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वेद प्राचीन है सनातन जैन संस्कृति

रायपुर। श्री दिगंबर जैन महिला महासभा की छत्तीसगढ़ राज्य इकाई के द्वारा “सनातन जैन संस्कृति और उसका गौरवमय इतिहास” विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई।
कार्यक्रम अध्यक्ष उषा गंगवाल ने जैन धर्म की जियो और जीने दो की संस्कृति पर प्रकाश डाला वहीं मुख्य वक्ता एवं श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैलाश रारा ने बताया कि वेदों की 141 ऋचाओं में प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का उल्लेख आता है अस्तु सनातन संस्कृति एक प्राग वैदिक संस्कृति है। इतिहासविद डॉ. रामेन्द्र नाथ मिश्रा ने छत्तीसगढ़ के राज ऋषि तुल्य कुल के जैन राजाओं का संबंध उड़ीसा के खारवेल शासकों के साथ जोड़ा। पुरातत्वविद डॉ. हेमू यदु ने ऋषभ तीर्थ गूंजी, आरंग के भांडदेवल जैन मंदिर एवं महेशपुर की आदिनाथ प्रतिमा पर सविस्तार प्रकाश डालते हुए बताया कि ईशा की छठी सातवीं शताब्दी से लेकर 15 वीं 16 वीं शताब्दी तक छत्तीसगढ़ में जैन धर्म का प्रभाव रहा। मुख्य अतिथि शिक्षा सचिव सुनिल जैन ने बताया कि जैन धर्म के एक सिद्धांत “अहिंसा” की ताकत के बल पर महात्मा गांधी ने भारत को अंग्रेजों की दासता से मुक्ति दिला दी। अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य अनिल जैन ने जैन जीवन मूल्यों की व्याख्या करते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार की अल्पसंख्यक कल्याणकारी योजनाओं पर प्रकाश डाला। भाजपा नेता सुरेंद्र पाटनी ने सनातन एवं जैन धर्म को परिभाषित करते हुए इसके सुंदर समन्वय को सराहा। तीर्थ संरक्षिणी के उपाध्यक्ष ज्ञानचंद पाटनी ने छत्तीसगढ़ में जैन संस्कृति की प्राचीनता एवं इसकी सनातनता पर गर्व प्रकट किया। जैन महासभा के केंद्रीय उपाध्यक्ष गजेंद्र पाटनी ने संगोष्ठी में उपस्थित विद्वान वक्तागण एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए समय-समय पर ऐसे आयोजन करते रहने की आवश्यकता पर बल दिया।

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मंच संचालिका ममता जैन के अनुसार कार्यक्रम में संस्कृति विभाग के उपनिदेशक प्रताप पारख, भारतीय जैन संघटना के प्रदेश अध्यक्ष मनोज लुंकड़ एवं क्रेडा के संजीव जैन तथा फिल्म निर्माता संतोष जैन भाजपा प्रवक्ता राजकुमार राठी एवं कवियत्री उर्मिला उर्मि की उपस्थिति को उल्लेखनीय बतलाया।
इस अवसर पर एम. राजीव सर की युवा संस्था को महावीर सम्मान से सम्मानित किया गया।

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