अनुकंपा नियुक्ति में चपरासी पद स्वीकारने के बाद उच्च पद की मांग खारिज, हाई कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
बिलासपुर। पिता की मृत्यु के बाद नगर निगम बीरगांव में प्यान के पद पर अनुकंपा नियुक्ति स्वीकार कर नौकरी शुरू करने वाले युवक को हाई कोर्ट ने सहायक ग्रेड-3 का पद देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि नियुक्ति मिलने और कार्यभार ग्रहण करने के बाद उसी आधार पर दूसरे या उच्च पद की मांग नहीं की जा सकती।
शैक्षणिक योग्यता का दिया तर्क
महेंद्र के अधिवक्ता ने कहा कि उसकी शैक्षणिक योग्यता अधिक है और उसने प्यून के बजाय सहायक ग्रेड-3 पद मांगा था। निगम आयुक्त ने पद की उपलब्धता पर संयुक्त संचालक से मार्गदर्शन भी मांगा था। याचिकाकर्ता के अनुसार, निगम में सहायक ग्रेड-3 के आठ स्वीकृत पद है और नीति के तहत इस पद पर कुल स्वीकृत संख्या के 10 प्रतिशत तक अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकती है। आठ पदों का 10 प्रतिशत 0.8 होता है। न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने रायपुर जिले के हिरानगर, अछोली-उरला निवासी महेंद्र आदिल की याचिका प्रारंभिक सुनवाई में खारिज कर दी। महेंद्र के पिता राजेंद्र आदिल नगर निगम बीरगांव में राजस्व निरीक्षक थे। सेवा के दौरान 24 जुलाई 2025 को उनका निधन हो गया था। इसके बाद महेंद्र ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। निगम ने पांच मई 2026 को उसे चपरासी के पद पर नियुक्त किया, जिसे स्वीकार कर उसने कार्यभार संभाल लिया।
राज्य की नीति को बताया महत्वपूर्ण
राज्य सरकार ने नीति के खंड 20(1) का हवाला देते हुए कहा कि नियुक्ति मिलने के बाद दूसरे पद पर नियुक्ति या दिए गए पद में बद का आवेदन स्वीकार नहीं किया जा बदलाव सकता। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले आइजी (कार्मिक) विरुद्ध प्रह्लाद मणि त्रिपाठी का भी उल्लेख किया।
पसंद का विशेष पद पाने का अधिकार नहीं
हाई कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति में पसंद का विशेष पद पाने का अधिकार नहीं है। पात्रता, उपलब्ध पद और अन्य परिस्थितियों के आधार पर सक्षम प्राधिकारी निर्णय लेता है। कम पद पर नियुक्ति स्वीकार करने के बाद कर्मचारी उच्च पद का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने सहायक ग्रेड-3 पद देने का निर्देश देने से इनकार कर याचिका खारिज कर दी।



