सतर्कता:हादसे के बाद नहीं, अब पहले होगी जांच लिफ्ट की ऑडिट का जिम्मा निकायों को

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अपार्टमेंट और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्सों की लिफ्ट में लोगों के फंसने तथा संभावित हादसों की बढ़ती घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने जवाबदेही तय कर दी है। अब लिफ्टों की सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन की निगरानी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को करनी होगी।

सरकार ने इसके लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने पर लिफ्ट सील करने से लेकर जुर्माना लगाने तक की कार्रवाई की जा सकेगी। इसके लिए राज्य शासन ने गाइड लाइन भी जारी कर दी।
प्रदेश में लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें लिफ्ट फंसने से लोगों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में स्थिति गंभीर होने से जान का खतरा भी उत्पन्न हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्य विद्युत निरीक्षक ने लिफ्ट की स्थापना, संचालन और रखरखाव को लेकर विस्तृत गाइडलाइन तैयार की है।
नगरीय प्रशासन विभाग ने इसे निकाय क्षेत्रों में स्थित बहुमंजिला आवासीय और व्यावसायिक भवनों में लागू कराने के निर्देश सभी निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को जारी किए हैं।
गाइडलाइन के अनुसार लिफ्टों का संचालन नेशनल बिल्डिंग कोड, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानकों तथा अन्य लागू अधिनियमों के अनुरूप करना होगा। भवन स्वामी और संचालन एजेंसी को नियमित निरीक्षण और रखरखाव सुनिश्चित करना होगा।
साप्ताहिक से लेकर पांच वर्षीय निरीक्षण तक अनिवार्य नई व्यवस्था में लिफ्ट के साप्ताहिक, मासिक, त्रैमासिक, वार्षिक और प्रत्येक पांच वर्ष में होने वाले निरीक्षण के मानक तय किए गए हैं। साप्ताहिक निरीक्षण में दरवाजों, अलार्म, आपातकालीन व्यवस्था और लिफ्ट पिट की स्थिति की जांच होगी। मासिक निरीक्षण में लुब्रिकेशन, वायर रोप, ब्रेक प्रणाली और सुरक्षा उपकरणों की समीक्षा की जाएगी।
हर तीन महीने में लोड परीक्षण, ओवरस्पीड गवर्नर और डोर इंटरलॉक प्रणाली का सत्यापन करना होगा। वार्षिक निरीक्षण के दौरान वैधानिक जांच, लाइसेंस और अनुज्ञप्तियों का नवीनीकरण किया जाएगा। वहीं प्रत्येक पांच वर्ष में वायर रोप की स्थिति का परीक्षण, प्रमुख ओवरहॉल और व्यापक सुरक्षा परीक्षण अनिवार्य रहेगा।
इन बातों का ध्यान रखना होगा
- लिफ्ट लगाने के पहले: लिफ्ट शाफ्ट (भवन का वह हिस्सा, जिसके अंदर लिफ्ट चलती है) कम से कम दो घंटे अग्निरोधी {लिफ्ट पिट की गहराई 1.5 मीटर, ओवरहेड क्लियरेंस कम से कम 3.5 मीटर {लिफ्ट के लिए अलग बिजली सप्लाई और बैकअप की व्यवस्था।
- यात्रियों के लिए सुरक्षा के निर्देश: 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चे अकेले उपयोग ना करें {लिफ्ट में आग लगने वाली चीजें ना लेकर जाएं {आग लगने पर लिफ्ट के बजाए सीढ़ी का उपयोग करें {लिफ्ट के दरवाजे के बलपूर्वक ना खोलें।
- लिफ्ट में फंस जाने पर क्या करें: अलार्म बटन दबाएं और इंटरकाम का उपयोग करें {जबरन दरवाजा खोलने या छत के ट्रैप डोर से बाहर निकलने का प्रयास ना करें {प्रशिक्षित और तकनीकी कर्मी ही रेस्क्यू करेंगे।
- पालन कराने और दंडात्मक प्रावधान: नियमों का पालन ना करने पर लिफ्ट सील किया जाएगा {नगर निगम एक्ट और अन्य प्रावधान के अनुसार जुर्माना वसूला जाएगा {दुर्घटना और जनहानि होने पर संबंधित भवन स्वामी या एजेंसी जिम्मेदार {गंभीर दुर्घटना की सूचना तत्काल पुलिस को देना होगा



