दिनांक 17 मार्च 2023 रीवा मध्य प्रदेश। जिला पंचायत रीवा से लेकर जनपद पंचायत और ग्राम पंचायतों तक फैले व्यापक स्तर के भ्रष्टाचार को लेकर एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी अधिवक्ता शिवेंद्र मिश्रा सामाजिक कार्यकर्ता अनिल उपकारी अधिवक्ता संजय श्रीवास्तव आर डी मिश्रा एवं लवकुश तिवारी एवं पीयूष पांडेय सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा कमिश्नर रीवा संभाग अनिल सुचारी को ज्ञापन सौंपते हुए 28 बिंदुओं पर तत्काल कार्यवाही की मांग की गई है।

गौरतलब है की पंचायत विभाग और ग्रामीण विकास के लिए एक लंबे अरसे से कार्य कर रहे एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी सहित अन्य उपस्थित कार्यकर्ताओं ने 28 बिंदुओं को लेकर कमिश्नर रीवा संभाग को ज्ञापन सौंपते हुए आरटीआई कानून की विधिसम्मत समायसीमा में पालना कराए जाने, मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 89, 40 और 92 के त्वरित और समयसीमा में कार्यवाही, वर्षों से लंबित पड़ी जांचों को समयसीमा में और जल्द पूरा किए जाने, लंबे समय से एक ही पद पर जमे हुए कर्मचारियों और अधिकारियों को हटाए जाने से लेकर व्यापक स्तर के कराधान घोटाले में फसी पंचायत सहित न्यायालय के प्रकरणों में उच्च न्यायालय सहित लोकायुक्त न्यायालय में नियुक्त किए गए अधिकारियों द्वारा समयसीमा पर जवाब प्रस्तुत किए जाने, एक बार जांच होने के बाद बार-बार निचले स्तर के कर्मचारियों इंजीनियर द्वारा जांच न कराए जाने बल्कि उच्चस्तरीय और जिला संभाग स्तरीय टीम द्वारा जांचे कराए जाने, जांचों में लीपापोती न किए किए जाने और मामलों के कोर्ट स्थगन हटाए जाने एवं ग्राम पंचायत में फर्जी मूल्यांकन और सत्यापन करने वाले उपयंत्री सहायक यांत्रियों पर कानूनी कार्यवाही किए जाने सहित कई मामलों पर तत्काल कार्यवाही किए जाने की माग की है।

ज्ञापन सौंपते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा है कि यदि जल्द से जल्द 28 बिंदुओं पर कार्यवाही नहीं की जाती है तो जिला पंचायत और कमिश्नर कार्यालय के समक्ष अनशन किया जाएगा जिसकी समस्त जवाबदेही शासन-प्रशासन की होगी। बताया गया है कि कमिश्नर रीवा संभाग अनिल सुचारी ने मामले पर तत्काल संज्ञान लेकर कार्यवाही किए जाने का आश्वासन दिया है।

स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश

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Breaking: सरकार डेटा बिल से आरटीआई कानून को खत्म न करे – शैलेश गांधी,141 वें राष्ट्रीय आरटीआई वेबीनार का हुआ आयोजन

डेटा बिल से आरटीआई कानून के खात्मे के विरोध में प्रयास जारी रखें - आत्मदीप। डेटा प्रोटक्शन बिल से आरटीआई कानून को बचाने के लिए कार्यकर्ताओं ने अब तक के अपने कार्यों का दिया गया ब्योरा।

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दिनांक 5 मार्च 2023 रीवा मध्य प्रदेश। सूचना के अधिकार कानून को डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटक्शन बिल 2022-23 के प्रस्तावित मसौदे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए देश के विभिन्न राज्यों के कार्यकर्ताओं ने कमर कस ली है। इस बीच जगह-जगह आरटीआई कानून की विशेषताओं की जानकारी देते हुए आरटीआई कार्यकर्ता और सामाजिक गणमान्य नागरिक निरंतर प्रयास जारी रखे हुए हैं।

दिनांक 5 मार्च 2023 को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आयोजित किए गए 141 वें राष्ट्रीय आरटीआई वेबीनार में इसी मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई जिसमें उपस्थित विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल आरटीआई कानून को गलत ढंग से संशोधित कर प्राइवेसी के नाम पर सामान्य जानकारी को भी रोकेगा और जो जानकारी आमजन और देश के नागरिकों को आज कुछ जद्दोजहद करके मिल भी जाया करती थी वह हमे नहीं मिल पाएगी।

डेटा बिल वर्तमान स्वरूप में आया तो राशन पेंशन और छोटी जानकारी प्राप्त करना होगा मुश्किल – शैलेश गांधी

इस बीच पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने बताया कि यदि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल अपने वर्तमान स्वरूप में लागू करवाया जाएगा तो इससे कई महत्वपूर्ण जानकारी जो अब तक वेबपोर्टल पर उपलब्ध रहती थी वह हमें प्राप्त नहीं हो पाएगी। आम नागरिकों को राशन, पेंशन से जुड़ी छोटी-मोटी जानकारी भी आसानी से नहीं मिल पाएगी और प्राइवेसी के नाम पर छुपाया जाएगा। उन्होंने कहा की बजट सेशन 2023 में केंद्र सरकार डेटा बिल पास करना चाह रही है परंतु देखना पड़ेगा कि कार्यकर्ताओं का विरोध संपूर्ण देशव्यापी स्तर पर जारी रहे और यदि यह कानून पास भी हो जाता है तो भी लड़ाई रुकनी नहीं चाहिए क्योंकि ट्रांसपेरेंसी अकाउंटेबिलिटी के बिना किसी भी लोकतांत्रिक देश है की कल्पना करना असंभव है।

प्रस्तावित डेटा बिल से आरटीआई कानून को खत्म करने की सरकार की मंशा सफल न हो पाए – आत्मदीप

उधर विशिष्ट अतिथि के तौर पर पधारे मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने भी बताया कि आरटीआई कानून देश को काफी मशक्कत के बाद मिला है जब राजस्थान से लेकर संपूर्ण राष्ट्र में देशव्यापी आंदोलन किया गया और इसमें वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ पत्रकारिता जगत की जानी-मानी हस्तियों ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि जिन कार्यकर्ताओं ने आरटीआई कानून के पक्ष में अपनी बात सरकार तक पहुंचा दी है वह भी और साथ में जिन्होंने अभी तक इस विषय पर सरकार को लेख नहीं किया है सभी मिलकर पुनः नए सिरे से प्रयास करें और जब तक डेटा प्रोटेक्शन बिल पास नहीं हो जाता तब तक अपना प्रयास जारी रखें।
इस बीच आत्मदीप ने उपस्थित प्रतिभागियों से सवाल जवाब किए और जानना चाहा की किन-किन प्रतिभागियों ने अब तक सरकार के समक्ष लिखित में अथवा ऑनलाइन माध्यम से आपत्ति दर्ज कराई है।
और जिन्होंने आपत्ति नहीं दर्ज कराई है वह आगे दर्ज कराएं।

150 वें आरटीआई वेबीनार की बनाई जा रही रूपरेखा

इस बीच कार्यक्रम में सोशल एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी द्वारा बताया गया कि 150 वां राष्ट्रीय स्तर का आरटीआई वेबीनार बहुत ही जल्द होने वाला है। इस विषय पर उन्होंने उपस्थित सूचना आयुक्तगणों एवं समस्त कार्यकर्ताओं से विषय विशेषज्ञता के अनुसार सुझाव आमंत्रित किए हैं। 150 वें राष्ट्रीय स्तर के वेबिनार को कैसे मूर्त रूप दिया जाकर बेहतर बनाया जाय जाए इस विषय पर प्रयास चल रहे हैं।

कार्यक्रम में उत्तराखंड से आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने भी अपने विचार रखे वहीं मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा ने भी बताया कि बहुत जल्द मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के बार काउंसिल के अध्यक्ष भी मीटिंग में सम्मिलित होकर इस विषय पर अपने विचार रखेंगे। कार्यक्रम में जयपाल सिंह खींची, मेघराज सिंह, सोनी नरेश कुमार सैनी, ललित सोनी, सुरेश मौर्य, राहुल रॉय, आशीष नारायण विश्वास, सागर से धनीराम गुप्ता, मुंबई से शिव कुमार गुप्ता, छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल आदि कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का संचालन शिवानंद द्विवेदी द्वारा किया गया जबकि सहयोगियों में पत्रिका समूह के वरिष्ठ पत्रकार मृजेंद्र सिंह एवं आरटीआई ग्रुप के आईटी सेल के प्रमुख पवन दुबे सम्मिलित रहे।

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Breaking: विशेष लोक अभियोजक सचिन द्विवेदी का एडीजे पद पर चयन

रीवा जिले के सचिन द्विवेदी विशेष लोकायुक्त कोर्ट में सहायक लोक अभियोजक के तौर पर दे रहे थे सेवा। मिशन फ्री लीगल एजुकेशन नियमित ऑनलाइन क्लास में देश के कोने कोने में फैला रहे न्यायिक ज्ञान का उजियारा।

दिनांक 3 मार्च 2023 रीवा मध्य प्रदेश। रीवा जिले में विशेष लोकायुक्त कोर्ट में कार्यरत सहायक लोक अभियोजक सचिन द्विवेदी का एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज के पद पर चयन हुआ है। इस खबर से रीवा जिला और देश में उनके प्रशंसकों के बीच खुशी की लहर है। बता दें कि सचिन द्विवेदी रीवा जिले में सहायक लोक अभियोजक के तौर पर अपनी सेवा दे रहे हैं। पिछले 3 वर्षों से वह विशेष न्यायाधीश लोकायुक्त कोर्ट रीवा में विशेष लोक अभियोजक के तौर पर कार्यरत हैं।

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बताया जाता है कि उनके कार्यकाल के दौरान लोकायुक्त के पेंडिंग पड़े हुए प्रकरणों में प्रकरणों के निपटारे में काफी तेजी आई है और प्रति 10 में से लगभग 9 मामले शासन के पक्ष में जा रहे हैं। जानकारों का यह मानना है कि इसके पहले इस प्रकार की स्थिति नहीं थी और लोकायुक्त कोर्ट में मामले काफी समय से विवेचना में पेंडिंग पड़े रहते थे। अभी हाल ही में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज के लिए परीक्षा में उत्तीर्ण करने के बाद इंटरव्यू में चयन होने के बाद एडीजे पद के लिए रिजल्ट घोषित हुआ है जिसमें उनका चयन किया गया है।

मिशन फ्री लीगल एजुकेशन के माध्यम से देश के कोने कोने में फैलाया जा रहा न्यायिक जागरूकता का उजियारा:

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा बताया गया की अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा और उनकी टीम के माध्यम से मिशन फ्री लीगल एजुकेशन के तहत प्रतिदिन सुबह 8:00 से 9:00 और कभी कभी सायंकाल 7:00 से 8:00 तक 1 घंटे का मिशन फ्री लीगल एजुकेशन का कार्यक्रम रखा जाता है जिसके माध्यम से देश के विभिन्न कोनों से पार्टिसिपेंट्स जुड़ते हैं और वह न्यायिक ज्ञान प्राप्त करते हैं। इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जूम मीटिंग के माध्यम से किया जा रहा है जिसमें प्रतिभागियों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। समय-समय पर मिशन फ्री लीगल एजुकेशन के माध्यम से एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज, रिटायर्ड जज, हाईकोर्ट के न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं कानूनी जजानकार और वरिष्ठ प्राध्यापक कार्यक्रम में सम्मिलित होते हैं और मुफ़्त ऑनलाइन शिक्षा देते हैं जिसका लाभ देश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में प्रतिभागी लेते हैं। इसी श्रृंखला में एडीजे पद पर चयनित सचिन द्विवेदी भी प्रतिदिन कार्यक्रम में आकर प्रतिभागियों को न्यायिक शिक्षा देते हैं। इस प्रकार आयोजित कार्यक्रम से आज पूरे देश में सहायक लोक अभियोजक, एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज एवं अन्य न्यायिक पदों पर छात्र चयनित हो रहे हैं। साथ में देश के कोने कोने से प्रैक्टिसिंग अधिवक्ताओं के ज्ञान में वृद्धि हो रही है और गुणवत्तापूर्ण वकालत का भी नमूना देखने को मिल रहा है।
मिशन फ्री लीगल एजुकेशन का संयोजन वरिष्ठ हाई कोर्ट जबलपुर के अधिवक्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट नित्यानंद मिश्रा के द्वारा किया जा रहा है।

एडीजे पद पर चयनित सचिन द्विवेदी को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी, अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, शिवेंद्र मिश्रा, पूर्व जनपद उपाध्यक्ष संजय पांडे, शिवेंद्र मिश्रा, गोपाल गौतम और अंबुज पांडे सहित सभी ने बधाई और शुभकामनाएं दी है और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।

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Breaking: यदि प्रस्तावित डेटा बिल पास हुआ तो इन जानकारियों से होना पड़ेगा दूर,138 वें RTI वेबिनार में डेटा बिल के दुष्प्रभावों पर हुई चर्चा

RTI कानून को ब्यूरोक्रैटिक सूचना आयुक्त कर रहे खोखला // पार्टिसिपेंट्स ने किए सवाल तो विशेषज्ञों ने दिए जवाब//

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दिनांक 12 फरवरी 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

प्रस्तावित डेटा बिल के दुष्प्रभावों को लेकर एक बार पुनः 138 वें राष्ट्रीय सूचना के अधिकार वेबीनार में चर्चा का दौर गर्म रहा। उपस्थित विशेषज्ञों और आरटीआई के क्षेत्र में काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों पर जमकर प्रहार किया। उपस्थित आरटीआई कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार डेटा बिल के माध्यम से जो प्रस्तावित मसौदा लाने वाली है उसे सूचना के अधिकार कानून खोखला हो जाएगा।

यदि डेटा बिल प्रस्तावित मसौदे में पास हुआ तो महत्वपूर्ण और सामान्य जानकारियों से भी हो जाएंगे दूर – शैलेश गांधी

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर पधारे पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि सूचना के अधिकार कानून को लाने के लिए हम लोगों ने काफी मशक्कत की है और मजदूर किसान शक्ति संगठन सहित अन्य लोगों के साथ मिलकर हमने जो सूचना का अधिकार कानून लाया है अब सरकार सूचना के अधिकार कानून को विभिन्न स्तर पर कमजोर करना चाह रही है। पहले सरकार ने कई अमेंडमेंट लाए जिसमें सूचना आयुक्त के कार्यकाल और टेनर पर प्रहार किया और बदलाव किया गया। और अब प्रस्तावित डेटा बिल के माध्यम से आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) हटाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निजता के नाम पर आम जनता से जुड़ी हुई कई सामान्य जानकारी जैसे राशन कार्ड, राशन मिलने संबंधी जानकारी, मजदूरों की मजदूरी से संबंधित मस्टररोल, आम नागरिक के पेंशन की जानकारी से लेकर शासकीय कामकाज की जानकारी मिलना मुश्किल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मात्र 5 प्रतिशत लोगों को लाभ देने के उद्देश्य से 95 परसेंट देश की आम जनता के साथ धोखा किया जा रहा है। हम सामान्य तौर पर जो जानकारी हासिल कर लेते थे अब डेटा प्रोटेक्शन बिल के नाम पर वह हमे नहीं मिल पाएगी। उन्होंने कहा कि देश के समस्त नागरिकों और आरटीआई से जुड़े हुए लोगों को अभियान चलाना चाहिए और लोगों को अधिक से अधिक जोड़कर आरटीआई कानून की विशेषता बताते हुए डाटा बिल के माध्यम आर टी आई कानून को खत्म करने का सरकार का जो प्रयास है उसके बारे में आम जनता को अवगत कराएं।

सूचना के अधिकार कानून को लाने में पत्रकारों की भूमिका अहम – आत्मदीप

पूर्व मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने कहा कि मजदूर किसान शक्ति संगठन और नेशनल कैंपेन फॉर राइट टू इनफार्मेशन जैसे संगठनों के दौर में भी पत्रकारों की भूमिका बहुत अहम रही है। उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि प्रभाष जोशी एक ऐसे पत्रकारों में से रहे हैं जिन्होंने आरटीआई कानून के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया हुआ था। जब उन्होंने और अन्य पत्रकारों ने अपनी लेखनी के माध्यम से भी सूचना के अधिकार के महत्व को रेखांकित करते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था और तब जाकर हमें महत्वपूर्ण सूचना का अधिकार कानून प्राप्त हुआ है। लेकिन आज कल जो पत्रकारिता चल रही है वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और पत्रकारों को आरटीआई के विषय में कलम चलाने का समय नहीं मिल रहा है।

पत्रिका अखबार में एक दौर था जब आरटीआई पर रोजाना आर्टिकल छपते थे – कैलाश सनोलिया

मध्यप्रदेश से अधिमान्य पत्रकार कैलाश सनोलिया ने कहा कि एक दौर था जब पत्रिका अखबार में प्रतिदिन फ्रंट पेज पर आरटीआई और सूचना के अधिकार से संबंधित आवेदन से लेकर अपील तक कैसे करें और किस विभाग से क्या जानकारी प्राप्त करें इस विषय में जन जागरूकता बढ़ाने के लिए फ्रंट पेज पर आर्टिकल छपता था। आरटीआई से संबंधित समाचारों को प्रमुखता दी जाती थी और अखबार और पत्रकार इस विषय को काफी गंभीरता से लेते थे लेकिन आज वह समय आ गया है जब हम न्यूज़ बना कर भी देते हैं तो भी अखबारों में आरटीआई से संबंधित समाचार कम छपती है। इसी का लाभ उठाते हुए सरकारें जनता के सबसे महत्वपूर्ण पारदर्शिता के कानून आरटीआई पर प्रहार करते हुए उसे संशोधित करना चाह रही है। उन्होंने कहा इस विषय पर जनता को आवाज उठानी पड़ेगी और जब जनता आवाज उठाएगी तो स्वाभाविक तौर पर पत्रकार वहां पर जाएंगे और उस खबर को छापेंगे। कहीं न कहीं इसके लिए जनता भी जिम्मेदार है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता एवं माहिती अधिकार मंच मुंबई के संयोजक भास्कर प्रभु, जयपाल सिंह खींची, मेघराज सिंह, सोमशेखर राव, जतिंदर सिंह, उत्तराखंड से आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर, जबलपुर से वरिष्ठ अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, जय कृष्णा, महेंद्र कुमार, राज तिवारी, पत्रकार सत्येंद्र सिंह चौहान सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार रखे और सवाल पूछे।

कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा किया गया जबकि सहयोगीयों में पत्रिका समूह के वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह, आरटीआई रिवॉल्यूशनरी आईटी सेल के प्रमुख पवन दुबे, शिवेंद्र मिश्रा और देवेंद्र अग्रवाल सहयोगी रहे।

स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश

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Breaking: डेटा बिल आरटीआई कानून के लिए बड़ा खतरा – शैलेश गांधी // प्रस्तावित डेटा विल से आरटीआई के संशोधन वाली धाराएं हटाई जाए – आत्मदीप

आरटीआई कानून को बचाने के लिए सतत संघर्ष जारी रखना पड़ेगा – भास्कर प्रभु // सेव आरटीआई स्टोरीज के माध्यम से जनता के पास पहुंचे संदेश – शैलेश गांधी

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दिनांक 5 फरवरी 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

आरटीआई कानून को बचाने के लिए एक बार पुनः पूरे देश के पूर्व सूचना आयुक्तों और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने कमर कस ली है। दिनांक 5 फरवरी 2023 को आयोजित 137 वें राष्ट्रीय आरटीआई वेबीनार के दौरान यह बात कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, पूर्व मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप एवं माहिती अधिकार मंच मुंबई के संयोजक एवं वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता भास्कर प्रभु सहित उपस्थित आरटीआई कार्यकर्ताओं और देश के गणमान्य नागरिकों ने रखी है।

सेव आरटीआई स्टोरीज के माध्यम से जनता के सामने डेटा बिल के दुष्प्रभाव को सामने लाएं – शैलेश गांधी

कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथि के तौर पर पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने पहले की भांति एक बार पुनः सरकार और न्यायपालिका को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यह सरकारें और न्यायपालिका आरटीआई कानून को खत्म कर देना चाहती है। उन्होंने कहा कि आए दिन आरटीआई कानून में दुष्प्रभावी संशोधन करते हुए सरकार धीरे-धीरे आरटीआई कानून को समाप्त करना चाहती है। वहीं न्यायपालिका के आए दिन आदेश स्वयं ही विचार करने योग्य है जिसमें गैरकानूनी ढंग से आरटीआई कानून को संशोधित कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेशों में कभी यह जानकारी नहीं मिलेगी तो कभी वह जानकारी नहीं मिलेगी, इस प्रकार धारा 8(1)(जे) और निजता के नाम पर आर टी आई पर कुठाराघात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को आम जनता के बीच में जाकर आरटीआई कानून बचाओ इस प्रकार छोटी-छोटी कहानियां जिसमें किस प्रकार दुष्प्रभावी संशोधन से उन्हें राशन, पेंशन और बेसिक एमेनिटीज की जानकारियां प्राप्त नहीं हो सकेंगी और वह परेशान होंगे इन बातों को रखा जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज जनता के बीच में जाकर उन्हें इस आंदोलन में पुनः शामिल करने की जरूरत है तभी आरटीआई कानून बच पाएगा। इस प्रकार उन्होंने कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।

आरटीआई कानून को संशोधित करने वाली सभी धाराएं डाटा बिल से हटाई जाए – आत्मदीप

कार्यक्रम में दूसरे विशिष्ट अतिथि के तौर पर पधारे पूर्व मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने कहा कि आने वाले प्रस्तावित डेटा बिल के माध्यम से सरकार आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) को हटाने का जो सुनियोजित प्लान कर रही है उससे आने वाले दिनों में आम व्यक्ति को काफी परेशानी होगी और सामान्य जानकारियां जो आज हमें प्राप्त हो जाती है उन्हें हासिल करने में दिक्कत होगी। उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालय भी आरटीआई कानून के दायरे में आती हैं जहां पर जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने उपस्थित सहभागियों के कई सवालों के जवाब प्रस्तुत किए और आरटीआई कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर सूचना के अधिकार कानून को बचाने के लिए मुस्तैदी से काम करने का आह्वान किया।

हम पोस्टकार्ड अभियान के माध्यम से आरटीआई कानून को बचाने का कर रहे प्रयास – भास्कर प्रभु

मुंबई से पधारे माहिती अधिकार मंच मुंबई के संयोजक एवं वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता भास्कर प्रभु ने बताया कि उन्होंने एक बार पुनः आरटीआई कानून को प्रस्तावित डाटा बिल से बचाने के लिए पोस्टकार्ड अभियान प्रारंभ कर दिया है। उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में तुषार गांधी और सर्वधर्म गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में पोस्टकार्ड अभियान प्रारंभ किया है और यह सब जानकारी विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा क्योंकि आने वाले दिनों में बजट अथवा मानसून सेशन में सरकार द्वारा प्रस्तावित डेटा बिल के माध्यम से आरटीआई कानून को संशोधित किए जाने का जो सुनियोजित प्लान चल रहा है उससे पहले हमें आरटीआई कानून को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि शासन के समक्ष हमारी बातें पहुंचे और मजे कर रहे अधिकारी और सरकार के नुमाइंदे यह सोचने पर मजबूर हो जाए कि यदि पारदर्शिता और जवाबदेही कानून नहीं रहेगा तो देश में लोकतंत्र मजबूत नहीं बनेगा।

इस प्रकार कार्यक्रम में झारखंड से आरटीआई कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल राजेश मिश्रा एवं छत्तीसगढ़ से आरटीआई वर्कर देवेंद्र अग्रवाल, उत्तराखंड से आरटीआई रिसोर्स पर्सन एवं इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार ठक्कर सहित उपस्थित पत्रकारों और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने अपने विचार रखे और साथ में सवालों के जवाब भी दिए गए।
कार्यक्रम का संयोजन पहले कि भांति सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी, अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, आरटीआई रिवॉल्यूशनरी ग्रुप के आईटी सेल के प्रभारी पवन दुबे एवं पत्रिका समूह के वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह के द्वारा किया गया।।

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Breaking : राजधानी में दिनदहाड़े चाकू दिखाकर दुकान वाले से वसूली

रायपुर,1फरवरी 2023। राजधानी रायपुर में खुलेआम चाकूबाजी कर लूट और वसूली की घटनायें अब आम होती जा रहीं है। वैसे भी पिछले कुछ सालों से शहर और राज्य में इस प्रकार की घटनायें बढ़ती ही जा रहीं हैं।
जारी वीडियो में आप देख सकतें हैं की किस प्रकार भरे बाजार दोपहर 12 बजे के करीब एक नशे में धुत युवक आता है और मेडिकल स्टोर वाले को चाकू दिखाकर रूपये लेकर चला जाता है।
यह घटना 1 फरवरी 2023 की रायपुरा स्थित ओम मेडिकल स्टोर की है ।
ओम मेडिकल स्टोर के संचालक टिकेश्वर सिन्हा बताते हैं कि उनकी मेडिकल स्टोर में रुपेश कुमार काउंटर था तब तब यह युवक आता है और चाकू किया नोक पर पास में खड़े ग्राहक के गले में चाकू टीकाकर 500 रूपये मांगने लगा तो उन्होंने कहा कि मेरे पास रूपये नहीं है तब आरोपी युवक ने रुपेश कुमार को धमकाया तो रुपेश ने 200 रूपये दे दिये।
सूत्र बताते हैं कि इस घटना को अंजाम देने के बाद यह आरोपी युवक सामने की महाराज होटल से 100 रूपये और सब्जी बेंचने वाले से 500 रूपये चाकू दिखाकर वहां पर भी वसूली करता है! और रह चलती चार पहिया वाहनों के शीशे भी तोड़ता है!

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रायपुरा के दुकान संचालकों द्वारा जल्द ही थाने में घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कहीं।

सवाल यह है कि क्यों राजधानी कि पुलिस प्रशासन इस तरह की घटनाओं को रोकने में नाकाम क्यों हो रही है और कैसे इस तरह के अपराधी खुलेआम नशे में धुत होकर घूम घूम कर घटनाओं को अंजाम दे रहें हैं?

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Breaking: कोर्ट में पेंडिंग मामलों पर जजों ने सरकार को कोसा, 135 वें राष्ट्रीय आरटीआई वेबीनार में कोर्ट के पेंडिंग मामलों को लेकर आयोजित हुआ कार्यक्रम

इलाहाबाद के पूर्व जज कमलेश्वर नाथ ने रखे अपने विचार।

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गुजरात एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज ने भी कहा सरकार है जिम्मेदार।।

दिनांक 22 जनवरी 2023 रीवा मध्य प्रदेश। भारत के विभिन्न न्यायालयों में बढ़ते कोर्ट केस को लेकर चिंता जाहिर करते हुए पूर्व हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों और एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज ने चिंता जाहिर की है। दिनांक 22 जनवरी 2023 को आयोजित किए गए 135 वें राष्ट्रीय आरटीआई जूम मीटिंग के दौरान यह बात खुलकर सामने आई।

जजों की नियुक्ति और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी पेंडेंसी का मुख्य कारण – न्यायाधीश

इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड पूर्व जस्टिस कमलेश्वर नाथ ने मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर चर्चा की। वर्तमान कॉलेजियम सिस्टम पर उठे विवाद को लेकर कमलेश्वर नाथ ने कहा कि यदि सरकार कोई अपना कानून मंत्री अथवा प्रतिनिधि कॉलेजियन में नियुक्त करना चाहती है तो उसमें कॉलेजियम के जजों को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। न्यायपालिका और सरकार के बीच संवाद बना रहे इसके लिए आवश्यक है कि सरकार की तरफ से भी कोई सदस्य कोलेजियम में सम्मिलित हो। लेकिन कॉलेजियम सिस्टम पूरी तरह से बंद हो जाए और सरकार का नियंत्रण हो जाए यह गलत होगा। वहीं देश में विभिन्न न्यायालयों में बढ़ते हुए कोर्ट केस को लेकर जस्टिस कमलेश्वर नाथ ने कहा कि इसके लिए कई बातें जिम्मेदार हैं जिसमें प्रमुख रुप से आधारभूत ढांचों की कमी के साथ पर्याप्त संख्या में जजों की कमी, सरकारी वकीलों का रुचि न लेना और साथ में प्रशासन द्वारा समय पर जवाब प्रस्तुत न किया जाना जैसे कई कारण जिमेदार हैं। उन्होंने राजनीति के अपराधीकरण पर भी चिंता जाहिर की और कहा कि कोर्ट में जज के समक्ष चार्ज फ्रेम होने के बाद जिनके आरोप तय हो चुके हैं ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने पर बैन लगाया जाना चाहिए।

जस्टिस मलिमठ कमेटी के 10 लाख लोगों के बीच 51 जजों की नियुक्ति ठंडे बस्ते पर – एड़ीजे कनुभाई राठौर

वहीं मामले पर अपने विचार रखते हुए गुजरात के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज कनुभाई राठौर ने कहा कि देश में पेंडिंग मामलों के पीछे कई कारण हैं जिसमें प्रमुख रूप से उन्होंने भी आधारभूत ढांचे की कमी पर्याप्त व्यवस्था का अभाव और साथ में जजों और वर्कर्स की कमी ही मुख्य कारण बताया। जज कनुभाई राठौर ने कहा कि जस्टिस मलिमथ कमेटी ने एक बार अपने अनुशंसा में बताया कि 10 लाख लोगों के बीच 51 जज होने चाहिए। लेकिन वर्तमान में देखा जाए तो सरकार ने 10 लाख लोगों के बीच 21 जज रखे थे जो प्रैक्टिकल तौर पर 14.4 जज प्रति 10 लाख लोग ही हैं। एडीजे कनुभाई राठौर ने बताया कि कॉलेजियम सिस्टम ठीक है और उसमें राजनीतिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। न्यायपालिका को और भी स्वायत्त और सक्षम बनाने के लिए सरकार प्रयास करें।

कार्यक्रम में नेशनल फेडरेशन फॉर सोसायटी फॉर फास्ट जस्टिस के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण भाई पटेल, जबलपुर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा और उत्तराखंड आरटीआई रिसोर्स पर्सन एवं कंप्यूटर एजुकेशन के एसोसिएट प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने भी अपने विचार रखे।
प्रवीण भाई पटेल ने भी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उसकी नीतियों पर जमकर फटकार लगाई और कहा कि सरकार न्यायपालिका को भी कब्जे में करना चाहती है और अपने कंट्रोल में लेते हुए देश में अपना एक छत्र राज्य चलाना चाहती है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को प्रभावित करने से पूरे देश की व्यवस्था खराब हो जाएगी और ऐसे में न्यायपालिका भी स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं रह जाएगी।

कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी, अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल, पत्रिका समूह के वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह और आरटीआई रिवॉल्यूशनरी ग्रुप के आईटी सेल के प्रभारी पवन दुबे के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में गुजरात से रोशनी सहित अन्य पार्टिसिपेंट्स ने भी अपने कई प्रश्न रखें जिसमें उपस्थित जजों ने जवाब प्रस्तुत किए।

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Breaking : दुर्ग के रास्ते धमधा बना अवैध शराब का डंपिंग जोन, 2 सालों में 100 करोड़ से ज्यादा की शराब बेची, अफसर संदेह के घेरे में?

Manish Bagh
रायपुर। धमधा पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद शराब तस्कर आरोपी चालक ने कई बड़े राज खोले हैं। दूर पुलिस के हाथ 35 लाख रुपए के स्टाक जप्त करने के बाद पता चला है कि सारा माल पम्मा सरदार के कहने पर लाया गया था। ब्रिज के नीचे से ही पूरा कारोबार चल रहा था। 2 साल पहले से मध्यप्रदेश ब्रांड की शराब लाने का खेल चल रहा था। 250 ट्रक शराब अब तक लाकर खा पाया गया था। एसपी दुर्ग अभिषेक पल्लव के बड़ा खुलासा करने के बाद आबकारी विभाग के अफसर अब संदेह के दायरे में हैं। खासकर दुर्ग और धमधा में सर्विलांस टीम उड़नदस्ता और सर्किल स्तर पर जमे हुए अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। भीड़भाड़ वाले रास्तों से शराब से भरी ट्रकों का ग्रामीण इलाकों में पहुंचना मिलीभगत होने की आशंका को बढ़ावा दे रहा है। पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है उनके नाम दशरथ सिंह मीणा और विनोद पटेल है जो कोहका के रहने वाले है। पूछताछ में दोनों ने यह स्वीकार किया है कि अम्मा सरदार उन्हें एक ट्रिप के पीछे 1 लाख रुपए तक देता था। उन्होंने सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र से भी शराब लाकर पम्मा के बताए हुए ठिकाने पर डंप किया था। दुर्ग जिले में जिस तरह से धमधा को शराब ठिकाने लगाने के लिए डंपिंग जोन बनाया गया था, उसने आबकारी अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शराब के अवैध कारोबार का काला खेल लंबे अरसे से चलता आ रहा है और इसे पूरी तरह से संरक्षण भी मिलता आ रहा है। पुलिस की जांच में आगे और भी खुलासे संभव है।
वरिष्ठ अधिकारी मौन
धमधा में शराब का बड़ा जखीरा मिलने के बाद आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मीडिया कर्मियों ने इस मामले को लेकर वरिष्ठ अफसरों से संपर्क साधने की कोशिश की। फोन लगाने पर भी एमडी कार्यालय सीएसएमसीएल से कोई जवाब नहीं मिला। गौरतलब है कि इसके पूर्व होने वाली विभागीय समीक्षा बैठकों में वरिष्ठ अफसरों ने साफ कर दिया था कि जिन क्षेत्रों में अवैध कारोबार का खुलासा होगा वहां प्रभारी अधिकारियों की जांच कर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। दुर्ग जिले में एक बड़े खुलासे के बाद भी वरिष्ठ अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
सस्ती कीमत का फायदा उठाकर कारोबार
शराब की अवैध कारोबार के मामले में जो तस्वीरें सामने आई है उससे पता चलता है कि राज्य के बाहर ठेका प्रथा में बिकने वाली शराब की कीमत छत्तीसगढ़ से कम है। वहां बनने वाली शराब की कीमत कम होने पर एजेंटों का नेटवर्क बनाकर उन्हें मोटा कमीशन भी दिया जा रहा है ताकि शराब की तस्करी छत्तीसगढ़ राज्य के तमाम जिलों में हो सके। दुर्ग से शराब की तस्करी करने वाले रसूखदार तस्करों को पकड़ पाने में आबकारी विभाग के अफसर नाकाम रहे हैं।
मुख्य आरोपी की तस्दीक करेंगे
दुर्ग ग्रामीण एडिशनल एसपी अनंत साहू ने खास बातचीत में बताया कि आरोपियों ने कथित अमर सरदार का नाम बताया है जिसकी तस्दीक करने निर्देश दिए हैं। एडिशनल एसपी ने कहा प्रारंभिक बयान में जिस व्यक्ति का नाम पम्मा सरदार बताया गया है, उसके बारे में जानकारी ली जा रही है।

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Breaking: पताई सहित दर्जनों पंचायतों में अधूरी पड़ी गोशाला योजना, वेंडरों की दलाली में फंसा पंचायतों का विकास, सरपंच सचिवों के भ्रष्टाचार की बलि चढ़ रही गौशालाएं

पूर्व और वर्तमान सरपंच सचिवों ने हजम किया गोवंशों का अधिकार।

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सीईओ ज़िला पंचायत के फरमान हवा हवाई, सरपंच सचिव नही दे रहे कोई तवज्जो।।

दिनांक 3 जनवरी 2023 रीवा मध्य प्रदेश।

प्रदेश में मुख्यमंत्री गौशाला योजना के हाल काफी खराब हैं। रीवा जिले में इस योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन सैकड़ों गौशालाओं में वर्षों से काम पेंडिंग पड़ा हुआ है। कई गौशालाएं सरपंच सचिवों और वेंडर्स की मनमानी के चलते पूरी नहीं हो पा रही है। गौशालाओं पर कार्य करने के लिए सरपंच सचिव कुछ रुचि नहीं दिखा रहे जिसकी वजह से काम अधर में लटका पड़ा है। पिछली पंचवर्षीय में प्रारंभ किए गए सैकड़ों गौशालाओं के निर्माण कार्य पूर्ण न हो पाने की वजह से भीषण ठंड के मौसम में गोवंश दर-दर मारे मारे फिर रहे हैं। भूखे और बेसहारा गोवंश जब किसानों के खेत में पहुंचते हैं तो उन्हें वहां क्रूरता का सामना करना पड़ता है और इसी प्रकार सड़कों पर भी वाहनों की ठोकर खाकर लंगड़े लूले होकर अपनी जान दे रहे हैं।

पताई ग्राम पंचायत जनपद गंगेव में सरपंच सचिव और वेंडर्स की दलाली में अधर में लटका गौशाला निर्माण कार्य

गंगेव जनपद में भठवा क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है जहां सैकड़ों की संख्या में गोवंश एकत्रित होकर रोड में पड़े रहते हैं और आसपास की फसल को भी नुकसान करते हैं जिसकी वजह से उन्हें क्रूरता का शिकार होना पड़ता है। अभी कुछ दिन पूर्व भठवा पताई के बीच किसी श्रीवास्तव के खेत में करंट की वजह से आधा दर्जन से अधिक गर्भवती गाएं मर गई थीं। ऐसे ही आए दिन भठवा में वाहनों के आवागमन और ट्रकों की चपेट में गोवंश आते हैं और अपना शरीर अंग भंग करवाते हैं। गंगेव जनपद की पताई ग्राम पंचायत में गौशाला निर्माण का कार्य पिछले पंचवर्षीय से प्रारंभ हुआ है लेकिन अभी तक पूर्ण नहीं हो पाया है। बताया गया है कि कुछ दलाल वेंडर्स जो गौशालाओं को अपनी प्रॉपर्टी मान बैठे हैं सामग्री की सप्लाई नहीं कर पा रहे और सरपंच सचिव भ्रष्टाचार में मजे मार रहे हैं जिसकी वजह से कार्य अधूरा पड़ा है। अभी कुछ दिन पहले शांतिधाम पताई में कई गोवंशों को कैद कर दिया गया था जिसमें कुछ गोवंश ठंड में मर भी गए थे। जिस पताई ग्राम पंचायत में वर्षों से गौशाला निर्माण का कार्य सरकार के द्वारा कराया जा रहा है वहां सरपंच सचिव द्वारा सरकारी पैसे से अवैध बाडों का निर्माण कर गोवंशों को मारा जा रहा है। जब पताई ग्राम पंचायत के सरपंच मिठाईलाल विश्वकर्मा एवं सचिव पवन कुमार पटेल से इस मामले में चर्चा की गई तो बताया गया कि वेंडर्स सामग्री की सप्लाई नहीं कर रहे हैं जिसकी वजह से गौशाला निर्माण पूर्ण नहीं हो पा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि नई पंचायत का कार्य काल प्रारंभ हुए छह माह का समय व्यतीत हो रहा है और ऐसे में यदि अभी तक वेंडर्स नहीं मिले तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

सैकड़ों गौशालाओं का कार्य अधर में, सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में जिम्मेदार लगा रहे पलीता

यदि देखा जाए तो पताई ग्राम पंचायत की तरह ही आसपास की भौखड़ी, सरई, पनगड़ी, क्योटी और हिनौती एवं दर्जनों ऐसी पंचायतों में जिले भर में गौशालाओं के निर्माण का कार्य अधर में लटका हुआ है। त्योंथर जनपद पंचायत की काकर ग्राम पंचायत में भी 3 गौशालाओं का कार्य रानीखेत योजना के तहत किया जाना था जिसमें पूर्व सरपंच के कार्यकाल में जमकर भ्रष्टाचार हुआ और सामग्री के नाम पर राशि की निकासी किया जाकर घटिया निर्माण कर गौशालाओं को आधी अधूरी छोड़ दिया गया है। काकर में गौशाला निर्माण को लेकर जब वहां के वर्तमान सरपंच मनीष सिंह से बात की गई तो उनके द्वारा बताया गया की पूर्व में जो पैसा निकाला गया है उसका मूल्यांकन सही ढंग से नहीं किया गया है इसलिए वह कार्य नहीं लगा रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि पूर्व के निर्माण कार्य का मूल्यांकन अब तक क्यों नहीं हुआ और कितना पैसा निकाला गया है प्रशासन को इसकी जानकारी निकाल कर गौशालाओं का तत्काल निर्माण कराया जाना चाहिए।

रीवा जिले के गौशाला घोटाले की शिकायत ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त तक

गौरतलब है कि इस मामले में रीवा जिले में हुए व्यापक स्तर के गौशाला घोटाले के संदर्भ में शिकायत स्थानीय निवासी पीयूष पांडेय द्वारा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ भोपाल एवं लोकायुक्त भोपाल में पहले ही दर्ज की जा चुकी है जिसकी जांच के लिए प्रतिवेदन संबंधित जिला पंचायत रीवा और जिला कलेक्टर रीवा के माध्यम से मागा गया है।

स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश

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