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Breaking: कोर्ट में पेंडिंग मामलों पर जजों ने सरकार को कोसा, 135 वें राष्ट्रीय आरटीआई वेबीनार में कोर्ट के पेंडिंग मामलों को लेकर आयोजित हुआ कार्यक्रम

इलाहाबाद के पूर्व जज कमलेश्वर नाथ ने रखे अपने विचार।

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गुजरात एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज ने भी कहा सरकार है जिम्मेदार।।

दिनांक 22 जनवरी 2023 रीवा मध्य प्रदेश। भारत के विभिन्न न्यायालयों में बढ़ते कोर्ट केस को लेकर चिंता जाहिर करते हुए पूर्व हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों और एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज ने चिंता जाहिर की है। दिनांक 22 जनवरी 2023 को आयोजित किए गए 135 वें राष्ट्रीय आरटीआई जूम मीटिंग के दौरान यह बात खुलकर सामने आई।

जजों की नियुक्ति और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी पेंडेंसी का मुख्य कारण – न्यायाधीश

इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड पूर्व जस्टिस कमलेश्वर नाथ ने मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर चर्चा की। वर्तमान कॉलेजियम सिस्टम पर उठे विवाद को लेकर कमलेश्वर नाथ ने कहा कि यदि सरकार कोई अपना कानून मंत्री अथवा प्रतिनिधि कॉलेजियन में नियुक्त करना चाहती है तो उसमें कॉलेजियम के जजों को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। न्यायपालिका और सरकार के बीच संवाद बना रहे इसके लिए आवश्यक है कि सरकार की तरफ से भी कोई सदस्य कोलेजियम में सम्मिलित हो। लेकिन कॉलेजियम सिस्टम पूरी तरह से बंद हो जाए और सरकार का नियंत्रण हो जाए यह गलत होगा। वहीं देश में विभिन्न न्यायालयों में बढ़ते हुए कोर्ट केस को लेकर जस्टिस कमलेश्वर नाथ ने कहा कि इसके लिए कई बातें जिम्मेदार हैं जिसमें प्रमुख रुप से आधारभूत ढांचों की कमी के साथ पर्याप्त संख्या में जजों की कमी, सरकारी वकीलों का रुचि न लेना और साथ में प्रशासन द्वारा समय पर जवाब प्रस्तुत न किया जाना जैसे कई कारण जिमेदार हैं। उन्होंने राजनीति के अपराधीकरण पर भी चिंता जाहिर की और कहा कि कोर्ट में जज के समक्ष चार्ज फ्रेम होने के बाद जिनके आरोप तय हो चुके हैं ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने पर बैन लगाया जाना चाहिए।

जस्टिस मलिमठ कमेटी के 10 लाख लोगों के बीच 51 जजों की नियुक्ति ठंडे बस्ते पर – एड़ीजे कनुभाई राठौर

वहीं मामले पर अपने विचार रखते हुए गुजरात के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज कनुभाई राठौर ने कहा कि देश में पेंडिंग मामलों के पीछे कई कारण हैं जिसमें प्रमुख रूप से उन्होंने भी आधारभूत ढांचे की कमी पर्याप्त व्यवस्था का अभाव और साथ में जजों और वर्कर्स की कमी ही मुख्य कारण बताया। जज कनुभाई राठौर ने कहा कि जस्टिस मलिमथ कमेटी ने एक बार अपने अनुशंसा में बताया कि 10 लाख लोगों के बीच 51 जज होने चाहिए। लेकिन वर्तमान में देखा जाए तो सरकार ने 10 लाख लोगों के बीच 21 जज रखे थे जो प्रैक्टिकल तौर पर 14.4 जज प्रति 10 लाख लोग ही हैं। एडीजे कनुभाई राठौर ने बताया कि कॉलेजियम सिस्टम ठीक है और उसमें राजनीतिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। न्यायपालिका को और भी स्वायत्त और सक्षम बनाने के लिए सरकार प्रयास करें।

कार्यक्रम में नेशनल फेडरेशन फॉर सोसायटी फॉर फास्ट जस्टिस के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण भाई पटेल, जबलपुर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा और उत्तराखंड आरटीआई रिसोर्स पर्सन एवं कंप्यूटर एजुकेशन के एसोसिएट प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने भी अपने विचार रखे।
प्रवीण भाई पटेल ने भी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उसकी नीतियों पर जमकर फटकार लगाई और कहा कि सरकार न्यायपालिका को भी कब्जे में करना चाहती है और अपने कंट्रोल में लेते हुए देश में अपना एक छत्र राज्य चलाना चाहती है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को प्रभावित करने से पूरे देश की व्यवस्था खराब हो जाएगी और ऐसे में न्यायपालिका भी स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं रह जाएगी।

कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी, अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल, पत्रिका समूह के वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह और आरटीआई रिवॉल्यूशनरी ग्रुप के आईटी सेल के प्रभारी पवन दुबे के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में गुजरात से रोशनी सहित अन्य पार्टिसिपेंट्स ने भी अपने कई प्रश्न रखें जिसमें उपस्थित जजों ने जवाब प्रस्तुत किए।

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